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Updated: 29 अप्रिल, 2022 07:15 PM
देवेश त्रिपाठी
देवेश त्रिपाठी
  @devesh.r.tripathi
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दिल्ली के जहांगीरपुरी में अतिक्रमण के खिलाफ चले बुलडोजर के बाद राजधानी के अन्य इलाकों में भी ऐसी ही सख्त कार्रवाई की मांग उठने लगी थी. खासतौर से दिल्ली में हुए सीएए विरोधी आंदोलन का गढ़ और दंगों का केंद्र बिंदु रहे शाहीन बाग में बुलडोजर चलाने की मांग ने जोर पकड़ा था. जिसके बाद दिल्ली नगर निगम ने शाहीन बाग इलाके में बिना बुलडोजर के अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाने का ऐलान भी कर दिया था. लेकिन, इस अभियान से पहले ही शाहीन बाग एक बार फिर से ट्विटर की ट्रेंडिंग लिस्ट में शामिल हो गया है. 

हालांकि, इस बार भी शाहीन बाग के नाम के 'दाग' ही जुड़ा है. दरअसल, दिल्ली के जामिया नगर से नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने 50 किलो हाई क्वालिटी हेरोइन, 47 किलो अन्य संदिग्ध नशीला पदार्थ और 30 लाख रुपये की खेप पकड़ी है. एनसीबी ने जिस अपार्टमेंट से ड्रग्स की ये खेप बरामद की है, वो शाहीन बाग इलाके में स्थित है. लेकिन, शाहीन बाग ट्विटर पर केवल इस वजह से ही ट्रेंड नहीं हो रहा है. आइए जानते हैं कि शाहीन बाग ट्विटर की ट्रेंडिंग लिस्ट में क्यों शामिल हो गया है?

शाहीन बाग का नाम ले के देख...पता चल जाएगा

अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई पर शाहीन बाग के एक मुस्लिम युवा का जवाब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर जमकर वायरल हो रहा है. अतिक्रमण के खिलाफ सामान्य तौर पर की जाने वाली कार्रवाई पर पूछे गए सवाल पर ये मुस्लिम युवा कह रहा है कि 'शाहीन बाग में बुलडोजर आएगा. तुम्हें उम्मीद है शाहीन बाग में बुलडोजर आ जाएगा. शाहीन बाग का नाम सुना है आपने. एक बार बोल अपने मुंह से शाहीन बाग. और, फिर फील कर ले कि शाहीन बाग. शाहीन बाग है इसका नाम. यहां बुलडोजर आने के लिए बहुत बड़ा जिगरा चाहिए. समझ रहे हो ना.' जहांगीरपुरी में हुई कार्रवाई के बारे में पूछने पर ये मुस्लिम युवा कहता है कि 'हमने तो इसे देख के इग्नोर मार दिया. समझ रहे हो सब्र...सब्र.'  

जहांगीरपुरी में बुलडोजर चलाने के बाद शाहीन बाग में भी अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई का ऐलान किया गया था. लेकिन, दिल्ली नगर निगम ने साफ कर दिया था कि सामान्य अतिक्रमण अभियान में सड़कों पर अवैध पार्किंग और अवैध रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. तोड़-फोड़ या बुलडोजर वगैरह का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. लेकिन, दिल्ली नगर निगम की ओर से की जाने वाली इस कार्रवाई पर शाहीन बाग के एक मुस्लिम युवा का जवाब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर जमकर वायरल हो रहा है. दरअसल, ये 'भटका हुआ युवा' भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल कर रहा है. वैसे, यहां भटका हुआ लिखने की वजह साफ है कि अगर भड़काऊ बयानबाजी के मामले में पुलिस कार्रवाई करेगी, तो कथित बुद्धिजीवियों का वोक कहलाने वाला और वामपंथी धड़ा खुलकर इस युवा के समर्थन में आ जाएगा. और, इसे सरकार का फासीवाद और मुस्लिम पर अत्याचार का उदाहरण बताने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा.

Shaheen Bagh Muslim Youth twitter शाहीन बाग में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई पर मुस्लिम युवा के भड़काऊ बयान के कई मायने हैं.

जबकि, अतिक्रमण के खिलाफ सामान्य तौर पर की जाने वाली कार्रवाई पर पूछे गए सवाल पर मुस्लिम युवा का जवाब और उसकी भाव-भंगिमाएं देखने लायक हैं. ऐसा लग रहा था कि उसे कानून का कोई डर ही नहीं है. और, शाहीन बाग में केवल वहां के रहने वालों का हुक्म चलता है. ऐसा लग रहा था कि युवा कहना चाहता है कि अगर शाहीन बाग में बुलडोजर आया, तो अतिक्रमण की जगह उसे ही ध्वस्त कर दिया जाएगा. वो भी बिना किसी से डरे.

इस युवा की बात से सीधा सा सवाल यही उपजता है कि क्या शाहीन बाग दिल्ली का कोई ऐसा हिस्सा है, जहां पर कानून का राज नहीं चलता है? आखिर ये युवा किसके दम पर इस लहजे में बात कर रहा है, ये सवाल नहीं पूछा जाना चाहिए. इसका दो टूक जवाब यही है कि शाहीन बाग देश के उन सैकड़ों संवेदनशील इलाकों में से एक है. जहां मुस्लिम आबादी ज्यादा है. और, ये जवाब संविधान और कानून की किताबों में भी लिखा हुआ है. सांप्रदायिक दंगों या आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहने वाले ऐसे इलाकों को इसी नाम से पुकारा जाता है. और, शाहीन बाग भी अब इस लिस्ट में शामिल हो चुका है. क्योंकि, सीएए विरोधी दंगों की आग भड़काने के लिए इसी शाहीन बाग में अराजकता के साथ सड़क ब्लॉक की गई थी.

शाहीन बाग पर क्यों खड़े हो रहे हैं सवाल?

शाहीन बाग में महीनों तक चले इस कथित आंदोलन की फंडिंग कट्टर इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने की थी. इसी पीएफआई की वजह से कर्नाटक में हिजाब विवाद भड़का हुआ है. कहना गलत नहीं होगा कि पीएफआई जैसे संगठन ने शाहीन बाग के मुस्लिम युवाओं पर गहरा असर डाला है. और, जैसा इस मुस्लिम युवा ने कहा कि जहांगीरपुरी में बुलडोजर चलने की घटना पर इसने सब्र कर लिया. तो, कहा जा सकता है कि सब्र का ये बांध टूटने पर फिर से दिल्ली दंगों जैसी ही किसी साजिश को अंजाम दिया जाएगा. क्योंकि, पीएफआई का काम ही यही है. मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को भड़का कर दिल्ली में दंगे करवा कर पीएफआई ने अपनी धमक दर्ज करा ही दी थी. लेकिन, इन तमाम घटनाओं के पीछे की टाइमिंग पर भी सवाल होना लाजिमी है. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आमद पर भड़के दिल्ली दंगे और ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन के भारत आने पर जहांगीरपुरी का बवाल कहीं न कहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को खराब करने की कोशिश है. और, पीएफआई जैसे संगठन इसमें कामयाब होते नजर आते हैं.

अतिक्रमण विरोधी अभियान का 'डर'

खैर, जहांगीरपुरी में अतिक्रमण के खिलाफ की गई कार्रवाई में बुलडोजर के एक्शन का असर शाहीन बाग में महसूस किया जा सकता है. शाहीन बाग के इलाके के बाजारों में सड़कों और फुटपाथ पर अवैध तरीके से किए गए कब्जे दुकानदार खुद ही हटा रहे हैं. आमतौर पर दुकानों के बाहर तक फैला कर रखा जाने वाला सामान अब दुकान के अंदर या गोदाम में भेजा जा रहा है. आज तक की एक रिपोर्ट के अनुसार, शाहीन बाग के फर्नीचर बाजार में अफरातफरी का माहौल बना हुआ है. अतिक्रमण अभियान चलने से पहले ही दुकानदारों ने खुद ही सड़कों पर फैला फर्नीचर हटा लिया है.

लेखक

देवेश त्रिपाठी देवेश त्रिपाठी @devesh.r.tripathi

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं. राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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