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Updated: 06 जून, 2022 11:19 PM
देवेश त्रिपाठी
देवेश त्रिपाठी
  @devesh.r.tripathi
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पैगंबर मोहम्मद पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में खाड़ी देशों कतर, ईरान और कुवैत ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है. इस पर भारतीय दूतावास की ओर से से टिप्पणी को संकीर्ण सोच वाले तत्वों का विचार बताया है. इतना ही नहीं, भाजपा ने इस मामले में प्रवक्ता नूपुर शर्मा और नवीन कुमार जिंदल पर कार्रवाई भी की. भाजपा ने जहां नूपुर शर्मा को पार्टी से निलंबित कर दिया है. वहीं, नवीन कुमार जिंदल को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है. भाजपा ने दोनों पार्टी नेताओं के बयान से किनारा करते हुए बयान जारी किया कि 'वह सभी धर्मों का सम्मान करती है और किसी भी धर्म के पूजनीय लोगों का अपमान स्वीकार नहीं करती है.' लेकिन, भाजपा की इस कार्रवाई के बाद ही सोशल मीडिया पर नूपुर शर्मा और नवीन कुमार जिंदल के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग ट्वीट कर रहे हैं. और, सोशल मीडिया पर #ShameOnBJP ट्रेंड होने लगा है. आइए जानते हैं कि ऐसे क्यों हो रहा है...

shame on bjp trending on Twitterदक्षिणपंथी विचारधारा के समर्थकों को भाजपा प्रवक्ताओं पर हुई कार्रवाई से तगड़ा झटका लगा है.

भाजपा समर्थक क्यों भड़के हुए हैं?

दक्षिणपंथी विचारों वाले लोगों का एक बड़ा धड़ा खुलकर सोशल मीडिया पर नूपुर शर्मा और नवीन कुमार जिंदल का समर्थन कर रहा है. दरअसल, बीते कई दिनों से ज्ञानवापी मामले पर मुस्लिम समुदाय के नेताओं से लेकर मौलवियों तक की ओर से शिवलिंग को फव्वारा बताया जा रहा था. एक टीवी शो के दौरान ज्ञानवापी मस्जिद मामले में कुछ मुस्लिम नेताओं द्वारा शिवलिंग को फव्वारा बताने जैसी टिप्पणियों से भड़की नूपुर शर्मा ने पैगंबर मोहम्मद के बारे में टिप्पणी की थी. और, इसी टिप्पणी पर नवीन कुमार जिंदल ने उनका समर्थन करते हुए ट्वीट किया था. दक्षिणपंथी रुझान वाले लोगों का गुस्सा इस बात से भड़का हुआ है कि शिवलिंग के बारे में तमाम आपत्तिजनक बातें कहने वाले मुस्लिम नेताओं से लेकर बुद्धिजीवियों पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई. लेकिन, इस्लामिक देशों के दबाव में आकर भाजपा नेताओं पर कार्रवाई कर दी गई.

ट्विटर यूजर आनंद रंगनाथन ने लिखा है कि नूपुर शर्मा को निलंबित करना भाजपा का एक कायराना फैसला है. पार्टी ने उन्हें भेड़ियों के सामने फेंक दिया है. नूपुर, हम तुम्हें बताना चाहते हैं कि इस देश की ताकत लोगों के हाथों में है. नाकि किसी पार्टी के हाथों में. और, हम यानी इस देश के लोग तुम्हारे साथ खड़े हैं. हमेशा, हर कदम पर, हर सांस के साथ.

आनंद रंगनाथन ने बुद्धिजीवियों के एक वर्ग पर भी निशाना साधा. उन्होंने लिखा कि तवलीन सिंह, आपने ईशनिंदा करने वाली आसिया बीबी को बचाने वाले सलमान तासीर का समर्थन किया. आपने पैगंबर और उनकी पत्नियों का अपमान करने वाले सलमान रुश्दी का समर्थन किया. आप पैगंबर का कार्टून बनाने वाले चार्ली हेबदो के पत्रकारों का भी समर्थन करती हैं. क्यों? इसके बाद आप नूपुर का समर्थन नहीं करती हैं.

सुप्रीम कोर्ट की वकील सुबुही खान ने भी इस मामले में अपना गुस्सा जाहिर किया है. सुबुही खान ने लिखा है कि मै आज भी नूपुर शर्मा का समर्थन कर रही हूं. पहला कारण उन्होंने सिर्फ हदीसों में लिखा दोहराया. दूसरा कारण किसी इंसान को ईशनिंदा के लिए दूसरे इंसान को सजा देने का कोई अधिकार नही है. ग़ुस्ताख-ए-रसूल खत्म करना है, तो पहले उन हदीसों को जलाओ, जो हमारे पैगम्बर का अपमान करती हैं.

अभिजीत मजूमदार नाम के यूजर ने ट्वीट कर लिखा है कि रियाद से लेकर रायबरेली तक मुस्लिम एकजुट हैं. जबकि, कई हिंदू खुशी मना रहे हैं कि भाजपा ने इस्लामिस्ट मौत की धमकियों और एक बर्बर विचार के आगे नूपुर शर्मा को कथित ईशनिंदा के मामले में आत्मसमर्पण कर दिया. यह आपको बताता है कि आक्रमण और नरसंहार क्यों हुए, हम औपनिवेशिक गुलामों की तरह क्यों रहते थे?

अंशुल सक्सेना नाम के यूजर ने लिखा है कि भाजपा पूर्व सपा नेता नरेश अग्रवाल को पार्टी में शामिल कर लेती है. जो संसद में हिंदू देवताओं को अल्कोहल से जोड़ते हैं. भाजपा नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल को ऐसे समय पर निलंबित कर देती है. जब उनको और उनके परिवारों को जान से मारने की धमकी मिल रही है. भाजपा जम्मू-कश्मीर हो रही टारगेट किलिंग पर फेवीकोल पी लेती है. मास्टर स्ट्रोक.

अमित पांडे नाम के एक यूजर ने लिखा है कि लखनऊ के एक प्रोफेसर ने कहा - 'काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में बलात्कार हुआ था'. और, दिल्ली के एक प्रोफेसर ने ज्ञानवापी में निकले शिवलिंग को देखकर कहा - 'लगता है कि शिवलिंग का खतना हो गया है.' इन दोनों को तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग का समर्थन मिला और अदालत ने भी उनके पक्ष में अभिव्यक्ति की आजादी का फरमान सुना दिया. लेकिन, नूपुर शर्मा को ये प्रिविलेज हासिल नहीं है. क्योंकि, वह दक्षिणपंथी हिंदू हैं.

भाजपा और संघ न केवल झुके, बल्कि बैकफुट पर

दक्षिणपंक्षी विचारधारा के लोगों के बीच इस बात की भी चर्चा है कि जो भारत अपने विदेश मंत्री एस जयशंकर के जरिये अमेरिकी धरती पर ही दुनिया का सबसे बड़ी महाशक्ति को चुनौती और रूस से तेल खरीद पर यूरोप को लेक्चर सुना सकता है. वह खाड़ी देशों के दबाव के आगे झुक गया है. आनंद रंगनाथन ने एक ट्वीट में लिखा है कि इस्लामिस्ट ने भाजपा से केवल झुकने को कहा था. लेकिन, उन्होंने घुटनों के बल चलना मान लिया. खैर, नूपूर शर्मा और नवीन कुमार जिंदल पर भाजपा से निष्कासित किए जाने की कार्रवाई उस समय हुई. जब एक दिन पहले ही संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम में कहा था कि 'इतिहास वह है, जिसे हम बदल नहीं सकते. इसे न आज के हिंदुओं ने बनाया और न ही आज के मुसलमानों ने, यह उस समय घटा. हर मस्जिद में शिवलिंग क्यों तलाशना है? यह ठीक नहीं है. हम विवाद क्यों बढ़ाना चाहते हैं? हर दिन हमें नया मामला नहीं लाना चाहिए.'

भाजपा की कार्रवाई और संघ प्रमुख के बयान से साफ है कि ऐसे किसी भी मामले पर पार्टी या संघ की ओर से अपने कार्यकर्ताओं का समर्थन नहीं किया जाएगा. भाजपा जहां पूरी तरह से बैकफुट पर नजर आ रही है. वहीं, संघ भी हिंदुत्ववादी विचारों को किनारे रखते हुए सेकुलर अपना रहा है. जबकि, ज्ञानवापी मामले पर मुस्लिम समाज की ओर से कैसी प्रतिक्रिया दी गई थी, वो सबके सामने हैं. कहना गलत नहीं होगा कि दक्षिणपंथी विचारधारा के लोगों को इस कार्रवाई से तगड़ा झटका लगा है. हालांकि, भारत सरकार की ओर से इस्लामिक सहयोग संगठन की टिप्पणी को विभाजनकारी एजेंडे का बताकर इस मामले में डैमेज कंट्रोल की कोशिश की है. लेकिन, दक्षिणपंथी विचारधारा के प्रति रुझान रखने वालों लोगों के बीच रोष कम नहीं हो रहा है. इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि इस कार्रवाई से एक ऐसा माहौल बना है. जो अब तक दक्षिणपंथी विचारों के लिए मशहूर भाजपा को राजनीतिक रूप से बड़ी चोट पहुंचाने की क्षमता रखता है.

लेखक

देवेश त्रिपाठी देवेश त्रिपाठी @devesh.r.tripathi

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं. राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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