होम -> सियासत

 |  5-मिनट में पढ़ें  |  
Updated: 08 फरवरी, 2019 11:44 AM
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
  @bilal.jafri.7
  • Total Shares

मौजूदा सरकार का तीसरा बजट पेश करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चर्चा में हैं. आगामी वित्त वर्ष के लिए चार लाख 70 हजार 684 करोड़ रुपये का यह बजट चालू वित्तीय वर्ष की तुलना में 12 फीसदी अधिक है. बजट पेश किए जाने के बाद पत्रकारों से बातचीत में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इसमें किसान, महिला और आम आदमी सहित हर वर्ग का ध्यान रखा गया है. योगी आदित्यनाथ के इस दावे के बाद जब वित्त वर्ष 2019-20 के इस बजट का अव्कोलन किया गया तो ऐसी तमाम बातें निकल कर सामने आईं जिन्होंने अपने आप ही इस बात को सिद्ध कर दिया कि उनका ये बजट अपने एजेंडे के अनुरूप है.

योगी आदित्यनाथ, बजट, उत्तर प्रदेश, हिंदुत्व  अपने बजट के चलते उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक बार फिर सुर्खियों में हैं

इस बजट में जहां आधुनिकीकरण की झलक दिख रही है तो वहीं इसमें हिन्दू वोटरों को साधने के लिए हिंदुत्व का तड़का भी प्रचुर मात्रा में लगाया गया है. आइये एक नज़ारे डालें कि कैसे योगी आदित्यनाथ के हिंदुत्व के एजेंडे को दर्शा रहा है वित्तीय वर्ष 2019-20 का ये बजट

गायों के लिए क्या है

योगी सरकार द्वारा पेश किये गए इस बजट को देखकर यही लग रहा है कि लोगों के मुकाबले गायों को ज्यादा फायदा हुआ है. योगी सरकार ने गायों की रक्षा और शेल्टर होम्स के लिये इस बजट मे 247.60 करोड रूपये की व्यवस्था की है. बताया जा रहा है कि ये शेल्टर होम्स गांवो मे बनाये जाएंगे. इसके अलावा 200 करोड रुपए शहरी क्षेत्रों में कान्हा गौशालाओ में जानवरों के रखरखाव और अन्य खर्चो के लिये दिए हैं. इन सब के अतिरिक्त शराब से मिलने वाले स्पेशल सेस में से 165 करोड रुपए अवारा और बीमार पशुओं की देखभाल के लिये खर्च किये जाएंगे.

संस्कृत पर गंभीर है सरकार

सूबे में संस्कृत भाषा का प्रचार प्रसार हो और विद्यार्थी और शोधार्थी इस भाषा से ज्यादा से ज्यादा जुड़ सकें. इसके लिए भी योगी सरकार गंभीर है. आपको बताते चलें कि मथुरा-वृंदावन के मध्य ऑडोटोरियम के निर्माण के लिए 8 करोड़ 38 लाख रुपए प्रस्तावित किये गए हैं. इसके अलावा इस बजट में सार्वजनिक रामलीला स्थलों में चारदीवारी निर्माण हेतु 5 करोड़ की व्यवस्था प्रस्तावित है साथ ही वृंदावन शोध संस्थान के सुदृढ़ीकरण के लिए एक करोड रुपए की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है.

पर्यटन के नाम पर

कई मौके आए हैं जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि वो उत्तर प्रदेश के पर्यटन को आगे ले जाना चाहते हैं. ऐसे में जब बात यूपी जैसे राज्य में पर्यटन बढ़ाने की होती है तो मुख्यमंत्री की सुई प्रदेश के प्रमुख तीर्थों के इर्द गिर्द आकर रुक जाती है. बात चूंकि वित्तीय वर्ष 2019-20 के इस बजट की चल रही है तो हमारे लिए ये बताना बेहद जरूरी है कि इस बजट में उत्तर प्रदेश ब्रिज तीर्थ में आधारभूत सुविधाओं हेतु 125 करोड़ रुपए की व्यवस्था प्रस्तावित है.

अयोध्या में प्रमुख पर्यटन स्थलों के समेकित विकास के लिए शासन की तरफ से 101 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है. इसके अलावा गढ़मुक्तेश्वर के पर्यटक स्थलों की समेकित विकास के लिए ₹27करोड़ की व्यवस्था,  पर्यटन नीति 2018 के क्रियान्वयन के लिए  70 करोड रुपए तथा प्रो पुअर टूरिस्ट के लिए 50 करोड़ की व्यवस्था की गई है.

साथ ही जहां एक तरफ वाराणसी में लहर तारा तालाब कबीर स्थल और गुरु रविदास की जन्म स्थली सीर गोवर्धनपुर का सुदृढ़ीकरण किया जाना प्रस्तावित किया गया है. तो वहीं दूसरी तरफ अयोध्या में एयरपोर्ट हेतु 200 करोड़ रुपये की व्यवस्था इस बार बजट में की गई है.

योगी सरकार के इस बजट को लेकर आलोचना का दौर शुरू हो गया है. समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने कहा कि ये बजट दलित विरोधी, महिला विरोधी, किसान विरोधी है. बजट मे दहेज हत्या, महिला सुरक्षा पर कुछ भी नहीं है. ये बजट महज चुनावी स्टंट है. इसके अलावा चौधरी ने ये भी कहा कि बजट अगर देखेंगे तो हिंदू धर्म के लिये तो बजट है लेकिन सिख, ईसाई, और मुसलमानों के लिये नहीं है. हिंदूओ की अंत्येष्टि के लिये बजट है लेकिन मुसलमानो के कब्रिस्तान के लिये बजट नहीं है.

ध्यान रहे कि पिछली बार जब योगी आदित्यनाथ ने अपना बजट पेश किया था तब सरकार ने रोजगार के नाम पर कुछ करोड़ रुपए दिए थे वहीं शमशानों के रखरखाव के लिए सरकार ने 100 करोड़ रुपए प्रस्तावित किये थे. तब सरकार के इस रुख की अखिलेश यादव ने भी तीखी आलोचना की थी.

ध्यान रहे कि उत्तर प्रदेश चुनावों के वक़्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शमशान-कब्रिस्तान का जुमला खासा चर्चा में रहा है. सूबे में भाजपा की सरकार आने और योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद बजट में शमशानों के रख रखाव के लिए 100 करोड़ रुपए प्रस्तावित करना सरकार का एजेंडा स्पष्ट कर देता है.

बजट में जो वादे किये गए वो कितने पूरे होंगे फैसला वक्त करेगा मगर इस बजट से इतना तो साफ है कि योगी उन वोटर्स को आकर्षित करने में कामयाब हो गए जिन्होंने भाजपा को केवल इसलिए वोट दिया था क्योंकि कहीं न कहीं उन्हें ये महसूस होता है कि भाजपा ही वो एकमात्र पार्टी है जो न सिर्फ हिन्दू हितों की बात करती है बल्कि उसे अमली जमा पहनाती है.

ये भी पढ़ें -

योगी आदित्यनाथ को कमलनाथ का शुक्रिया तो अदा करना ही चाहिए

योगी सरकार की गायों के लिए 'खूंटे' से बंध गए अफसर

यूपी में दलित-पिछड़ों के मिलन के बाद मुसलमान दोराहे पर

लेखक

बिलाल एम जाफ़री बिलाल एम जाफ़री @bilal.jafri.7

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

iChowk का खास कंटेंट पाने के लिए फेसबुक पर लाइक करें.

आपकी राय