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Updated: 21 सितम्बर, 2017 08:15 PM
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उत्तर प्रदेश में मोदी सरकार ने एक साथ कई राजनीतिक कूटनीतिक प्रयोग किए हैं. त्रिमूर्ति प्रयोग कर साधु सन्यासी, राजपूत और कट्टर हिन्दुत्व के मुखौटे योगी को उतर प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया. भाजपा ने निशाने पर 2019 के लोक सभा चुनाव को रख कर प्रदेश की कमान तिलक, तराजू और तलवार को इकठ्ठा दे दी और एक साथ कई लक्ष्य को साधने का प्रयास किया है.  ये भी तय कर दिया कि अगला लोक सभा के चुनाव वर्त्तमान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के ही नेतृत्व में ही लड़ा जायेगा, और बिल्कुल साफ है कि चुनाव का चेहरा और प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी ही होंगे, मतलब साफ है - प्रधानमंत्री पद के लिए 2019 तक कोई वैकेंसी नहीं है. पर जब से 19 मार्च को योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की शपथ ली है, तभी से पूरे देश की मीडिया में इस बात के कयास लगाने शुरू हो गए हैं और पत्रकारों ने योगी को भविष्य का मोदी बताना शुरू कर दिया है. इतना ही नहीं 2024 के प्रधानमंत्री पद का दावेदार भी कहना शुरू कर दिया है.

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भारतीय पत्रकार अभी से योगी आदित्यनाथ के पक्ष में लिखना भी शुरू कर चुके हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया लिखता है कि योगी आदित्यनाथ कई मामलों में मोदी जैसे ही हैं शायद यही वजह है कि लोग उन्हें पीएम का राजनैतिक वारिस कह रहे हैं. दोनों ने ही घर छोड़ा, ब्रह्मचर्य अपनाया, आरएसएस से जुड़े और अन्य कई समीकरणों में एक जैसा काम किया.

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार योगी का चयन ये भी साबित करता है कि संघ के लिए कोई भी व्यक्ति उद्देश्य से बड़ा नहीं है और ये समय भविष्य की ओर देखने का है. मोदी को 2002 के बाद 12 साल लग गए प्रधानमंत्री बनने के लिए.

जनसत्ता में प्रमोद प्रवीण ने लिखा है - आज भाजपा में सबसे ताकतवर हैं नरेंद्र मोदी, पर योगी आदित्यनाथ में है नरेंद्र मोदी की कुर्सी हिलाने का दम. आज की तारीख में देश में नरेंद्र मोदी से बड़ा, ताकतवर और दमदार शख्स कोई नहीं है लेकिन यक्ष प्रश्न यह भी है कि जब भाजपा के पूर्व प्रधानमंत्री और उप प्रधानमंत्री (अटल-आडवाणी) की जोड़ी की जगह नरेंद्र मोदी ले सकते हैं तो आगे चलकर 2019 में न सही 2024 में ही कोई नरेंद्र मोदी की जगह क्यों नहीं ले सकता.

पंजाब केसरी में प्रकाशित - यह मानना होगा कि आदित्यनाथ का चयन हर प्रकार की बुद्धिमता और विवेक के विपरीत दिखाई देता है फिर भी यदि ऐसा हुआ है तो यह नागपुर (यानी संघ मुख्यालय) के आदेशों पर फूल चढ़ाने का नतीजा है और एक दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है जो पार्टी को दरपेश कुछ विशेष ढांचागत मुद्दों को सम्बोधित होती है. इस नियुक्ति से नेतृत्व की दूसरी कतार का निर्माण शुरू हो जाए जो मोदी के बाद पार्टी की कमान संभालेगा. पार्टी के जनाधार को उत्साहित करने के लिए जिस शक्ति की बेहद जरूरत है, आदित्यनाथ का रोम-रोम उसे प्रवाहित करता हुआ दिखाई देता है. उनमें कमी है तो केवल एक बात की कि वह मोदी की तरह आज के मतदाता की आकांक्षाओं को शाब्दिक रूप नहीं पहना सकते.

पं. रामदेव पांडेय ने राष्ट्रीय खबर के लेख में कहा है कि मोदी ने घोर कट्टरवाद हिन्दुत्व विचारक को अपना उत्तराधिकारी बना दिया. 2024 के बाद मोदी रिटायर्ड होंगे तो भाजपा का चेहरा भावी प्रधानमंत्री का कौन होगा, यह साफ हो गया.

दैनिक जागरण में प्रकाशित - केतु की महादशा ने योगी को पहुंचाया सत्ता के शिखर पर - योगी आदित्यनाथ का जन्म पांच जून 1972 को सिंह लग्न व कुंभ राशि में हुआ. वर्तमान में केतु की महादशा 21 फरवरी 2017 से 21 फरवरी 2024 तक है. केतु की महादशा में ही केतु का अंतर 21 फरवरी 2017 से 18 जुलाई 2017 तक है. ऐसे में देखा जाए तो केतु की महादशा योगी को विशेष उपलब्धियां दिलाने वाला रहा. कारण कि यह लग्न सिंह में पंचमेल बृहस्पति का सबसे सुखद फल को देने वाला होता है.

पत्रकारों के एक वर्ग ने अभी से योगी आदित्यनाथ को भाजपा का सबसे सेकंड लाइन लीडरशिप का सबसे प्रमुख चेहरा बना दिया है और तमाम लोग जिनके पास राजनितिक प्रसाशन का सर्वाधिक अनुभव है, जैसे, शिवराज सिंह चौहान, जिनके पास 26 साल का राजनितिक अनुभव हैं और जो 3 बार से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं, छत्तीसगढ़ के 3 बार के मुख्यमंत्री रमन सिंह, जिनका राजनितिक अनुभव भी 26 साल का है, वसुन्धरा राजे सिंधिया जिन्हें 30 साल से ज्यादा का राजनितिक अनुभव है साथ ही 2 बार राजस्थान की मुख्यमंत्री रही हैं,  गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर परिकर जिन्हें केंद्र एवं राज्य में प्रसाशन का 26 साल का राजनितिक अनुभव है, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अलावा धर्मेंद्र प्रधान जो केंद्र में मंत्री हैं, स्मृति ईरानी को भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में हैं, फिर खुद भाजपा अध्यक्ष अमित भाई शाह जिन्हें गुजरात सरकार में प्रसाशन के अलावा उत्तर प्रदेश में में 2014 के लोक सभा चुनाव से लेकर 2017 के विधान सभा में भाजपा के अप्रत्याशित जीत का श्रेय जाता है  को दरकिनार कर दिया है.  

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हाँ, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि योगी आदित्यनाथ एक बड़े फायर ब्रांड नेता की छवि रखते हैं. वे 1998 से लगातार भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और प्रदेश के मुख्यमंत्री बनाये गए हैं कि दावेदारी से इंकार नहीं किया जा सकता है. फिर उनके पक्ष में ये भी तर्क दिया जा रहा है कि वो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं. दूसरे अभी आरएसएस की नज़रों में योगी का चेहरा हिंदूवादी नेता के रूप में तेजी से उभर रहा है. जो प्रधानमंत्री मोदी का एक काबिल विकल्प हो सकता है. इस तथ्य से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि अब तक भारत के जितने भी प्रधानमंत्री इस प्रदेश ने दिए है, उतने किसी दूसरे राज्य ने नहीं दिया है.

फिर भी अभी से कयास लगाना कि योगी ही भाजपा के भविष्य का चेहरा होंगे. इस तर्क में बहुत संशय भी है. जैसे उत्तर प्रदेश के मुख्यामंत्री के रूप में लोगों और पार्टी के उम्मीद पर खरा उतरना. 2019 के लोक सभा चुनाव में प्रदेश में आशातीत सफलता दिलवाना है.

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लेखक

जगत सिंह जगत सिंह @jagat.singh.9210

लेखक आज तक में पत्रकार हैं.

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