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सियासत

 |  4-मिनट में पढ़ें  |   30-01-2015
परवेज़ सागर
परवेज़ सागर
  @parvezsagarfc
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बीजेपी ने एक बार फिर मुस्लिम उलेमाओं का सहारा लिया है. दिल्ली विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी ने मुस्लिम बहुल इलाकों में गुजरात से आए उलेमाओं को वोट मांगने के लिए भेजा है. बीजेपी पहले भी यह प्रयोग कर चुकी है. लेकिन अहम सवाल ये है कि क्या लोकसभा चुनाव की तरह दिल्ली के मुस्लिम इस बार भी भाजपा को वोट देंगे?

दिल्ली की सियासी जंग तेज

दिल्ली में चुनाव की तारीख करीब आते-आते सियासी जंग तेज हो गई है. मुकाबला सीधे तौर पर बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच है. दिल्ली की 70 में से 11 सीटें तो ऐसी हैं जहां मुस्लिम मतदाता ही उम्मीदवार की किस्मत का फैसला करते है. इस बात से बखूबी वाकिफ बीजेपी, AAP और कांग्रेस पार्टी अपने-अपने तरीके से जोरदार प्रचार कर रही हैं.

बीजेपी का उलेमा फंडा

लोकसभा चुनाव 2014 में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश और बिहार समेत मुस्लिम आबादी वाले प्रदेशों में उलेमाओं और मुफ्तियों की टीम प्रचार के लिए भेजी थी. टीम अन्ना का हिस्सा रहे मुफ्ती शमून कासमी को पार्टी में शामिल कर यूपी भेजा गया था. मुफ्ती शमून कासमी ऑल इंडिया मुफ्ती संगठन के अहम पदाधिकारी भी हैं. इसी तरह कभी पीस पार्टी के महासचिव रहे कृषि व्यापारी एमजे खान को भी इसी रणनीति के तहत उलेमाओं की टीम के साथ यूपी समेत कई राज्यों में भेजा गया था. पार्टी की इस कसरत का फायदा ये हुआ कि भाजपा को लोकसभा चुनाव में कुल मिलाकर मुस्लिमों का 10 फीसदी वोट मिला. गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 20 फीसदी, उत्तराखंड, बिहार, पंजाब और हरियाणा में 13 फीसदी, राजस्थान में 15 फीसदी और उत्तर प्रदेश में लगभग 6 फीसदी मुस्लिम वोट मिले थे. जबकि दिल्ली में भी करीब 7 फीसदी वोट हासिल करने में बीजेपी कामयाब हुई थी. भगवा खेमे के लिए ये बड़ी बात थी. भाजपा इस प्रयोग को दोहराने जा रही है.

दिल्ली में बीजेपी की कवायद

दिल्ली में बीजेपी मुस्लिम वोटरों में पैठ बनाने की भरपूर कोशिश में जुटी है. गुजरात से बुलाए गए उलेमाओं और मुफ्तियों का जत्था घूम-घूम कर मुसलमानों से बीजेपी को वोट देने की अपील कर रहा है. आरएसएस से जुड़ा मुस्लिम राष्ट्रीय मंच पहले से ही दिल्ली में प्रचार कर रहा है. आरएसएस के अल्पसंख्यक मोर्चे का कामकाज देखने वाले नेता भी मुस्लिम वोटों में सेंध लगाने के लिए हर फार्मूले पर काम कर रहे हैं.

मगर....

मोदी सरकार आ जाने के बाद से लगातार अल्पसंख्यकों को लेकर की गई बयानबाजी, दिल्ली और बिहार के दंगे और धर्मांतरण जैसे मुद्दे सवाल पैदा करते हैं. विपक्षी दल भी इन मुद्दों को लेकर मुस्लिमों के बीच हो हल्ला कर रहे हैं. अब देखने वाली बात यह होगी कि अल्पसंख्यक वोटर अपना विश्वास किसके ऊपर जताएंगे. 7 फरवरी नज़दीक ही है.

लेखक

परवेज़ सागर परवेज़ सागर @parvezsagarfc

लेखक इंडिया टुडे ग्रुप में असिस्टेंट एडिटर हैं.

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