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Updated: 29 अगस्त, 2018 02:35 PM
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क्रिकेट के मैदान से सियासी मैदान में आए इमरान खान ने अपने पहले विदेशी दौरे के लिए सऊदी अरब को चुना है. सऊदी अरब के शाही महल और पाकिस्तान के हुक्मरानों का पुराना रिश्ता रहा है. जब भी देश आपात स्थिति में होता है देश के प्रधानमंत्री से लेकर सेनाध्यक्षों तक की आपात लैंडिंग रियाद के अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर होती है. इमरान खान ने राष्ट्र के नाम अपने सम्बोधन में कहा था, सऊदी हमारा दोस्त है. वो हर मुश्किल घड़ी में पाकिस्तान के साथ खड़ा रहा है. पाकिस्तान की गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए सऊदी अरब स्थित इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक ने हाल ही में 4 अरब डॉलर की राशि मुहैया कराई थी. वहाबी इस्लाम और तेल से प्राप्त अकूत दौलत के कारण सऊदी अरब आज भी इस्लामिक वर्ल्ड का खलीफा बना हुआ है. पाकिस्‍तान के कट्टरपंथियों को इससे कोई ऐतराज भी नहीं है. और जब उन्‍हें ऐतराज नहीं है, तो उन्‍हीं की मदद लेकर पाकिस्‍तान की सत्‍ता तक पहुंचे इमरान को क्‍या ऐतराज होगा.

इमरान खान, सऊदी अरब, विदेश दौरा, ईरान   इमरान खान अपने पहले विदेशी दौरे पर सऊदी अरब जा रहे हैं.

पहला फैसला, स्‍कूलों में कुरान अनिवार्य?

सऊदी अरब से प्राप्त सहायता के बदले में इमरान खान ने भी रिटर्न गिफ्ट दिया है. सऊदी के वहाबी इस्लाम की बुनियाद को मजबूत करने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने देश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में कक्षा बारहवीं तक कुरान पढ़ना-पढ़ाना अनिवार्य बना दिया है. पाकिस्तान में राजनीतिक और सामाजिक रूप से भी सबसे ज्यादा प्रभाव सऊदी अरब का ही रहा है. सऊदी में पाकिस्तान के क़रीब 27 लाख लोग काम करते हैं. ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान सऊदी के क़रीब रहा है और इसे अमरीका और ब्रिटेन ने भी बढ़ावा दिया है. पाकिस्तान को इस बात का भी इल्म है कि सबसे ज्यादा आर्थिक सहायता उसे सऊदी अरब से ही मिलती है.

सऊदी-पाकिस्तान गुप्त डील

पाकिस्तान को परमाणु हथियार बनाने में सऊदी अरब ने ही आर्थिक मदद की थी. ऐसा माना जाता है कि पाकिस्तान और सऊदी अरब ने एक गुप्त डील की है जिसके तहत किसी भी आपात स्थिति में पाकिस्तान सऊदी अरब को परमाणु बम मुहैया करवाएगा. आपात स्थिति का आशय यहां ईरान से है जिसका सऊदी अरब के साथ हमेशा छत्‍तीस का आंकड़ा रहता है क्योंकि हाल के वर्षों में ईरान ने भी अपने परमाणु प्रोजेक्ट को बहुत तेजी के साथ आगे बढ़ाया है. सऊदी अरब के पास खुद का परमाणु प्रोजेक्ट नहीं है इसलिए उसने पाकिस्तान के साथ गुप्त डील की है. पाकिस्तान के रिटायर्ड आर्मी चीफ राहिल शरीफ 'मुस्लिम नेटो' संगठन के मुखिया हैं. यह सऊदी नेतृत्व वाला मुस्लिम देशों का सैन्‍य संगठन है.

यमन को लेकर मतभेद

हाल के दिनों में पाकिस्तान और सऊदी के रिश्ते सवालों के घेरे में रहे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि सऊदी अभी ईरान और क़तर को अपना प्रमुख शत्रु मान रहा है, जबकि इन दोनों देशों के साथ पाकिस्तान ने अपना आर्थिक सहयोग बढ़ाया है. वहीँ यमन में भी पाकिस्तान सऊदी गठबंधन में शामिल नहीं है. आपको बता दें कि पिछले 2 वर्षों से सऊदी अरब के नेतृत्व में गठबंधन सेनाएं यमन में हवाई हमला कर रहीं हैं. उनका कहना है कि वे हूती विद्रोहियों को निशाना बना रहें हैं जिनका उद्देश्य सऊदी अरब को अस्थिर करना है. सऊदी का आरोप है कि इन्हें ईरान और सीरिया से सहायता प्राप्त हो रहा है.

इमरान खान, सऊदी अरब, विदेश दौरा, ईरान   सऊदी गठबंधन के हमलों में हजारों आम नागरिक मारे जा चुके हैं.

सयुंक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी गठबंधन के हमलों में अभी तक 50 हजार से ज्यादा आम नागरिक मारे जा चुके हैं. पाकिस्तान को डर है कि अगर वो गठबंधन सेनाओं के हमलों में शामिल होता है तो ईरान से उसके सम्बन्ध बिगड़ सकते हैं. इमरान खान ने राष्ट्र के नाम अपने सम्बोधन में ईरान से अपने संबंधों को सुधारने की बात कही थी. सऊदी अरब और ईरान से एक साथ बराबर संबंध रखना इमरान खान के लिए बहुत बड़ी चुनौती होगी, जिसका इल्म शायद उनको भी होगा.

सऊदी अरब स्थित इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक ने हाल ही में पाकिस्तान को आर्थिक जीवनदान दिया है. इसमें कोई शक नहीं है कि जब इमरान खान सऊदी अरब की धरती पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में उतरेंगे तो उन्हें भी सऊदी हुकूमत को खुश करने के लिए कुछ नए एलान करने होंगे और इसका परिणाम हमें यमन की धरती पर पाकिस्तानी सेना के हवाई हमलों के रूप में दिख सकता है.

कंटेंट- विकास कुमार (इंटर्न- आईचौक)

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