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Updated: 14 अप्रिल, 2019 02:40 PM
श्रुति दीक्षित
श्रुति दीक्षित
  @shruti.dixit.31
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लोकतंत्र का त्योहार यानी लोकसभा चुनाव बहुत महत्वपूर्ण मोड़ पर आ चुके हैं. 23 मई 2019 को ये पता चल जाएगा कि आखिर कौन अगले 5 साल भारत की कमान संभालने वाला है! वैसे तो चुनावी पंडित नरेंद्र मोदी की जीत सुनिश्चित कर चुके हैं, लेकिन पिछले कुछ विधानसभा चुनावों के परिणाम देखकर लोकसभा में मोदी की जीत न हो इसकी कुछ प्रतिशत गुंजाइश तो है. कर्नाटक चुनाव में अमित शाह भाजपा को बहुमत नहीं दिला पाए, गुजरात में भाजपा की हारने की गुंजाइश बन गई थी, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में तो पार्टी हार ही गई. 2014 से अनुमान लगाएं तो उत्तर पूर्वी राज्यों में भाजपा के वोट बढ़े हैं, लेकिन बाकी जगह कम हुए हैं!

भाजपा का ब्रह्मास्त्र ब्रैंड मोदी और राम मंदिर से बदलकर अब राष्ट्र भक्ति हो गया है. इस मौके पर अगर मोदी हार गए तो?

- जी नहीं, वो राजनीति से सन्यास तो नहीं लेंगे 2024 की तैयारी अवश्य करेंगे.

- दूसरा ये मुमकिन है कि अकेले भाजपा को नहीं तो NDA को तो सरकार बनाने लायक वोट मिल जाएं.

- अगर वो भी नहीं हुआ तो भारत में गठबंधन की सरकार बनेगी जो डेमोक्रेसी में आम बात है.

- नई नीतियां डिजाइन की जाएंगी. और हम उम्मीद करते हैं कि चाहें जो भी सरकार बने वो भारत के हित के लिए काम करेगी.

ये तो आम धारणा है, लेकिन इस सवाल के जवाब में लोग क्या सोचते हैं? 'लेकिन अगर वो हार गए' तो सवाल लोगों से भी पूछा गया. Quora वेबसाइट पर What will happen if Narendra Modi loses the 2019 election? सवाल के जवाब में कई लोगों ने इसका उत्तर निराशाजनक दिया.

1. पाकिस्तान बहुत खुश होगा-

इस सवाल के जवाब में Quora यूजर सान्या बंसल लिखती हैं कि अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान बहुत खुश होगा और किसी भी आतंकी हमले का जवाब सिर्फ निंदा के रूप में ही दिया जाएगा. कोई आर्मी की ख्वाहिश पूरी नहीं करेगा. आसान शब्दों में भारत की तरक्की बंद हो जाएगी. राहुल गांधी के पीएम बनने से ये यूजर इतनी आहत हो सकती हैं कि ये भारत छोड़कर चली जाएं. 2008 के आतंकी हमले के समय भारत द्वारा कोई ठोस कदम न उठाने के लिए ये कांग्रेस को ही दोषी मानती हैं. हम ऐसी स्थिति में नहीं रहेंगे कि राहुल गांधी को अन्य देशों के पीएम से बात करते झेल पाएं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनामी झेल पाएं. जो इंसान संसद में प्रधानमंत्री की तरफ देखकर आंख मार सकता है उससे कोई क्या उम्मीद रख सकता है. नरेंद्र मोदी को अन्य देशों में भी प्यार मिल रहा है, लेकिन ये बेहद निराशाजनक है कि उन्हें हमारे अपने देश के लोग गलत समझ रहे हैं. अगर मोदी को चुना नहीं गया तो गलत होगा और हम सिर्फ पछताएंगे.

नरेंद्र मोदी, लोकसभा चुनाव 2019, भाजपा, हारये उत्तर पूरी तरह से आतंकवाद से जुड़ा हुआ था.

2. भारत में घोटालों की वापसी होगी- 

एक और यूजर वैभव शर्मा के मुताबिक अगर मोदी नहीं जीतते हैं तो स्कैम वापस आ जाएंगे. ध्रुवीकरण की राजनीति होगी और हर कोई अपने लिए पोर्टफोलिया चुनने में लग जाएगा. स्थानीय नेता भी बड़े मंत्री पद चाहेंगे. हिंदुओं की कोई आवाज़ नहीं होगी क्योंकि कांग्रेस पार्टी सेक्युलरिज्म ने नाम पर अल्पसंख्यकों की ज्यादा चर्चा करती है और उनपर ध्यान देती है. देश में असहिष्णुता के लिए भाजपा जिम्मेदार नहीं है. कांग्रेस अल्पसंख्यकों को लेकर ज्यादा स्कीम लाने की कोशिश करती है. इसलिए हिंदू आवाज़ें दबाई जाएंगी. मेरी उम्मीद है कि भारत में कोई आतंकवादी हमला न हो, लेकिन अगर होगा तो रागा भी इसी तरह की एयरस्ट्राइक करने की कोशिश करेंगे. राहुल गांधी कांग्रेस के हिसाब से मैच्योर हैं, लेकिन उन्हें किसी नेता की जरूरत होगी.

सचिन पायलट, तेजस्वी यादव, ओमार अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे लोग मंत्री पद पर होंगे. हम सुषमा स्वराज के अलावा कोई और विदेश मंत्री की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं, लेकिन ऐसा होगा. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बदनामी हो सकती है. तीन तलाक बिल खत्म हो सकता है. मुस्लिम वोटों के लिए राजीव गांधी पहले ऐसा कर चुके हैं. 

3. लिबरल खुश हो जाएंगे- 

Quora यूजर दिव्यांश मूंद्रा लिखते हैं कि ट्विटर पर लिबरल खुशी जाहिर करेंगे. जरा सोचिए सगरिका घोष और बरखा दत्त के चेहरे पर कैसी मुस्कान आएगी. राहुल गांधी अर्थव्यवस्था, आतंकवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भाषण देंगे. राहुल को NYAY स्कीम के लिए 3.6 लाख करोड़ चाहिए और भारत की अर्थव्यवस्था एक बार फिर चरमरा जाएगी. चुनाव रिजल्ट को 1 महीना रह गया है और अभी तक किसी को ये साफ नहीं है कि कांग्रेस करेगी क्या? ये समस्या है कि कांग्रेस के पास सिर्फ और सिर्फ फ्री का सामान और पैसा बांटने के अलावा कोई खास स्कीम नहीं है. अखबारों में स्कैम की खबरें आम हो जाएंगी. 

4. रॉबर्ट वाड्रा मिनिस्टर बन जाएंगे- 

Quora यूजर शिवम पटेल ने एक अन्य कल्पना की है. अगर मोदी 2019 में हार जाते हैं तो राहुल गांधी पीएम बनेंगे. और हां स्कैम दोबारा भारत में होने लगेंगे. मनमोहन सिंह दूसरे सबसे खराब प्रधानमंत्री नहीं रह जाएंगे. उन्हें रिप्लेस करने राहुल गांधी आ जाएंगे. रॉबर्ट वाड्रा को DLF जमीन के केस में छुट्टी मिल जाएगी और हो सकता है कि उन्हें एक मंत्रालय भी दे दिया जाए. जस्टिस काटजू का वो स्टेटमेंट जो कहता है कि 90% भारतीय बेवकूफ हैं वो सच हो जाएगा. पी चिदंबरम के बेटे कृति चिदंबरम को INX मीडिया घोटाले से बाइज्जत बरी कर दिया जाएगा. अखबारों में घोटालों से जुड़ी हेडलाइन आम हो जाएंगे. सर्जिकल स्ट्राइक सिर्फ इतिहास बनकर रह जाएगी. 

रॉबर्ट वाड्रा को भूमि अधिगृहण मंत्रालय से नवाज़ा जाएगा.रॉबर्ट वाड्रा को भूमि अधिगृहण मंत्रालय से नवाज़ा जाएगा.

आतंकवादी हमलों के बाद हमें एक डरपोंक पीएम का अहसास होगा. अगर ऐसा हुआ तो भारत दूसरा वेनेजुएला बन सकता है.

5. EVM टैम्परिंग पर कोई सवाल नहीं होगा- 

यूजर गौरव कुमार कहते हैं कि अगर मोदी हार जाते हैं तो भारत में EVM टैम्परिंग बंद हो जाएगी (वाक्य में छुपे व्यंग्य को समझिए.) और ईवीएम एक बार फिर से सुरक्षित हो जाएंगे. साथ ही, 'मंदिर वहीं बनेगा' 2024 का सपना हो जाएगा. एक कैम्ब्रिज ग्रैजुएट शायद 19 विपक्षी पार्टियों के मंत्रियों को हेड करेगा (क्योंकि गठबंधन की सरकार होगी.). राफेल भारत का दूसरा सबसे बड़ा स्कैम होगा. हमारा प्यारा पड़ोसी (पाकिस्तान) बहुत खुश होगा. द वायर, हिंदू आदि अखबारों की हेडलाइन होगी 'Is this the defeat of the rising vocal hindutva?' (क्या ये मुखर हिंदुत्व की हार है).

राफेल आगे चलकर एक बड़े स्कैम का रूप ले लेगा. हो सकता है इतनी होनहार संतान पैदा करने के लिए सोनिया गांधी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए.

किसान आत्महत्या बंद हो जाएगी क्योंकि राहुल गांधी 'इधर से आलू डालो, उधर से सोना निकलेगा.' वाली स्कीम लाएंगे. फ्री स्पीच होगी, सिर्फ तब तक जब तक आप सत्ताधीन पार्टी के खिलाफ कोई कार्टून न बनाएं (असीम त्रिवेदी याद हैं?). स्विडिश कंपनी बोफोर्स को शायद एक बार फिर हथियार भारत में बेचने का मौका मिल जाए.

अधिकतर लोग राहुल गांधी के पीएम बनने पर एक जैसी चिंता जता रहे थे-

1. पाकिस्तान खुश होगा क्योंकि उनके हिसाब से मोदी ही पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब दे सकते हैं.

2. गठबंधन की सरकार बनेगी इसलिए नीतियों के पास होने में वक्त लगेगा.

3. स्कैम दोबारा भारत की अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन जाएंगे.

4. अल्पसंख्यकों की ज्यादा चलेगी.

5. हिंदुत्व को खतरा होगा.

6. EVM टैम्परिंग के आरोप लगना बंद हो जाएंगे.

7. आतंकवादी हमलों में भारत कोई जवाब नहीं दे पाएगा.

अधिकतर जवाब पाकिस्तान, आतंकवादी हमले और अल्पसंख्यकों से जुड़े हुए हैं ऐसे में ये गौर करने वाली बात है कि भाजपा का ब्रह्मास्त्र मुद्दा यानी राष्ट्रीय सुरक्षा वाकई लोगों के मन में घर कर गया है. चुनावों से ठीक पहले हुआ पुलवामा आतंकी हमला लोगों में राष्ट्रप्रेम तो जगा गया है साथ ही भारतीय सेना द्वारा की गई एयर स्ट्राइक ने मोदी सरकार को पाकिस्तान को जवाब देने वाली सरकार जरूर मान लिया है.

इन सवालों के जवाब भले ही राजनीतिक पंडित अलग दें, लेकिन एक सोशल प्लेटफॉर्म में ऐसे जवाब मिलना यकीनन ये साबित करता है कि कहीं न कहीं लोगों की मानसिकता एक ही जैसी हो रही है. पर इन उत्तरों से एक बात और पता चलती है और वो ये कि लोगों के लिए भाजपा जरूरी हो न हो, लेकिन प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी होना चाहिए. इस सवाल का ही विश्लेषण करें तो पाएंगे कि सवाल मोदी पर है न कि भाजपा पर. लोग भाजपा की हार को भी मोदी की हार ही मान रहे हैं. ऐसे में ये भी सोचने वाली बात है कि अगर भाजपा के पास मोदी के अलावा कोई और चेहरा होता तो क्या वो पार्टी जीत पाती?

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लेखक

श्रुति दीक्षित श्रुति दीक्षित @shruti.dixit.31

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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