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Updated: 08 अप्रिल, 2019 08:01 PM
श्रुति दीक्षित
श्रुति दीक्षित
  @shruti.dixit.31
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लोकसभा चुनाव 2019 के लिए भाजपा ने अपना शपथ पत्र पेश कर दिया है. चुनावी मेनिफेस्टो वैसे तो आम तौर पर पार्टियों के द्वारा भविष्य में किए जाने वाले काम का लेखा-जोखा होता है, लेकिन ये एक छोटी सी बुकलेट ये भी दिखाती है कि पार्टियों ने क्या वादा किया था और असल में क्या किया है. भाजपा के चुनावी शपथ पत्र में इस बार जो बात सबसे ज्यादा खटक रही है वो है नौकरियों और रोजगार के अवसर की कमी.

यकीन मानिए भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में नौकरियों को आधा ही कर दिया है. 2014 के मेनिफेस्टो में जहां Employment, Employable, Employability जैसे शब्द कुल 27 बार इस्तेमाल किए गए हैं, वहीं 2019 के मेनिफेस्टो में केवल 16 बार. इतना ही नहीं. JOBS शब्द पिछले मेनिफेस्टो में जहां 13 बार इस्तेमाल किया गया था वहीं 2019 में सिर्फ 2 बार. अभी इसे क्या कहा जाए ये तो आप ही तय कीजिए. क्या भाजपा के पास चुनाव और बेरोजगारी से जुड़े वादे खत्म हो गए हैं या फिर भाजपा के हिसाब से अब नौकरियों की इतनी जरूरत नहीं रही ये नहीं पता. हद तो ये है कि भाजपा के बड़े नेताओं ने संकल्प पत्र के बारे में बताते हुए नौकरियों का एक बार भी नाम नहीं लिया.

मेनिफेस्टो आते ही विपक्षी वार..

भाजपा का मेनिफेस्टो आते ही कांग्रेस के प्रवक्ता राणदीप सुरजेवाला ने भाजपा पर हमला बोल दिया और इस बात पर जोर दिया कि इस मेनिफेस्टो में नौकरियों का कोई जिक्र ही नहीं है. सुरजेवाला ने भाजपा के मेनिफेस्टो को एक 'झूठ' कहा है. सुरजेवाला ने आगे कहा कि भाजपा ने एक देश, एक टैक्स का नारा दिया था, लेकिन उसे भी 900 बार (व्यंगात्मक संख्या) बदला जा चुका है. यहां तक कि सुरजेवाला ने कहा कि देश को याद है 15 लाख प्रति व्यक्ति और 2 करोड़ नौकरियों और किसान की आय दुगनी करने का वादा. देश की जनता आपको माफ नहीं करेगी.

बेरोजगारी के मुद्दे को कांग्रेस ने उठाया तो है, अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये भी कहा कि मोदी सरकार ने देश की जनता के विश्वास में विष घोल दिया है.

क्या वाकई 2 करोड़ नौकरियों का वादा किया था मोदी ने?

पिछले काफी समय से सोशल मीडिया और कांग्रेस के मंत्रियों की रैली में 2 करोड़ नौकरियों की बात होती रहती है. दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अविष्वास प्रस्ताव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी पर ये आरोप लगाया कि पीएम नरेंद्र मोदी ने हर साल युवाओं को 2 करोड़ युवाओं को नौकरी देने का वादा किया था. पर क्या वाकई ऐसा कोई वादा किया भी गया था?

ये सिर्फ राहुल गांधी ने संसद में कहा था. दरअसल, 2013 में आगरा में की गई एक रैली के दौरान नरेंद्र मोदी ने 1 करोड़ नौकरियों का जिक्र जरूर किया था, लेकिन उसमें ये सवाल पूछा था कि यूपीए सरकार ने जो 1 करोड़ नौकरियों का वादा किया था उसका क्या हुआ. न तो पिछले मेनिफेस्टो में और न ही किसी रैली में ऐसा कोई भी वादा मोदी सरकार की तरफ से हुआ था.

खैर, आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति को छोड़ अगर सिर्फ वोटरों की जरूरतों को देखें तो मेनिफेस्टो का अलग ही रूप दिखेगा. अलग-अलग वोटर ग्रुप के हिसाब से लोगों की जरूरतें भी अलग हो सकती हैं, लेकिन युवा वर्कफोर्स का हिस्सा होते हुए मुझे इस बात से मतलब है कि रोजगार के कितने अवसर दिए जा रहे हैं. रोजगार के अवसर भाजपा और कांग्रेस दोनों के मेनिफेस्टो में देखने लायक हैं.

भाजपा और 2019 का रोजगार-

भाजपा के मेनिफेस्टो में 2014 के वादों को दोहराया ही गया है. इस संकल्प पत्र में भी भाजपा ने 2014 चुनावों के मेनिफेस्टो की तरह ही किसी खास प्रोजेक्ट की बात नहीं की है और ये लिखा है कि भारत को ज्ञान-आधारित, कौशल और प्रौद्योगिक समाज बनाया जाएगा.

देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े 22 बड़े सेक्टरों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए ज्यादा से ज्यादा मदद देने का वादा किया गया है. नॉर्थ ईस्ट में रोजगार के अवसर मुहैया कराने के लिए नई स्कीम लेकर आएंगे. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत अभी 17 करोड़ से ज्यादा उद्यमियों को कर्ज मुहैया कराया जा चुका है. इसके लाभार्थियों की संख्या 30 करोड़ तक से जाने के लिए कदम उठाएंगे. 20 हजार करोड़ के सीड स्टार्टअप फंड के जरिए स्टार्टअप को समर्थन देंगे.

भाजपा, संकल्प पत्र, रोजगार, लोकसभा चुनाव 2019भाजपा के घोषणा पत्र में नौकरियों का जिक्र ही आधा हो गया है.

साथ ही भाजपा के घोषणा पत्र में सरकारी और गैर सरकारी निवेश के अवसर बढ़ाने की बात भी की गई है. साथ ही महिलाओं को अगले 5 सालों में आर्थिक सशक्तिकरण देने का वादा भी किया गया है. खास तौर पर ग्रामीण और छोटे शहरों में. भाजपा के घोषणा पत्र में किसान महिलाओं का भी जिक्र है. साथ ही ये भी कहा है कि गरीबों को सरकारी नौकरी के अवसर प्रदान किए जाएंगे.

2014 के घोषणा पत्र में भी भाजपा ने कुछ इसी तरह के वादे किए थे. गरीबों का जिक्र था उस घोषणा पत्र में साथ ही ये भी लिखा गया था कि यूपीए ने 10 सालों तक जो नौकरियां नहीं दीं वो नौकरियां भाजपा सरकार देगी और गरीबों, महिलाओं को नए रोजगार के अवसर प्रदान करेगी. रिटेल में एफडीआई से ज्यादा नौकरियां होंगी. स्मार्ट सिटी के बनने से नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे. यानी 2014 की तरह ही 2019 में भी वादे ही हुए हैं.

कांग्रेस और 2019 का रोजगार-

कांग्रेस का 2019 का घोषणा पत्र कुछ आंकड़ों पर बात करता है. कांग्रेस की मानें तो पब्लिक सेक्टर में ही 34 लाख नौकरियों दी जाएंगी. इसके साथ 4 लाख भर्तियां केंद्र सरकार द्वारा की जाएंगी. ये काम 2020 तक हो जाएगा. राज्य सरकारों को भी 20 लाख भर्तियां करने को कहा जाएगा. कांग्रेस ने MGNREGA 3.0 लॉन्च करने का वादा किया है और कहा है कि 100 दिनों की जगह 150 दिनों तक रोजगार गारंटी होगी.

कांग्रेस ने नए उद्योग, सेवा और रोजगार मंत्रालय की बात की है और कहा है कि इससे नौकरियों को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही कांग्रेस के घोषणापत्र में वादा किया गया है कि सरकारी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों के लिए जो आवेदन फीस ली जाती है वो भी बंद कर दी जाएगी.

इसके साथ ही 10 लाख युवाओं को ग्राम पंचायत में रोजगार दिलाने का पार्टी के घोषणापत्र में वादा किया गया है. पार्टी ने वादा किया है कि तीन साल के लिए हिंदुस्तान के युवाओं को बिजनस खोलने के लिए किसी की इजाजत नहीं लेनी पड़ेगी.

जहां तक 2014 के कांग्रेस मेनिफेस्टो की बात करें तो 'आपकी आवाज हमारा संकल्प' शीर्षक से जारी 2014 के घोषणा पत्र में देश के सामाजिक आर्थिक एवं राजनीतिक बदलाव के लिए पंद्रह सूत्री कार्यसूची पेश की गयी थी. घोषणा पत्र में जिन न्यूनतम सामाजिक आर्थिक अधिकारों को लागू करने का वादा किया गया था उनमें सामाजिक सुरक्षा का अधिकार, उद्यमशीलता का अधिकार, प्रतिष्ठा एवं मानवीय काम करने की स्थिति का अधिकार शामिल था. 2014 के कांग्रेस घोषणा पत्र में लिखा था कि 'सत्ता में लौटने के 100 दिन के भीतर पार्टी रोजगार का एक विस्तृत एजेंडा पेश करेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हमारे युवाओं के लिए 10 करोड़ नए रोजगार और उद्यमशीलता के मौके पैदा किए जाएं'. साथ ही कांग्रेस ने 2020 तक 60 लाख नई नौकरियों का वादा भी किया था.

यानी पिछली बार भी कांग्रेस ने कुछ आंकड़ों के आधार पर बात की थी.

चाहें कांग्रेस का घोषणा पत्र हो या भाजपा का, लेकिन रोजगार के अवसर को लेकर ठीक-ठीक बात नहीं की गई है और इस वक्त जब भारत में नौकरियों की कमी है और National Sample Survey Office’s (NSSO), Periodic Labour Force Survey (PLFS) 2017-18 रिपोर्ट ये कह चुकी है कि 2011-12 की तुलना में बेरोजगारों की संख्या 2017-18 में दो करोड़ बढ़ गई है तब रोजगार को लेकर किसी भी पार्टी का सीरियस न होना थोड़ा अखर रहा है.

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श्रुति दीक्षित श्रुति दीक्षित @shruti.dixit.31

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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