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Updated: 21 नवम्बर, 2018 08:11 PM
मृगांक शेखर
मृगांक शेखर
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राजस्थान विधानसभा के चुनाव में भी मुस्लिम कार्ड बेहद अहम हो गया है. मध्य प्रदेश के बाद राजस्थान में भी सिर्फ एक ही मुस्लिम उम्मीदवार को बीजेपी से टिकट मिला है. मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान ने बुजुर्ग विधायक आरिफ अकील के खिलाफ फातिमा रसूल को पहले से ही मैदान में उतार रखा है. राजस्थान के एक मात्र मुस्लिम बीजेपी उम्मीदवार यूनुस खान बने हैं जिन्हें कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के दावेदार सचिन पायलट के खिलाफ खड़ा किया गया है. यूनुस खान को राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का बेहद करीबी और उनकी मौजूदा सरकार में सबसे कद्दावर मंत्रियों में शुमार किया जाता रहा है.

बीजेपी में हबीबुर्रहमान का टिकट कटने के बाद यूनुस खान को लेकर भी वैसी ही अटकलें लगायी जा रही थीं. हालांकि, यूनुस खान की डीडवाना सीट से किसी और को टिकट दिया भी नहीं गया था. फिर बीजेपी की नयी सूची में टोंक से यूनुस खान का नाम हर किसी के लिए चौंकाने वाला रहा.

माना जा रहा है कि वसुंधरा के खिलाफ कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में पुराने बीजेपी दिग्गज जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह को टिकट दिये जाने के बाद बीजेपी ने अपनी रणनीति बदली है. हालांकि, नागौर में हबीबुर्रहमान ने बीजेपी की लड़ाई फंसा दी है. बीजेपी के टिकट रिजेक्ट करने के बाद ही वो कांग्रेस में गये और उसी सीट से चुनाव मैदान में कमर कस कर उतर चुके हैं.

पायलट और मानवेंद्र का एहसान मानें यूनुस खान

जब सचिन पायलट नामांकन भरने के बाद बाहर निकल रहे थे, उसी वक्त यूनुस भी नॉमिनेशन फाइल करने पहुंचे. सामना होने पर दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कराये और फिर अभिवादन किया, फिर अपनी अपनी मंजिल की ओर बढ़ गये. मौके पर मौजूद लोगों के लिए ये काफी दिलचस्प नजारा था. मिलने पर अभिवादन तो एक सलीका है, लेकिन यूनुस खान को तो सचिन पायलट को शुक्रिया कहना चाहिये. इतना ही नहीं यूनुस खान को सचिन के साथ साथ मानवेंद्र सिंह का भी एहसान मानना चाहिये - क्योंकि अगर विशेष राजनीतिक परिस्थिति नहीं बनी होती तो, उनके लिए तो टिकट के भी लाले पड़े हुए थे.

yunus khan, vasundhara rajeअगर वसुंधरा के खिलाफ मानवेंद्र नहीं होते तो क्या होता...

टोंक से चुनाव लड़ने पहुंचे यूनुस खान ने खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह प्रोजेक्ट करने की कोशिश की. यूनुस खान ने लोगों को समझाया कि जिस तरह बनारस में मां गंगा ने नरेंद्र भाई को बुलाया था, वैसे ही टोंग के लोगों ने उन्हें बुलाया है. यूनुस के इतना कहते ही पीछे से आवाज आई - 'मंत्री जी बनास तो सूख गयी है.' जिस तरह बनारस गंगा नदी के किनारे बसा है उसी तरह अमीर खां पिंडारी ने टोंक को बनास के एक छोर पर बसाया था. गंगा तो सदाबहार है लेकिन बनास को मौसमी नदी के रूप में जाना जाता है जो गर्मियों में सूखी पड़ी रहती है, फिर भी सिंचाई का मुख्य स्रोत है.

वसुंधरा का मुस्लिम कार्ड कितना असरदार है

टोंक में कई दशक बाद ऐसा मौका आया है जब कांग्रेस हिंदू तो बीजेपी मुस्लिम उम्मीदवार के साथ चुनाव मैदान में उतरी है. टोंक भी राजस्थान की उन 50 सीटों में से है जहां मुस्लिम वोटों की तादाद 40 से 50 हजार के बीच है और जीत-हार का फैसला उन्हीं के हाथों में रहता है. टोंक में मुस्लिम वोट के अलावा 20-30 हजार गुर्जर मतदाता है और 35 हजार के आसपास अनुसूचित जाति के वोटर हैं.

sachin pilotटोंक में बीजेपी ने सचिन को दी बड़ी चुनौती

बीजेपी ने अब तक टोंक में संघ से जुड़े उम्मीदवारों पर भरोसा करती आ रही थी, जबकि कांग्रेस का मुस्लिम उम्मीदवार में यकीन रहा. अरसे से महावीर प्रसाद जैन इलाके में बीजेपी का झंडा लहराते रहे. पिछली बार बीजेपी ने टोंक से अजीत सिंह मेहता को टिकट दिया था और उन्होंने सीट बीजेपी की झोली में भर दी थी.

200 सीटों पर चुनाव लड़ रही बीजेपी ने जहां सिर्फ एक मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट दिया है, वहीं 195 सीटों में से कांग्रेस ने 15 मुस्लिम कैंडिडेट पर भरोसा जताया है और उनमें तीन महिलाएं भी हैं. पांच सीटें कांग्रेस के सहयोगियों के हिस्से में गई हैं.

2013 में बीजेपी ने चार मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे जिनमें से सिर्फ दो जीतने में कामयाब रहे. नागौर से हबीबुर्रहमान विधायक बने और डीडवाना से जीतने वाले यूनुस खान वसुंधरा सरकार में मंत्री बने. हबीबुर्रहमान को टिकट नहीं मिला तो बगावत कर दिये और फिर कांग्रेस से टिकट हासिल कर लिया. हबीबुर्रहमान को भाजपा की ओर से मोहन राम चौधरी चुनौती दे रहे हैं. पांच बार विधायक चुने गये हबीबुर्रहमान बीजेपी ज्वाइन करने से पहले कांग्रेस में ही थे.

कांग्रेस ने भले ही ये समझ रही हो कि हबीबुर्रहमान की घरवापसी करा कर उसने बाजी मार ली है, पर बिलकुल ऐसा हुआ नहीं लगता. कांग्रेस ने जिन 15 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं वहां उसके सामने एक नयी चुनौती नजर आ रही है. ऐसे सीटों पर निर्दलीय मुस्लिम उम्मीदवार ही कांग्रेस के लिए मुश्किल खड़ी कर रहे हैं.

मिसाल के तौर पर राजस्थान की दो सीटों के आंकड़े काफी लगते हैं. किशनपोल विधानसभा क्षेत्र में 71 प्रत्याशी मैदान में हैं और इनमें से कांग्रेस उम्मीदवार सहित 35 मुस्लिम समुदाय से हैं. यही हाल आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र में भी देखा जा सकता है जहां कुछ 66 उम्मीदवार हैं और यहां भी कांग्रेस उम्मीदवार सहित 35 मुस्लिम कैंडिडेट हैं.

कहने को तो ये निर्दल प्रत्याशी हैं लेकिन इनके मैदान में होने का सीधा फायदा बीजेपी को मिलना तय है. यानी बीजेपी से सीधी लड़ाई के साथ साथ कांग्रेस को इन निर्दलीयों से भी परोक्ष रूप से जूझना ही होगा. राजस्थान की राजनीति को करीब से देखने वाले बताते हैं कि बीजेपी के दिग्गज नेता रहे भैरों सिंह शेखावत अक्सर ही डमी उम्मीदवारों की मदद लिया करते थे. वसुंधरा राजे लगता है शिवराज सिंह चौहान के साथ ही भैरों सिंह शेखावत से भी सबक ले रही हैं.

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लेखक

मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkieshindi

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

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