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Updated: 11 मार्च, 2022 10:49 PM
ज्योति गुप्ता
ज्योति गुप्ता
  @jyoti.gupta.01
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यूपी में भाजपा (BJP) ने बहुमत के साथ दोबारा सत्ता में वापसी की है. जनता ने एक बार फिर से योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) पर भरोसा जताया है. हर तरफ इस बात की चर्चा है कि महिलाओं ने योगी को जीत दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई है. असल में, महिलाओं ने सिर्फ यह देखकर सीएम योगी को वोट नहीं दिया है कि उन्होंने बीते पिछले 5 सालों में क्या किया है. महिलाओं ने तो अपने आने वाले 5 सालों के भविष्य को भी देखा है.

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मान लीजिए, मैं यूपी की रहने वाली एक लड़की हूं, मैंने वोट किया है. एक सामान्य लड़की के नजरिए से मैं बता सकती हूं कि यूपी की महिलाओं की क्या जरूरते हैं. उनकी सीएम योगी से क्या ऐसी मांगे हैं, जिन्हें घोषणापत्र में शामिल किया जाना चाहिए. ये जरूरतें जमीनी स्तर से जुड़ी हुईं हैं. ऐसा नहीं है कि महिलाएं खुश थीं सिर्फ इसलिए वे कमल का बटन दबाकर आ गईं. महिलाओं को सीएम योगी से कुछ उम्मीदें हैं, आइए उन पर एक नजर डालते हैं: 

1- यूपी में लड़कियों के लिए अच्छे कॉलेज की कमी है. यह बात हर छोटे शहर की लड़की जानती है कि, अगर उसे कुछ अलग करना है तो पढ़ाई के लिए उसे अपने घर से दूर जाना पड़ेगा. जिन लड़कियों को घरवाले परमिशन देते हैं वे 12वीं के बाद लखनऊ, दिल्ली, मुंबई, पुणे, बंगलौर निकल जाती हैं, वरना उनके पास बीए करने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं रहता. वे साधारण बीए करती हैं, एमए करती हैं. कुछ जैसे-तैसे बीटीसी निकाल लेती हैं और कुछ के पास शादी करने के अलावा कुछ मौका नहीं रहता हैं, क्योंकि दूसरे क्षेत्रों में नौकरी करने के लिए उनके पास मौके नहीं हैं.

2- जिस तरह कर्नाटक, बंगाल, केरल की लड़कियां अलग-अलग क्षेत्रों में नौकरी करती हैं वैसे यूपी में नहीं होता. यहां ज्यादातर लड़कियां प्राइमरी टीचर बनती हैं. उनके पास बीटीसी करने के अलावा कोई और ऑप्शन नहीं रहता है. ज्यादा से ज्यादा सेल्फ स्टडी के बाद बैंक में नौकरी कर सकती हैं. वहीं पंजाब और हरियाणा में लड़कियां स्पोर्ट्स के क्षेत्र में करियर बना रही हैं. केरल की लड़कियों को नर्स के रूप में आप हर अस्पताल में देख सकते हैं. बंगाल में बच्चियों को बचपन से ही नृत्य और संगीत की ट्रेनिंग दी जाती है. दिल्ली की लड़कियां हर स्मार्च क्षेत्र में अपनी किस्मत आजमा रही हैं.

कम से कम इन राज्यों की लड़कियों को अच्छे कॉलेज की तलाश में अपना घर तो नहीं छोड़ना पड़ता. इसके अलावा महिलाएं अपनी संस्कृति और कल्चर में करियर नहीं बना सकतीं. जबकि तमिलनाडु में भरत नाट्यम, आंध्र प्रदेश में कुचिपुड़ी क्लासिकल डांस में बकायदा उच्च शिक्षा हांसिल करती हैं. वहीं उत्‍तर प्रदेश का लोक नृत्‍य है रासलीला है. जिसे खासतौर पर कृष्‍ण जन्‍मोत्‍सव और होली के मौके प्रस्‍तुत किया जाता है. नौटंकी-नाटक को भी लोग भूल गए हैं, जबकि दिल्ली, मध्य प्रदेश, मुबंई में आज भी थियेटर में महिलएं रोजगार के अवसर तलाश सकती हैं.

3- कर्नाटक की बात करें तो वर्तमान में कर्मचारियों की संख्या में 35 प्रतिशत महिलाएं हैं. इस राज्य में इस संख्या को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की कोशिश जारी है. वहीं मिजोरम, अरुणाचल जैसे राज्यों में 50% से ज्यादा महिलाएं नौकरीपेशा हैं. वहीं यूपी में महिलाओं के लिए घर से बाहर निकलना भी मुश्किल है. यूपी की महिलाएं हॉस्पिटैलिटी, विज्ञान, बिजनेस, आईटी, फार्मा, एयर होस्टेज होस्टेज, डॉक्टर, योगा ट्रेनर में कम ही नजर आती हैं. पिछड़े इलाके में लोग भी जागरूक नहीं है. कई लोग तो चाहते नहीं हैं कि घर की महिलाएं नौकरी करें, जो चाहते हैं उन्हें चाहिए कि वे 10 बजे ऑफिस जाएं और 5 बजे तक घर आ जाएं. इसलिए वे सिर्फ बीटीसी की ओर रूख करते हैं. जबकि महिलाओं के करियर बनाने के लिए आज हजारों विकल्प मौजूद हैं.

4- बीते साल महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में आए. राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के मुताबिक, देशभर से लगभग 31 हजार शिकायतें मिलीं. इसमें 15 हजार से ज्यादा सिर्फ यूपी की हैं. बीते साल महिलाओं से दुष्कर्म के 1969 मामले सामने आए थे जो 2020 की तुलना में 21.69 फीसदी अधिक हैं. यूपी में महिला अपराध एक बड़ा मुद्दा है, कुछ सुधार हुआ है लेकिन अभी बहुत बेहतर होना बाकी है. आज भी कोई लड़की ऑफिस से देर घर जाते हुए डरती है. घरवालों को भी लड़कियों की सुरक्षा की ही चिंता लगी रहती है.

5- ग्रामीण महिलाओं ने इसलिए सीएम योगी को वोट दिया है कि वे अपने घरों से बाहर निकल सकें. उनका दायरा सिर्फ घर की सीमा तक सीमित न हो. उन्हें दबाव में शादी करने से आजादी चाहिए, उन्हें जबरदस्ती पर्दे में रहने से आजादी चाहिए, उन्हें स्वास्थ से जुड़ी सारी सुविधा चाहिए, वे अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती हैं, उन्हें महिला यौन उत्पीड़न से आजादी चाहिए, उन्हें समाज में बराबरी का हक चाहिए, उन्हें ऐसी मेडिकल सुविधाएं चाहिए, उन्हें जनसंख्या रोकने के लिए गर्भपात के अलावा दूसरे विकल्प चाहिए, उन्हें सैनेटरी पैड सस्ते में चाहिए, उन्हे बेटा-बेटी फर्क से मुक्ति चाहिए.  

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने जो मेनिफेस्टो जारी किया था, उसमें महिलाओं के लिए ये बातें कही गई थीं.

-कॉलेज जाने वाली हर महिला को मुफ्त स्कूटी

-उज्जवला के सभी लाभार्थी को होली और दीपावली में दो मुफ्त एलपीजी सिलेंडर

-कन्या सुमंगला योजना को 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार

-गरीब परिवार की बेटियों के विवाह के लिए 1 लाख रुपये की आर्थिक मदद

-मिशन पिंक टॉयलेट के लिए 1000 करोड़

-हर विधवा और निराश्रित महिला को 1500 रुपये प्रति माह का पेंशन

-3 नई महिला बटालियन

-सभी सार्वजनिक स्थानों और शैक्षणिक संस्थानों में CCTV कैमरे और 3000 पिंक पुलिस बूथ

-5 हजार करोड़ की लागत से अवन्ति बाई लोधी स्वयं सहायता समूह मिशन की शुरुआत

-UPPSC समेत सभी सरकारी नौकरियों में महिलाओं की संख्या दोगुनी

-1 करोड़ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 1 लाख रुपय तक का न्यूनतम दर पर लोन

-60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा

-महिला एथलीटों को 5 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद

-अब देखना है कि महिलाओं की इन उम्मीदों पर सीएम योगी कितना खरें उतरते हैं. यह तो आने वाला वक्त बताएगा. वैसे आपके जेहन में कोई मांग हो तो जरूर बताइए...

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लेखक

ज्योति गुप्ता ज्योति गुप्ता @jyoti.gupta.01

लेखक इंडिया टुडे डि़जिटल में पत्रकार हैं. जिन्हें महिला और सामाजिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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