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Updated: 30 मई, 2017 06:47 PM
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
  @bilal.jafri.7
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लोगों की आशा के विपरीत उत्तर प्रदेश एक बड़ी ही खराब स्थिति से गुज़र रहा है. प्रदेश में अपराधी बेखौफ हैं तो नेता निरंकुश. निरंकुशता का कुछ ऐसा ही मामला देखने को मिल रहा है उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में. जहां राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) स्वाति सिंह तमाम महत्वपूर्ण कार्यों को छोड़कर बियर बार का उद्घाटन करने में व्यस्त हैं. बियर बार के उद्घाटन के बाद स्वाति की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गयीं. साथ ही इन तस्वीरों ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए हैं.

तस्वीरों के, सोशल मीडिया में आने के बाद, मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका संज्ञान लेते हुए राज्यमंत्री स्वाति सिंह को नोटिस जारी किया है और विषय पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है.

ज्ञात हो कि लखनऊ के सरोजिनीनगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक और उत्तर प्रदेश की कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) स्वाति सिंह ने गोमतीनगर में अपने एक दोस्त के बियर बार का उद्घाटन किया था. इस इवेंट में न सिर्फ स्वाति सिंह बल्कि दो आईपीएस अधिकारीयों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी. मामले के प्रकाश में आने के बाद स्वाति चौतरफा आलोचना का शिकार हो गयी हैं जहां विपक्ष ने भी उन्हें आड़े हाथों ले लिया है.

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मामले पर अपना रुख साफ करते हुए स्वाति ने कहा है कि 'इस मामले को बेवजह तूल दिया जा रहा है. उन्होंने ये भी कहा कि मैंने किसी बार का नहीं बल्कि रेस्त्रां का उद्घाटन किया है जो मेरी देवरानी की सहेली का है'.

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश का शुमार भारत के उन राज्यों में है जिसे अपनी लचर कानून व्यवस्था के चलते हर बार शर्मिंदा होना पड़ता है. पूर्व की सपा सरकार के जाने और वर्तमान में भाजपा की सरकार आने के बाद लोगों को कहीं न कहीं इस बात का पूरा यकीन था कि अब प्रदेश की कानून व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा.

प्रदेश के ताजा हालात पर गौर करें तो मिलता है कि आज उत्तर प्रदेश अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा है. ऐसी स्थितियों में प्रदेश की राज्य मंत्री का बियर बार का उद्घाटन ये साफ दर्शाता है कि नेताओं को तंत्र सुधारने से कोई मतलब नहीं है. वो हमेशा कुछ ऐसा करते रहना चाहते हैं कि अपने कामों से लगातार मीडिया में बने रहें.

आपको बताते चलें कि शराब का शुमार प्रदेश की सबसे बड़ी समस्याओं में है, जहां एक तरफ प्रदेश भर की महिलाएं इसके विरोध में मार्च निकाल रही हैं तो वहीं दूसरी तरफ एक महिला होते हुए राज्यमंत्री इसका प्रचार प्रसार करने के लिए अपने हाथों से फीता काट कर फोटो खिंचवा रही हैं.

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स्वाति शायद ये भूल गईं हैं कि पद और जिम्मेदारी एक दूसरे के पूरक हैं. एक के बिना दूसरे की कल्पना नहीं की जा सकती. उन्हें ये भी याद रखना चाहिए कि स्वतंत्रता और पद दोनों ही बड़ी जिम्मेदारी के साथ आते हैं. यानी जितना बड़ा पद होता है, जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होती है.

अंत में हम अपनी बात खत्म करते हुए बस यही कहेंगे कि न सिर्फ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बल्कि उनसे और उनकी पार्टी से जुड़े हर व्यक्ति को ये बात समझनी चाहिए कि पार्टी लगभग 14 साल का वनवास काटकर सत्ता में आई है. लोगों को पार्टी से बहुत उम्मीदें हैं.

ऐसे में पार्टी के लिए ये बेहद ज़रूरी है कि वो लोगों की भावना का सम्मान करते हुए प्रदेश की जानता के हित में काम करें और लचर हुए तंत्र को सुधारें. यदि पार्टी ऐसा नहीं करती है तो उसे सोच लेना चाहिए कि जैसे जानता उसे सत्ता में ला सकती है वैसे ही वापस उसे वहां पहुंचा सकती है जहां पहले वो थी. 

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लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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