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Updated: 23 दिसम्बर, 2015 03:02 PM
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शराबबंदी के सवाल पर नीतीश कुमार फौरन हरकत में आ जाते हैं. दिल्ली में जैसे ही मीडिया ने सवाल किया, नीतीश ने बिलकुल उसी तत्परता से रिस्पॉन्ड किया, जैसे पटना में महिलाओं की मांग पर शराबबंदी लागू करने की घोषणा की थी.

ठेका सुधा डेयरी

मीडिया से मुखातिब नीतीश कुमार की तेजी से ऐसा लगा जैसे वो शराबबंदी पर सवाल को स्वाभाविक मानकर चल रहे थे. जवाब भी ऐसे दिया जैसे सवाल उन्हें पहले से पता हो और क्या बोलना है ये भी पहले से तय हो.

सवाल : शराब की दुकानों के सेल्समैन क्या करेंगे? उनकी रोजी-रोटी के बारे में सरकार क्या सोचती है?

जवाब : वे लोग दूध, दही, लस्सी और मिठाई बेचेंगे.

मुख्यमंत्री ने बताया कि कॉम्फेड यानी कोआपरेटिव मिल्क फेडरेशन के अफसरों को इस बारे में इत्तला कर दिया गया है. डेयरी उत्पादों की बिक्री में शराबबंदी से बेरोजगार हुए लोगों को लगा दिया जाएगा.

सरकार से सवाल

बिहार में पूर्ण शराबबंदी की बात से नीतीश कुमार के यू टर्न लेने पर बीजेपी नेता सुशील मोदी ने सवाल खड़े किए हैं.

नीतीश सरकार में ही उप मुख्यमंत्री रहे सुशील मोदी ने आरोप लगाया है कि नीतीश ने आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद और शराब लाबी के दबाव में पूर्ण शराबबंदी लागू करने का वादा तोड़ा है.

इसे भी पढ़ें : नीतीश ने निभाया शराबबंदी का वादा, अब पूरा करने की चुनौती

सुशील मोदी कहते हैं, "ऐसा लगता है कि शराबबंदी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने उन बड़ी-बड़ी शराब कंपनियों के हितों का ज्यादा ध्यान रखा, जिनसे सत्तारूढ़ दल को चुनाव में मदद मिली. सरकार ने जब विदेशी शराब की 90 फीसदी दुकानें बंद कराने का फैसला किया, तो 10 फीसदी दुकानों को छूट क्यों दे दी? अगर पूर्ण शराबबंदी की जानी है, तो सरकार राज्य भर में विदेशी शराब की खुदरा दुकानें क्यों खोलने जा रही है? क्या सरकार का काम व्यापार करना और दुकान चलाना है?"

ऐसे लागू होगी शराबबंदी

# शराबबंदी दो चरणों में लागू होगी. पहले चरण में एक अप्रैल से देशी शराब की बिक्री पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी जाएगी.

# पहले चरण में 6000 ठेकों को बंद किया जाएगा. इस तरह करीब 80 फीसदी ठेके बंद हो जाएंगे.

# ठेके बंद होने से जो लोग बेरोजगार होंगे, उन्हें सुधा डेयरी खोलने में तरजीह दी जाएगी.

ठेकों के बंद होने से बिहार सरकार को करीब 3000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा, लेकिन, नीतीश कुमार का कहना है, लोगों का स्वास्थ्य ज्यादा जरूरी है.

नीतीश कुमार मान कर चल रहे हैं कि अब भी कुछ लोग शराबबंदी का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विरोध करेंगे. नीतीश कहते हैं, "ये लोग बेरोजगारी का मसला भी उठाएंगे. हम इसके लिए तैयार हैं. शराबबंदी से किसी के सामने रोजगार का संकट नहीं पैदा होगा. फिलहाल सिर्फ चुनिंदा जगहों पर शराब की दुकानें खुलेंगी. धीरे-धीरे पूर्ण शराबबंदी लागू हो जाएगी."

...तो नाचती बोतल

बिहार में शराबबंदी की चर्चा के दरम्यान पंजाब सरकार के एक मंत्री का एक बड़ा ही दिलचस्प बयान आया. बादल सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सुरजीत कुमार ज्ञानी बोले, "मैं नहीं मानता कि शराब नशीला पदार्थ है. आप अल्कोहल को नशीला पदार्थ नहीं कह सकते. सेना में, पार्टियों में इसका सेवन किया जाता है."

ज्ञानी ने अपना ज्ञान भी शेयर किया, "सरकार शराब बनाने के लिए लाइसेंस देती है. हम शराब की दुकानों की नीलामी करते हैं. जब तक ऐसा किया जाता है, शराब को नशा नहीं कहा जा सकता."

सही कह रहे हैं ज्ञानी जी. जहां ड्रग्स और तरह तरह की नशाखोरी आम बात हो चली हो, वहां अगर ऐसी धारणा बनती है तो कोई ताज्जुब की बात नहीं. ज्ञानी जी भी तो वहीं के रहने वाले हैं. बाकी लोगों को तो ये सब खबरों से ही पता चलता है उनके पास तो सूबे की हर हरकत की सही रिपोर्ट भी होगी.

होम डिलीवरी नहीं

मौका मिले और नीतीश कुमार चूक जाएं, भला ऐसा कैसे संभव है. शराबबंदी के बहाने नीतीश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा. नीतीश बोले, "बिहार में पूर्ण शराबबंदी होगी. उन राज्यों की तरह नहीं जहां पूर्ण शराबबंदी है. लेकिन, शराब की होम डिलीवरी होती है."

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शराबबंदी लागू करने में बिहार सरकार का रवैया चाहे जैसा भी माना जाए, लेकिन शराब के ठेकों पर लोगों को दूध-दही और मिठाई मिलेगी, ये तो अच्छी खबर है. कहां लोग शराब पीकर सड़कों पर लुढ़के हुए मिलते थे. घर वाले खोज कर उन्हें उठाकर घर ले जाते थे. अब वे मिठाई लेकर खुद घर पहुंचा करेंगे.

#बिहार, #नीतीश कुमार, #शराब, Alcohol Ban, Liquor Ban, Nitish Kumar

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