New

होम -> सियासत

 |  5-मिनट में पढ़ें  |  
Updated: 31 अगस्त, 2018 07:22 PM
आलोक रंजन
आलोक रंजन
  @alok.ranjan.92754
  • Total Shares

राहुल गांधी 31 अगस्त की रात को कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाले हैं. राहुल गांधी आजकल नरेंद्र मोदी सरकार पर लगातार हमले कर रहे हैं. कई मुद्दे पर वे लगातार कटाक्ष कर रहे हैं. कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने से एक दिन पहले 30 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उन्हें नोटबंदी और राफेल डील पर घेरा. सभी लोगों को ज्ञात होगा कि राहुल गांधी कई बार खुद को भगवान शिव का भक्त बता चुके हैं.

rahul gandhi worshiping कैलाश मानसरोवर में भगवान शिव के दर्शन करेंगे राहुल गांधी

पिछले साल नवंबर में गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान मंदिर दर्शन की वजह से उनपर हिंदुत्व कार्ड खेलने का आरोप भी लगा था. उस समय आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा था कि वो भगवान शिव के भक्त हैं, इसलिए अक्सर मंदिर जाते हैं. कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान भी वे कई मंदिरों में गए थे. कर्नाटक विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान उन्होंने विमान हादसे को महसूस किया था. उन्होंने इसके बाद भगवान शिव को याद किया था और उन्हें शुक्रिया अदा करने के लिए कैलाश जाने की इच्छा जताई थी. पूर्व में वे केदारनाथ और सोमनाथ में स्थित ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए भी जा चुके हैं. वे अप्रैल 2015 में केदारनाथ और नवंबर 2017 में सोमनाथ मंदिर जा चुके हैं.

rahul1_083118025927.jpgकई मंदिरों के दर्शन कर चुके हैं राहुल

नवंबर 2017 में गुजरात के सोमनाथ मंदिर में दर्शन के दौरान उत्पन्न हुए विवाद में जब उनका नाम एक रजिस्टर में अहिन्दू के रूप में कथित तौर पर दर्ज हुआ था तब कांग्रेस ने कहा था कि राहुल गांधी अनन्य शिवभक्त हैं तथा वह सत्य के मार्ग में विश्वास करते हैं. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने तो यहां तक कहा था कि राहुल सिर्फ हिंदू ही नहीं जनेऊधारी हिंदू हैं. राहुल गांधी जब-जब मंदिर दर्शन के लिए गए हैं, बीजेपी उनको आड़े हाथों लेती रही है. उनपर सॉफ्ट हिंदुत्व का तमगा लगाती रही है. हिंदू धर्म में कैलाश मानसरोवर यात्रा शिव भक्तों के लिए काफी खास स्थान रखती है. उनके लिए यह जगह काफी अहम है. ऐसा माना जाता है कि कैलाश पर्वत पर भगवान शिव का वास है. यह यात्रा बहुत ज्यादा मुश्किलों भरी होती है. राहुल गांधी कैलाश की यात्रा जो भी मकसद से कर रहे हैं, इतना तो जरूर लगता है कि 2019 लोकसभा चुनाव में विजय होने का आशीर्वाद भगवान शिव से जरूर मांगेंगे.

वहीं अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात करें तो शिव भक्ति के मामले में वो राहुल गांधी से कई कदम आगे हैं. बिम्स्टेक समिट में हिस्सा लेने गए प्रधानमंत्री 31 अगस्त को ही पशुपतिनाथ धर्मशाला का उद्घाटन करेंगे. साथ ही साथ वे पशुपतिनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना भी करेंगे. प्रधानमंत्री मोदी शिव की नगरी वाराणसी से लोकसभा सांसद हैं. किसी से ये छुपा नहीं है कि प्रधानमंत्री को जब अवसर मिलता है वो शिव के दरबार में दर्शन करने के लिए जाते हैं. उन्हें केदारनाथ, पशुपतिनाथ, सोमनाथ, काशी विश्वनाथ, लिंगराज, महाकाल आदि मंदिरों में रुद्राभिषेक करते हुए देखा जा चुका है.

modi worshipingमोदी भी हैं शिवभक्त

विदेशी दौरों के दौरान भी वे मंदिरों में जाने से नहीं चूकते. वे 12 फरवरी को ओमान दौरे पर 125 साल पुराने शिव मंदिर में गए थे. इससे पहले वो अगस्त 2014 और मई 2018 में पशुपतिनाथ मंदिर जा चुके हैं. पिछले दौरे पर वो 12 मई को पशुपतिनाथ मंदिर गए थे. उस दौरान कर्नाटक में विधानसभा चुनाव का मतदान चल रहा था. उस समय कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री मंदिर जाकर वोटरों को प्रभावित कर सकते हैं. सभी को ये पता है कि 2014 लोकसभा चुनाव में विजयी होने के बाद वो 17 मई 2014 को भगवान शिव से आशीर्वाद लेने काशी विश्वनाथ मंदिर गए थे.

modi2_083118030030.jpgजब भी अवसर मिलता है प्रधानमंत्री मोदी मंदिर जरूर जाते हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 जुलाई 2018 को लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी पर चुटकी लेते हुए कहा था "आजकल शिव भक्ति की बातें हो रही हैं, मैं भी शिव जी को प्रार्थना करता हूं कि आपको इतनी शक्ति दें कि आप 2014 में फिर अविश्वास प्रस्ताव लाएं". अब देखना ये है कि 2019 लोकसभा चुनाव से पहले किसकी शिवभक्ति भारी पड़ती है? भगवान शिव किसकी भक्ति से खुश होते हैं. राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी दोनों भगवान शिव से लोकसभा चुनाव में विजय होने का आशीर्वाद मांग रहे हैं. दोनों अपने-अपने तरीकों से भगवान को खुश करने में लगे हुए हैं. शिव भी पशोपेश में हैं कि किसे अपना आशीर्वाद दें.

ये भी पढ़ें-

क्यों सिर्फ राहुल गांधी ही 2019 में नरेंद्र मोदी को चुनौती दे सकते हैं

राहुल जी, 1984 और 2002 दंगों का जरा अंतर तो समझिए

नागालैंड में अटल जी के अस्थि-विसर्जन का चर्च ने विरोध क्‍यों किया?

 

लेखक

आलोक रंजन आलोक रंजन @alok.ranjan.92754

लेखक आज तक में सीनियर प्रोड्यूसर हैं.

iChowk का खास कंटेंट पाने के लिए फेसबुक पर लाइक करें.

आपकी राय