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Updated: 09 सितम्बर, 2019 09:54 PM
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शेहला रशीद के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने देशद्रोह का केस दर्ज किया है. जम्मू-कश्मीर पीपल्स मूवमेंट की नेता के सामने ऐसी चुनौती बार आयी है. इससे पहले 2015-16 में JNU छात्र संघ के अध्यक्ष रहे कन्हैया कुमार को देशद्रोह के केस में तिहाड़ जेल भेजे जाने के बाद शेहला रशीद ने सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी. तब वो जेएनयू छात्र संघ की उपाध्यक्ष हुआ करती रहीं और अभी वो IAS अफसर रहे शाह फैसल के साथ घाटी की राजनीति में सक्रिय हैं. जम्मू-कश्मीर के तमाम मुख्यधारा के नेताओं की तरह शाह फैसल को भी पुलिस ने नजरबंद किया है. शाह फैसल श्रीनगर से विदेश जाने के लिए दिल्ली पहुंचे ही थे कि एयरपोर्ट पर हिरासत में लेने के बाद उन्हें वापस भेज दिया गया.

देशद्रोह के केस को लेकर कन्हैया कुमार एक बार फिर चर्चा में हैं. चर्चा की वजह दिल्ली पुलिस को दिल्ली की AAP सरकार की अनुमति न मिलने से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट हैं. हालांकि, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सफाई है कि केस को लेकर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है.

तब और अब के मामले में एक बड़ा फर्क है. तब शेहला रशीद, कन्हैया कुमार के खिलाफ लगे इल्जामों के लिए मैदान में लड़ाई लड़ रही थीं, इस बार वो खुद आरोपी हैं और अब उन्हें अदालत में कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ेगी.

आखिर ये कौन सी वजह है जो शेहला रशीद को बार बार देशद्रोह के मामलों से ही जूझना पड़ रहा है?

आकर्षण के सिद्धांत के 'रहस्य'

2004 में ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार रॉन्डा बर्न की एक किताब आई थी - सीक्रेट. बाजार में आते ही इस किताब ने धूम मचा दी और प्रचारित हुआ कि किताब से काफी लोगों की जिंदगी बदल गयी - बाद में इस किताब पर एक फिल्म भी बनी और उसे भी यूट्यूब पर लाखों बार देखा जा चुका है.

ये किताब एक खास थ्योरी पर लिखी गयी है - लॉ ऑफ अट्रैक्शन यानी आकर्षण के सिद्धांत. ये थ्योरी न्यूटन के नियम को अपने तरीके से समझाती है. किताब समझाती है कि कैसे हमारे विचार ही सांसारिक चीजों को कंट्रोल करते हैं. मसलन, इंसान उन्हीं चीजों की ओर आकर्षित होता है जो उसके विचार से मेल खाते हैं या फिर कुछ इस तरह, जैसे - 'इंसान के जैसे विचार होते हैं वैसी चीजें उसकी ओर खुद आकर्षित होती चली आती हैं.' वैसे इस थ्योरी को स्यूडो साइंटिफिक थ्योरी कहा जाता है - छद्म-वैज्ञानिक सिद्धांत. दरअसल, वैज्ञानिक नियमों के अपवाद स्वरूप कई चीजें पायी जाती हैं और ऐसी ही चीजें उसे रहस्य का रूप दे देती हैं - सीक्रेट के हिंदी रुपांतरण का नाम भी 'रहस्य' ही है.

क्या शेहला रशीद के इर्द गिर्द मंडराते देशद्रोह के मामलों के पीछे भी कोई रहस्य ही है?

shehla rashid with shah faesalशेहला रशीद पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है.

पहली बार शेहला रशीद ने देशद्रोह के एक आरोपी के पक्ष में लड़ाई लड़ी थी. शेहला रशीद भी कन्हैया कुमार के उन तमाम समर्थकों में से एक रहीं जिनका मानना रहा कि पुलिस ने झूठे आरोपों के आधार पर केस दर्ज किया, गिरफ्तारी की और फिर जेल भेज दिया. कन्हैया पर आरोप है कि वो कैंपस में आयोजित एक कार्यक्रम का हिस्सा थे जो संसद के हमलावर अफजल गुरु के याद में आयोजित हुआ और उस दौरान 'आजादी के नारे' लगाये गये. देशद्रोह के आरोपी कन्हैया कुमार के खिलाफ खूब बवाल हुआ था. यहां तक कि दिल्ली की अदालत में कन्हैया कुमार पर हमला भी हुआ. 2019 के आम चुनाव में कन्हैया कुमार बेगूसराय लोक सभा सीट से CPI के उम्मीदवार थे, लेकिन बीजेपी उम्मीदवार गिरिराज सिंह से हार गये. कन्हैया कुमार के चुनाव प्रचार में देश भर से जुटे उनके समर्थकों में शेहला रशीद भी शामिल थीं और बेगूसराय में घर घर जाकर प्रचार किया था.

क्या 'सीक्रेट' में पेश थ्योरी का शेहला रशीद की चुनौतियों से भी कोई लेना देना हो सकता है?

आखिर शेहला रशीद के साथ कौन सा रहस्य है जो उनके आस पास ऐसा ताना बाना बुन देता है?

या फिर शेहला रशीद खुद ऐसे किसी उपजाऊ माहौल की ओर आकर्षित होती चली जाती हैं जहां ऐसे हालात पहले से फल-फूल रहे होते हैं?

आखिर शेहला रशीद के साथ देशद्रोह के मामलों की इस लुकाछिपी के पीछे 'लॉ ऑफ अट्रैक्शन' का कौन सा 'सीक्रेट' या 'रहस्य' काम कर रहा है?

शेहला रशीद पर क्या क्या इल्जाम

शेहला पर सेना के खिलाफ भ्रम फैलाने का आरोप लगा है. सुप्रीम कोर्ट के वकील आलोक श्रीवास्तव की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने 3 सितंबर को FIR दर्ज किया है.

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, शेहला के खिलाफ कश्मीर घाटी में सैन्य कार्रवाई की गलत सूचना ट्वीट करने के लिए IPC की धारा 124-A (देशद्रोह), 153-A (दुश्मनी को बढ़ावा देना), 504 (जानबूझकर शांति भंग करने के इरादे से अपमान करना) और 505 (उपद्रव करवाने के लिए बयान देने) के तहत केस दर्ज कराया गया है. ये केस अब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सौंप दिया गया है. कन्हैया कुमार का केस भी स्पेशल सेल के ही पास है. शेहला ने 18 अगस्त को कई ट्वीट किये थे जिसमें सेना आरोप लगाया था कि वो कश्मीरियों पर जुल्म ढा रही है. शेहला रशीद का एक ट्वीट में दावा रहा कि सेना घाटी में जबरन लोगों के घरों में घुस रही है और बच्चों को उठा रही है. बाद में सेना की तरफ से इन आरोपों को झूठा बताया गया था. सेना की ओर से खंडन के बाद भी शेहला रशीद ने ट्विटर पर पोस्ट किया कि वो अपनी बात पर कायम हैं. शेहला ने कहा कि जितने भी ट्वीट वो कर रही हैं उसके पीछे तथ्य हैं जिन्हें लोगों से बात करके उन्होंने लिखे हैं. शेहला रशीद इस प्रकरण की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की और कहा कि जिन घटनाओं का ट्विटर पर जिक्र किया है सारी जानकारी देने को तैयार हैं.

शेहला के खिलाफ केस दर्ज कराने वाले आलोक श्रीवास्तव ने शिकायत में कहा है कि जेएनयू की पूर्व छात्र नेता के आरोप पूरी तरह गलत और मनगढ़ंत हैं - क्योंकि प्रताड़ना की न कोई वॉइस रिकॉर्डिंग सामने रखी गयी है और न ही घटनाओं की तारीख और समय बताया गया है. साथ ही, शेहला रशीद पर देश में हिंसा भड़काने की मंशा से जानबूझ कर फर्जी खबरें फैलाने और भारतीय सेना की छवि धूमिल करने का भी इल्जाम लगाया है. शिकायत में कहा गया है कि शेहला की हरकत - प्रथम दृष्टया देशद्रोह का अपराध है, क्योंकि उनकी मंशा भारत सरकार के प्रति घृणा पैदा करने ही रही.

मार्च, 2016 में इंडियन एक्स्प्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक कन्हैया कुमार ने भी कश्मीर के मामले में सेना पर गंभीर आरोप लगाये थे. रिपोर्ट के मुताबिक, कन्हैया कुमार ने कहा था, 'इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हमें कहां तक रोका जाता है, हम मानवाधिकारों के हनन पर बोलेंगे ही. हम AFSPA के खिलाफ आवाज उठाएंगे गी. हम अपने सैनिकों का बहुत सम्मान करते हैं, बावजूद इसके हम अब भी कहते हैं कि कश्मीरी महिलाएं सुरक्षाकर्मियों की शिकार होती हैं - उनका रेप होता है.' तब बीजेपी के यूथ विंग भारतीय जनता युवा मोर्चा ने इसे लेकर दिल्ली पुलिस के पास शिकायत भी दर्ज करायी थी.

सेना पर टिप्पणियां और एक माफीनामा

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी सेना के जवानों पर जुल्म के आरोप लगाती रही हैं. एक बार तो महबूबा ने सुरक्षाकर्मियों पर एक एसडीएम के साध भी हाथापाई का आरोप भी लगाया था. धारा 370 खत्म किये जाने के बाद महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला नजरबंद कर दिये गये हैं. हाल ही में बुकर अवॉर्ड विजेता अरुंधति रॉय ने सेना पर अपनी एक पुरानी टिप्पणी को लेकर माफी मांगी है. दरअसल, अरुंधति रॉय का एक वीडियो अचानक वायरल हो गया और लोग उनको टारगेट कर ट्रोल करने लगे.

वीडियो में अरुंधति रॉय कहती हैं, 'कश्मीर, मणिपुर, मिजोरम और नगालैंड जैसे राज्यों में हम जंग लड़ रहे हैं... 1947 से ही हम कश्मीर, तेलंगाना, गोवा, पंजाब, मणिपुर, नगालैंड में लड़ रहे हैं... भारत एक ऐसा देश है जहां अपनी सेना अपने ही लोगों के खिलाफ तैनात की जाती है... पाकिस्तान ने भी कभी इस तरह से सेना को अपने ही लोगों के खिलाफ नहीं लगाया.'

अरुंधति रॉय ने एक इंटरव्यू में कुछ इस तरह माफी मांगी - 'हम सभी जीवन में किसी पल में गलती से मूर्खतापूर्ण टिप्पणी कर देते हैं... ये छोटा सा वीडियो मेरे पूरे विचार को नहीं बताता. इससे वो सब पता नहीं चलता जो मैंने बरसों तक लिखती आयी हूं... मैं एक लेखका हूं और मैं मानती हूं कि आपके कहे हुए शब्द आपके विचारों से ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं... ये बेहद चिंताजनक है और वीडियो के किसी भी हिस्से से पैदा हुए कन्फ्यूजन के लिए मैं माफी मांगती हूं.'

मार्च, 2002 में अरुंधती रॉय के खिलाफ अदालत की अवमानना के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उनके माफी न मांगने पर एक दिन की प्रतीकात्मक सजा सुनायी थी. ये सजा अरुंधती रॉय के अभिव्यक्ति की आजादी के तहत की गयी एक टिप्पणी को लेकर हुई थी.

कन्हैया कुमार को लेकर खबर आयी थी कि AAP की दिल्ली सरकार ने कन्हैया कुमार के खिलाफ देशद्रोह के आरोपों के खारिज करते हुए दिल्ली पुलिस को अनुमति नहीं दी है. ये जानते ही दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर हमला बोल दिया - 'ये कानून को अपना काम करने नहीं दे रहे हैं. ये तो समर्थक ही इसीके हैं.'

जब कन्हैया कुमार को दिल्ली सरकार की ओर से क्लीन चिट दिये जाने का सवाल मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सामने उठा तो बोले - 'कोई राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं हो रहा है. सारे तथ्यों को संबंधित अथॉरिटी देखेगी और उसके हिसाब से निर्णय लेकर अदालत को बताया जाएगा.'

मान कर चलना होगा कि कन्हैया कुमार की तरह ही शेहला रशीद का केस भी दिल्ली पुलिस के जरिये दिल्ली सरकार के पास आएगा ही. देखना होगा कि आप सरकार शेहला रशीद के केस में भी कन्हैया कुमार जैसा ही कोई फैसला लेती है या फिर अलग!

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