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Updated: 13 दिसम्बर, 2019 05:09 PM
मृगांक शेखर
मृगांक शेखर
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संसद के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन जब कांग्रेस के पास बीजेपी को नॉर्थ-ईस्ट हिंसा पर घेरने का पूरा मौका होता, राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने एक दिन पहले ही सेल्फ गोल कर लिया था. कहां राहुल गांधी हमला बोल कर बीजेपी के बचाव का रास्ता खोजते देखने का आनंद उठा सकते थे - और कहां खुद ही टारगेट पर जाकर खड़े हो गये. झारखंड में राहुल गांधी ने जिस तरीके से 'मेक इन इंडिया' (Make In India) और 'रेप इन इंडिया' (Rape In India) की तुकबंदी की है, लगता है कांग्रेस नेता ने 'खून की दलाली' वाले से भी घटिया स्पीच राइटर हायर कर लिया है. वक्त के एक अंतराल के बाद राहुल गांधी ऐसा कुछ न कुछ बोल ही देते हैं जो उनके लिए मुसीबत बन जाती है. अब तो ऐसा लग रहा है जैसे बोलने में वो अधीर रंजन चौधरी से ही टक्कर लेने लगे हों. राहुल गांधी के बारे में बीजेपी नेता अरुण जेटली कहा करते थे - 'मालूम नहीं कब बड़े होंगे?' और राहुल गांधी हैं कि ऐसी बातें सही साबित करने में ही जुटे रहते हैं.

नाथूराम गोडसे को लेकर प्रज्ञा ठाकुर के बयान पर बीजेपी को बचाव का रास्ता अख्तियार करना पड़ा था, तभी राहुल गांधी ने एक ट्वीट कर दिया - साध्वी प्रज्ञा के नाम से पहले आतंकवादी लिख कर. ऐसा भी नहीं कि कांग्रेस की ओर से किसी ने पहली बार प्रज्ञा ठाकुर के बारे में वैसा कुछ कहा हो, लेकिन जब कांग्रेस नेता 'भगवा आतंकवाद' का जिक्र किया करते थे तब साध्वी प्रज्ञा महज आरोपी थीं - अब तो वो जनता की चुनी हुई सांसद हैं.

राहुल गांधी माफी मांगें या न मांगे, ये उनका फैसला है और हक भी - लेकिन अब प्रधानमंत्री मोदी के पुराने बयान को ट्वीट कर भी वो अपनी बातों से खुद को हुए नुकसान की भरपाई नहीं कर सकते.

राहुल गांधी को दंडित करने की मांग

संसद में भारी शोर-शराबे और हंगामे के बीच बीजेपी सांसदों ने स्पीकर ओम बिड़ला से भी पूछ लिया - राहुल गांधी ने कहा 'मेक इन इंडिया' की जगह 'रेप इन इंडिया' हो गया है, इस पर आपका क्या मत है?

राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा तो संभाल रखा था अमेठी में शिकस्त दे चुकीं स्मृति ईरानी - और बीजेपी सांसदों के साथ राजनाथ सिंह तो शुरुआत से ही सपोर्ट में खड़े हो गये थे.

झारखंड में राहुल गांधी ने उन्नाव गैंग रेप केस में बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी. 'रेप कैपिटल' शब्द का इस्तेमाल तो राहुल गांधी ने वायनाड दौरे में भी किया था - लेकिन झारखंड के गोड्डा में जिस तरीके से 'मेक इन इंडिया' के बहाने अपनी नयी थ्योरी 'रेप इन इंडिया' को समझाया वो हैरान करने वाली है.

rahul gandhi attacks narendra modiराहुल गांधी के मोदी पर हमले बैकफायर क्यों हो जाते हैं?

हो सकता है राहुल गांधी को प्रधानमंत्री मोदी के पसंदीदा प्रोजेक्ट मेक इन इंडिया से स्वाभाविक चिढ़ हो. हो सकता है वो मेक इन इंडिया का वो भावार्थ न जानते हों जो प्रधानमंत्री मोदी समझते हैं. यहां तक भी बात नहीं बिगड़ रही है, लेकिन मेक इन इंडिया की ध्वनि में रेप इन इंडिया को सुनना ही अपनेआप में अजीब है.

बीजेपी सांसदों ने राहुल गांधी के बयान को लेकर यही सवाल पूछा है - क्या वो चाहते हैं कि महिलाओं के साथ रेप हो?

बीजेपी सांसदों के इस सवाल के साथ ही महिला सांसद अपनी जगह पर खड़ी हो गयीं और नारे लगाने लगीं - 'राहुल गांधी माफी मांगो'. स्मृति ईरानी ने तो महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक बयान के लिए राहुल गांधी को दंडित करने की भी मांग करने लगीं. 'ये इतिहास में पहली बार है कि कोई नेता स्पष्ट रूप से यह कह रहा है कि भारतीय महिलाओं का बलात्कार किया जाना चाहिए। क्या यह राहुल गांधी का देश के लोगों के लिए संदेश है?'

स्मृति इरानी बोलीं, 'आज देश की महिलाओं के सम्मान की बात है. रेप जैसे संगीन अपराध में इस सदन के सदस्य, गांधी परिवार के बेटे ने खुलेआम रेप का आह्वान किया.

जोरदार विरोध के बीच पूछा भी - 'क्या वो देश के पुरुषों का महिलाओं को रेप करने के लिए आह्वान कर रहे हैं?'

राजनाथ सिंह ने भी सवाल उठाया - क्या इस सदन में ऐसे लोग भी चुन कर आ सकते हैं? ऐसे लोग जो इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करते हैं? राजनाथ सिंह ने कहा कि राहुल गांधी को सदन का सदस्य बनने का नौतिक अधिकार नहीं है.

साध्वी प्रज्ञा के बयान की तरफ इशारा करते हुए राजनाध सिंह बोले, 'मैं यह कहना चाहता हूं कि हमारी पार्टी के भी कुछ लोगों ने अपशब्दों का प्रयोग किया था तो हमने उनको बुलाकर उन्हें खेद व्यक्त कराया है.'

दरअसल, राहुल गांधी को एक ऐसा सलाहकार चाहिये जो समझा सके कि गले मिल कर एक बार तो आंख मारना तो चल जाता है - लेकिन बार बार बैकफायर ही होता है.

राहुल गांधी अपनी गलती के लिए PM मोदी से माफी मंगवाना चाहते हैं

माफी मांगने की डिमांड राहुल गांधी ने खारिज कर दी है, बल्कि ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी मांगने की डिमांड रखी है. राहुल गांधी का आरोप है कि नॉर्थ ईस्ट में हो रहे विरोध प्रदर्शनों से ध्यान हटाने के लिए बीजेपी उनके बयान को मुद्दा बना रही है. राहुल गांधी ने 'चौकीदार चोर है' और साध्वी प्रज्ञा के मामले में भी माफी मांगने से ऐसे ही इंकार कर दिया था.

राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि भारत दुनिया का रेप कैपिटल बन गया है. फिर उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने राहुल गांधी को नसीहत दी थी कि देश को इस तरह बदनाम करना ठीक नहीं है.

जिस बात को लेकर बीजेपी राहुल गांधी पर टूट पड़ी है, डीएमके नेता कनमोझी ने बचाव का रास्ता खोज लिया. राजनीतिक समीकरणों के तहत डीएमके अब भी कांग्रेस के साथ है - और नागरिकता संशोधन बिल पर भी मोदी सरकार का विरोध किया है.

जब बात उठी तो डीएमके सांसद कनिमोझी ने कहा, 'राहुल गांधी ने सदन के बाहर बयान दिया था. आप मुझसे जवाब चाहते हैं. मंत्री ने मेरा और सुप्रिया सुले का नाम लिया. पीएम मेक इन इंडिया को लेकर जो बोलते हैं हम उसका सम्मान करते हैं, लेकिन देश में क्या हो रहा है? राहुल गांधी यही कहना चाहते थे. मेक इन इंडिया नहीं हो रहा है और देश में महिलाओं के साथ रेप हो रहा है.'

झारखंड में गोड्डा की चुनावी रैली में राहुल गांधी ने कहा था, "नरेंद्र मोदी ने कहा था 'मेक इन इंडिया' लेकिन आजकल आप जहां कहीं भी देखते हैं, वो 'रेप इन इंडिया' है... उत्तर प्रदेश में नरेंद्र मोदी के विधायक ने एक महिला के साथ बलात्कार किया... फिर वो एक दुर्घटना की शिकार हुई लेकिन नरेंद्र मोदी ने एक शब्द भी नहीं कहा.''

उन्नाव रेप केस में कुलदीप सेंगर की गिरफ्तारी से पहले राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने इंडिया गेट पर कैंडल मार्च किया था. तब कठुआ रेप केस को लेकर भी बवाल हो रहा था. अभी पिछले ही हफ्ते हैदराबाद एनकाउंटर के बाद जब उन्नाव के रेप से जुड़े एक अन्य केस की पीड़ित की अस्पताल में मौद हो गयी तो प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश में बीजेपी की योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ हल्ला बोल दिया था.

कितना अजीब है ना जिस मुद्दे को लेकर राहुल गांधी आगे बढ़ कर सरकार को घेरते हैं, उस मसले पर एक सस्ती तुकबंदी को लेकर खुद ही घिर जाते हैं.

अगर मेक इन इंडिया और रेप इन इंडिया जैसी तुकबंदी से राहुल गांधी खुद भी इत्तेफाक रखते हैं तो कुछ कहना मुश्किल है - ऐसा करके वो अपना मजाक उड़ाने वालों को खुद के पप्पू होने का ही सबूत पेश कर रहे हैं.

राहुल गांधी खुद ही बता चुके हैं कि उनके ऑफिस में कुछ लोग ये काम करते हैं. राहुल गांधी के नोट्स भी देखे ही जा चुके हैं. मान लेते हैं कि राहुल गांधी को ऐसी बातें लिख कर मिलती हैं - बोलने के लिए. तो क्या वो सीधे रैली में जाकर ही पॉकेट से निकालते हैं और पढ़ देते हैं?

फिर तो मान कर चलना चाहिये कि राहुल गांधी और 'थ्री इडियट्स' के चतुर रामालिंगम में बहुत फर्क नहीं बचा है - बुद्धि और आंखों पर परदा पड़ जाये तो 'बलात्कार' को भी रट्टा मार कर 'चमत्कार' पढ़ा जा सकता है. जैसे कुछ क्रिकेटर मैच की आखिरी गेंद पर नतीजे बदल देते हैं, राहुल गांधी ने ऐसा ही किया है - लेकिन अफसोस ये भी हिट विकेट होने जैसा ही है.

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लेखक

मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkieshindi

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

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