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Updated: 28 जनवरी, 2020 08:04 PM
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लोकसभा चुनाव के बाद हाशिए पर आई कांग्रेस (Congress) राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की री-लॉन्चिंग कर देश में एक बार फिर से पीएम मोदी (Narendra Modi) के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश में लगी है. अगर जयपुर की युवा आक्रोश रैली (Yuva Aakrosh Rally) को इसकी शुरुआत माना जाए तो कांग्रेस के लिए यह गंभीर आत्म चिंतन का विषय है. राहुल गांधी अपने भाषण (Rahul Gandhi Speech) से लोगों को प्रभावित नहीं कर पाए. ऐसा लग रहा था कि पुरानी बोतल में नई शराब है. जनवरी 2013 में इसी जयपुर में राहुल गांधी की लॉन्चिंग हुई थी, जब वह कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए थे. तब राहुल गांधी ने कहा था कि मां ने कहा है सत्ता जहर है, मगर अब लोग कहने लगे हैं कि कब तक राहुल गांधी ये मानते रहेंगे कि सत्ता जहर है और सत्ता से दूर रहेंगे. रैली में जब बारिश आई तो राजस्थान के युवा कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक चांदना ने कहा कि राहुल गांधी शंकर के भक्त हैं, इसलिए बारिश आई है और अभिषेक हो रहा है.

राहुल गांधी शंकर के भक्त हैं तो शंकर की तरह इन्हें नीलकंठ बनना होगा. जहर पीना होगा और सत्ता पानी होगी. मगर ऐसा लगता है कि राहुल गांधी अपने पुराने बैगेज को उतार कर फेंकना नहीं चाहते हैं. राहुल गांधी ने उन सारी बातों को एक बार फिर से जयपुर के एतिहासिक अल्बर्ट हॉल पर दोहराया, जिन बातों को वह कई बार बोल चुके हैं. राहुल गांधी के भाषण में आज कुछ भी नया नहीं था. राहुल गांधी के भाषणों में पैनेपन का अभाव कांग्रेस की भी धार को कुंद कर देता है.

Rahul Gandhi Congress Yuva Aakrosh Rallyराहुल गांधी से उम्मीदें तो बहुत थीं, लेकिन जयपुर की युवा आक्रोश रैली में भी वह कुछ खास कमाल नहीं कर पाए.

नेता के रूप में फेल साबित हुए राहुल गांधी

किसी भी राजनीतिक पार्टी को आगे बढ़ने के लिए नेता, नीति और नीयत की जरूरत होती है. इन तीनों मुद्दों पर आज कांग्रेस फेल नजर आई. नेता के रूप में राहुल गांधी जितना कांग्रेस के नेताओं को अपील करते हैं शायद वो जनता को अपील नहीं करते. राहुल गांधी जब बोल रहे थे तो लोगों में जोश का भारी अभाव था. लोगों ने उठकर जाना शुरू कर दिया. ऐसा लग रहा था कि लोग मजबूरी में बैठे हैं. हालांकि, कांग्रेस इस बार अपनी पुरानी संस्कृति को बदलते हुए रैली में लोकगीत संगीत की जगह फिल्मी डीजे लेकर आई थी, मगर डीजे भी जनता में कोई खास उत्साह नहीं भर पा रह था. डीजे वाले लोगों से बार-बार यही आग्रह कह रहे थे कि कोई तो जोश दिखाओ. महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर वही घिसी-पिटी पुरानी बातों को बोलकर राहुल गांधी युवाओं के बीच अपनी जगह नहीं बना पाएंगे. अब यह बात राहुल गांधी को समझनी होगी. जिस भाषण को सुनने के बाद लोगों का दिल भावुक ना हो जाए, लोगों के दिल में भाव ना भर जाए, वह भाषण बेकार का महज समय जाया है. राहुल गांधी भीड़ को कनेक्ट क्यों नहीं कर पाते हैं, इस बात पर उन्हें सोचना होगा. राहुल गांधी की रीलॉन्चिंग की कोशिशें जोर-शोर से की गई थी. पूरे जयपुर को राहुल गांधी के बैनर पोस्टरों से पाट दिया गया था. कांग्रेस ने जगह भी ऐसी चुनी थी, जिससे रैली को ऐतिहासिक बनाया जाए. कांग्रेस की कोशिश थी कि जयपुर से ऐसा संदेश जाए कि राहुल गांधी देश के बेरोजगारों के आक्रोश की आवाज बनाने आए हैं और देश के युवा कांग्रेस के साथ जुड़ जाएं. मगर ऐसा हो न सका.

नीयत में खोंट भी साफ नजर आई

नेता के बाद हम नीयत की बात करते हैं. राहुल गांधी बार-बार लोगों से कह रहे थे कि डरने की जरूरत नहीं है, मगर इस रैली में कांग्रेस का डर भी नजर आया. पूरा देश NRC और CAA के मसले पर उबल रहा है. 2 दिन पहले ही राजस्थान विधानसभा में CAAए और NRC के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया है जिस जगह पर रैली हो रही थी, वहां हर शाम युवा CAA के विरोध में इकट्ठा होते हैं. मगर राहुल गांधी ने अपने भाषण में CAA और NRC के नाम पर इतना ही कहा कि देश में CAA और NRC को लेकर चर्चा तो होती है, मगर महंगाई और बेरोजगारी को लेकर चर्चा नहीं होती है. ऐसा लगा कि CAA और NRC पर बीजेपी की रणनीति को लेकर कांग्रेस डर गई है. इस रैली में साफ नजर आया कि कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष देश के उबलते हुए इन मसलों पर बोलने से बचते रहे. यह डर नहीं तो और क्या है. ऐसा नहीं हो सकता कि कांग्रेस के नेता CAA और NRC जैसे मुद्दों पर कुछ और बयान दें और कांग्रेस के शीर्ष नेता इन मुद्दों पर बोलने से बचते रहें. इसका मतलब कि आपकी नीयत में खोंट है. और खोटी नीयत से कोई आगे नहीं बढ़ता. जो आज बढ़ते दिख रहे हैं वह भी खत्म हो सकते हैं. इस रैली में बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक वर्ग के युवक-युवती आए थे, जो कि बेहद निराश होकर लौटे कि राहुल गांधी ने CAA और NRC के मुद्दे पर अपना मुंह नहीं खोला.

आपस में लड़ रही कांग्रेस दुश्मन को क्या खाक हराएगी !

तीसरी बात है नीति को लेकर. सवाल उठता है कि जयपुर में रैली क्यों हुई है. यह सवाल आम लोग भी पूछ रहे हैं. जयपुर में कांग्रेस की सरकार है, जहां पर लोग बेरोजगारी को लेकर राज्य सरकार से भी सवाल पूछते हैं. राहुल गांधी जयपुर में पूरे देश को रेप कैपिटल कह रहे थे तब शायद उन्हें याद नहीं आया होगा कि अलवर के रेप कांड में कांग्रेस की सरकार कितनी बदनामी हुई थी कि उन्हें परिवार से मिलने अलवर आना पड़ा था. साफ है कि यहां पर कांग्रेस की सरकार है और सरकारी संसाधनों के बल पर भीड़ इकट्ठा की जा सकती है, मगर इकट्ठा की हुई भीड़ किसी पार्टी के विचारों को लेकर आगे नहीं बढ़ सकती है. कांग्रेस की नीति में न राजनीति दिख रही है और न कूटनीति दिख रही है. राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट हैं, मगर इस रैली को राजस्थान कांग्रेस से अलग रखा गया, जिसकी वजह से उम्मीदों के अनुरूप भीड़ नहीं आई जो राहुल गांधी के भाषणों को रेस्पॉन्ड कर सके. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोशिश की कि रैली की सफलता का श्रेय कांग्रेस पार्टी को ना जाए, जिसके मुखिया सचिन पायलट हैं. लिहाजा यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई को इसका जिम्मा दिया, जिसकी वजह से कांग्रेस से जुड़ी भीड़ इकट्ठा नहीं हो पाई.

कांग्रेस के नेता तो आपस में जूतम-पैजार करने में लगे हैं. हकीकत तो यह है कि बीजेपी से संघर्ष गैर कांग्रेसी ज्यादा कर रहे हैं और इनमें भी खासकर महिलाओं का एक बड़ा तबका है जो मोदी सरकार से टक्कर ले रहा है. कांग्रेस चाहती है कि मोदी की अलोकप्रियता का फायदा उसकी झोली में गिर जाए और बिना संघर्ष किए कोई युवराज सिहासन पा जाएं. कुल मिलाकर कहें तो राहुल पार्ट-2 राहुल पार्ट-1 के एक्सटेंडेड वर्जन के अलावा और कुछ भी नहीं है. कम से कम इस रैली के बाद यह मांग जनता में जोर नहीं पकड़ सकती है कि राहुल गांधी को फिर से राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाए.

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