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Updated: 09 अक्टूबर, 2019 01:03 PM
अनुज मौर्या
अनुज मौर्या
  @anujmaurya87
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आखिर वो दिन आ ही गया, जिसका काफी समय से इंतजार था. भारत को फ्रांस की ओर से राफेल मिल गया. जी, वही राफेल जो भारत आने से पहले ही सुर्खियों का अंबार लगा चुका है. जहां एक ओर मोदी सरकार राफेल की ताकतों की बात करती नजर आ रही थी, वहीं दूसरी ओर राहुल गांधी ने वायुसेना के इस खतरनाक हथियार को चुनावी निशाना साधने के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया. 2018 के मानसून सत्र के दौरान को राहुल गांधी ने संसद में राफेल डील में घोटाले का मामला इतनी मजबूती से उठाया कि राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में आ गई. वैसे ये वही कांग्रेस है, जो जब-जब हारी तो हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ दिया. यानी पिछले कुछ सालों में राफेल डील में घोटाला और ईवीएम में गड़बड़ी का मुद्दा हर चुनाव के आगे-पीछे उठता ही रहा है, लेकिन इस बार न तो ये मुद्दे उठते दिख रहे हैं, ना ही इन्हें उठाने वाले कहीं दिख रहे हैं. वैसे सुनने में आया है कि वो बैंकॉक गए हैं.

हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड़ में चुनाव को अब करीब 15 दिन ही बचे हैं और 21 अक्टूबर चुनाव होने हैं, लेकिन राफेल डील जैसा ब्रह्मास्त्र कांग्रेस इस्तेमाल नहीं कर रही है, जबकि इसी ने 2018 में तीन राज्यों में किनारे लग चुकी कांग्रेस की नैय्या पार लगाई थी. वैसे चुनाव से पहले इस बार राफेल की बातें सिर्फ सकारात्मक हो रही हैं, क्योंकि भारतीय वायुसेना को फ्रांस की ओर से पहला राफेल मिल गया है. खुद राहुल गांधी अभी विदेश यात्रा पर हैं, शायद ध्यान लगाने गए हैं. वो जैसे ही लौटते हैं, तो हो सके तो राफेल डील का मुद्दा उठाएंगे. रही बात ईवीएम की, तो ईवीएम का मुद्दा नतीजे आने के बाद उठाया जाता है. 24 अक्टूबर को जब मतगणना होगी, तो हारने के बाद कांग्रेस ये मुद्दा भी उठाएगी. अगर गलती से झारखंड में जीत गई तो वहां नहीं उठाएगी.

राफेल डील, ईवीएम, कांग्रेस, राहुल गांधी, चुनावइस बार चुनाव सिर पर हैं, लेकिन न तो कोई राफेल डील को मुद्दा बना रहा है ना ही ईवीएम पर सवाल उठा रहा है.

घोटाला तो हमेशा घोटाला ही रहता है !

भले ही कांग्रेस इस समय राफेल घोटाले की बात नहीं कर रही है, लेकिन जनता के मन में राफेल घोटाले को लेकर एक शंका घूम रही है. शंका ये कि राफेल घोटाले का क्या हुआ? उन सबूतों का क्या हुआ, जिनके दम पर कांग्रेस की ओर से राफेल डील में घोटाला होने का दावा किया जा रहा था? क्या वो सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा भर था? और अगर राजनीतिक मुद्दा था भी तो तीन राज्यों में फिर से चुनाव हो रहे हैं, यही तो मौका है राजनीति चमकाने का. इन सबके बावजूद राफेल घोटाला का मामला नहीं उठाया जा रहा है तो इसे क्या समझा जाए?

वैसे पिछले साल भर पर एक नजर डालें तो ये पता चलता है कि राफेल डील के मुद्दे ने कई रंग दिखाए. पहले कांग्रेस को तीन राज्यों में जिताया और फिर उसी कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष को सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा दिया. और अंत में इसी राफेल डील ने मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट भी दिला दी.

इसी तरह अगर ईवीएम मशीन 2014 के लोकसभा चुनाव में खराब थी, उसके बाद के विधानसभा चुनावों में खराब रही, यहां तक कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भी खराब थी, तो अब वो सही तो हो नहीं गई होगी. तो फिर ये मान लें कि ईवीएम की बात अब नहीं होगी? होगी तो जरूर, लेकिन 24 अक्टूबर को नतीजे आने के बाद.

टीआरपी नहीं मिली तो छोड़ दिया?

राफेल डील और ईवीएम दो ऐसे चुनावी मुद्दे हैं, जो पिछले कई सालों में भारत की राजनीति में सियासी हथियार की तरह इस्तेमाल किए जाते रहे हैं. लेकिन इस बार सन्नाटा पसरा है. न तो कोई राफेल डील की बात कर रहा है, ना ही ईवीएम की. इसी एक बड़ी वजह ये भी है कि जनता ने इन दोनों ही मुद्दों को ज्यादा भाव नहीं दिया. या यूं कहें कि इन दोनों मुद्दों से टीआरपी नहीं मिली, तो इन्हें छोड़ दिया. कांग्रेस तो कांग्रेस, अन्य विपक्षी पार्टियों ने भी इस पर कोई बात नहीं की. चलिए राफेल डील से सब डरे हुए हो सकते हैं, लेकिन ईवीएम पर भी कोई राजनीतिक पार्टी कमेंट नहीं कर रही है. दरअसल, इसकी वजह यही है कि जनता ने इन दोनों ही मुद्दों को भाव देना बंद कर दिया है. बेशक 2018 में मानसून सत्र के दौरान जब राहुल गांधी ने सीना ठोक कर राफेल डील में घोटाला होने की बात कही थी बहुत से लोगों को उस पर यकीन होने लगा था. सबूत तक होने की बातें हुई थी, जिससे लोगों का भरोसा और बढ़ा, लेकिन आखिर में जब ये समझ आया की सारे दावे खोखले हैं, तो जनता ने भी सुप्रीम कोर्ट की तरह ही पीएम मोदी को क्लीन चिट दे दी.

कांग्रेस तो हर मुद्दे पर फंस जाती है!

भले ही बात राफेल डील की हो, ईवीएम की हो या फिर भारतीय सेना की. हर मामले पर कांग्रेस को बोलना भारी ही पड़ा है. सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाकर राहुल गांधी ने मोदी सरकार को निशाना बनाना चाहा था, लेकिन उनका निशाना सेना बन गई और सेना पर सवाल उठाने का मुद्दा भाजपा ने खूब भुनाया. गुजरात चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने मोदी का विकास पागल हो गया है कहा था, जिसे पीएम मोदी ने गुजरात की अस्मिता से जोड़ दिया और नतीजा ये हुआ कि वहां भी कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा. चलिए इस बार राफेल डील और ईवीएम पर तो बात हो नहीं रही है, देखते हैं राहुल गांधी बैंकॉक से क्या मुद्दा लेकर लौटते हैं.

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