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Updated: 08 मार्च, 2022 07:05 PM
देवेश त्रिपाठी
देवेश त्रिपाठी
  @devesh.r.tripathi
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यूपी चुनाव 2022 (UP Election 2022) को लेकर किए गए तमाम एग्जिट पोल (Exit Poll) सूबे में भाजपा सरकार की बहुमत के साथ वापसी का अनुमान लगा रहे हैं. अगर एग्जिट पोल 10 मार्च को चुनावी नतीजों में बदलता है, तो ये भाजपा और सीएम योगी आदित्यनाथ के लिए ऐतिहासिक क्षण होगा. क्योंकि, बीते कुछ दशकों की बात की जाए, तो उत्तर प्रदेश में कोई भी सत्तारूढ़ दल लगातार दूसरी बार लखनऊ के रास्ते पर नहीं चल पाया है. इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया (India Today-Axis My India) के एग्जिट पोल में भाजपा को 288 से 326 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है. एग्जिट पोल में सपा को 71 से 101, बसपा को 3 से 9 और कांग्रेस को 1 से 3 विधानसभा सीटें मिल सकती हैं. लेकिन, सूबे में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी द्वारा अपनी पूरी ताकत झोंकने के बावजूद कांग्रेस को कोई फायदा होता नजर नहीं आया है. कांग्रेस का वोट शेयर पिछले विधानसभा चुनाव में 6.2 फीसदी के मुकाबले केवल 3 फीसदी पर आकर सिमट गया है. इतना ही नहीं, पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली 7 विधानसभा सीटें भी पार्टी से छिनती नजर आ रही हैं. और, कांग्रेस 1 से 3 सीटों पर ही सिकुड़ती दिख रही है.

UP Exit Poll Priyanka Gandhiयूपी चुनाव 2022 के एग्जिट पोल के अनुमान बता रहे हैं कि प्रियंका गांधी की मेहनत कांग्रेस के लिए काम नहीं आ पाई.

महिला मतदाताओं ने कांग्रेस की ओर देखा तक नहीं

किसी जमाने में उत्तर प्रदेश में अपना वर्चस्व रखने वाली कांग्रेस को पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) ने सूबे में अपने धुंआधार प्रचार और जमीनी दौरों से संजीवनी देने की कोशिश की थी. लेकिन, यूपी चुनाव 2022 के एग्जिट पोल के अनुमान बता रहे हैं कि प्रियंका गांधी की मेहनत कांग्रेस के लिए काम नहीं आ पाई. प्रियंका गांधी का महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' का चुनावी नारा भी कांग्रेस को महिलाओं के बीच जगह दिलाने में सफल नहीं हो पाया. क्योंकि, लोगों को प्रियंका गांधी के इस दांव पर सवाल खड़ा करने की वजह पहले से ही रेडीमेड तैयार मिली थी. दरअसल, 40 फीसदी महिलाओं को टिकट देकर उत्तर प्रदेश की राजनीति बदलने की कोशिश कर रही प्रियंका गांधी का पूरा फोकस महिलाओं पर था. लेकिन, यूपी के साथ पंजाब, गोवा, उत्तराखंड और मणिपुर में होने वाले चुनावों में कांग्रेस ने महिलाओं को लेकर 40 फीसदी टिकट जैसी कोई घोषणा नहीं की थी. जिसका सीधा सा मतलब यही निकलता है कि ये महिलाओं को लुभाने के लिए खेला गया चुनावी दांव-पेंच था.

प्रियंका गांधी ने अपने चुनाव प्रचार में महिलाओं के लिए 'शक्ति विधान' के जरिये छात्राओं को स्कूटी और मोबाइल फोन, सरकारी नौकरियों में 40 फीसदी महिलाओं की हिस्सेदारी, सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा जैसे दर्जनों वादे किए थे. प्रियंका गांधी ने महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के मुद्दे पुरजोर तरीके से उठाए. लेकिन, सूबे की महिलाओं के लिए प्रियंका गांधी के इन चुनावी दावों पर भरोसा करना मुश्किल ही नजर आया. सर्वे के अनुमानित आंकड़ों की मानें, तो कांग्रेस को केवल 3 फीसदी महिला वोट ही मिले हैं. इस मामले में कांग्रेस का प्रदर्शन बसपा सुप्रीमो मायावती से भी कमजोर नजर आया है, जो 14 फीसदी महिला वोट के साथ प्रियंका गांधी से कहीं आगे हैं. कहा जा सकता है कि प्रियंका गांधी का आधी आबादी को लुभाने के लिए खेला गया 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' का कार्ड बुरी तरह से फेल हो गया. हां, ये जरूर कहा जा सकता है कि प्रियंका गांधी की वजह से महिलाओं के मुद्दों को यूपी चुनाव 2022 में हर सियासी दल ने प्राथमिकता दी. लेकिन, इसका फायदा कांग्रेस को नहीं मिल पाया.

भारी पड़ा नेतृत्व का 'चेहरा' बनने से इनकार

यूं तो प्रियंका गांधी ने यूपी चुनाव 2022 से पहले ही समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ गठबंधन करने की कोशिश की थी. जब गठबंधन की बातों को सीधे अखिलेश यादव की ओर से ही झटका मिल गया. तो, प्रियंका गांधी ने अकेले दम पर ही 403 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया. लेकिन, उत्तर प्रदेश की सत्ता से तीन दशक से ज्यादा समय से भी सत्ता का वनवास भोग रही कांग्रेस के पास सूबे में कोई बड़ा चेहरा नहीं था. ओबीसी मतदाताओं को साधने के लिए कांग्रेस ने अजय कुमार लल्लू को प्रदेश अध्यक्ष जरूर बनाया. लेकिन, अजय कुमार लल्लू भी सीएम योगी आदित्यनाथ, अखिलेश यादव और मायावती के टक्कर का चेहरा नहीं कहे जा सकते हैं. कायदे से देखा जाए, तो अजय कुमार लल्लू की तुलना एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी से भी नहीं की जा सकती है. इस स्थिति में प्रियंका गांधी के पास आगे आकर खुद को मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर पेश करने का मौका था. जो भाजपा, समाजवादी पार्टी और बसपा को काफी हद तक बैकफुट पर डाल सकता था. लेकिन, प्रियंका गांधी का इनकार कांग्रेस को सूबे में भारी पड़ गया.

मुस्लिम समुदाय ने नहीं किया कांग्रेस पर भरोसा

यूपी चुनाव 2022 से पहले ही सियासी लड़ाई सीधे तौर पर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच ही तय हो गई थी. इसके बावजूद प्रियंका गांधी को उम्मीद थी कि कांग्रेस को मुस्लिम मतदाताओं का साथ मिलेगा. लेकिन, इंडिया टुडे-एक्सिस माय इंडिया के सर्वें के आंकड़ों की मानें, तो कांग्रेस को केवल 3 फीसदी मुस्लिम पुरुषों और 2 फीसदी मुस्लिम महिलाओं का ही वोट मिला है. मुस्लिम समुदाय का अधिकांश वोट एकतरफा रूप से समाजवादी पार्टी के खाते में गया. जिसने कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है. इतना ही नहीं, जाट-जाटव-गैर जाटव-यादव-गैर यादव-ब्राह्मण-राजपूत-ओबीसी-कुर्मी-सवर्ण मतदाताओं ने भी कांग्रेस के दावों और वादों पर भरोसा जताने की जहमत तक नहीं उठाई.

वैसे तो कांग्रेस लंबे समय से उत्तर प्रदेश में अपनी खोई हुई जमीन पाने की कोशिश कर रही है. लेकिन, 2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के बावजूद कांग्रेस कोई कमाल नहीं दिखा सकी. वहीं, 2019 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में रायबरेली और अमेठी के अपने मजबूत गढ़ में से एक राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी को खो देने के बाद कांग्रेस के लिए दोबारा खुद को रेस में लाना मुश्किल ही नजर आया. जबकि, भाजपा ने अब कांग्रेस के आखिरी गढ़ रायबरेली में भी रायबरेली सदर की बागी कांग्रेस विधायक अदिति सिंह के सहारे सेंध लगा दी है. खैर, 10 मार्च को आने वाले चुनावी नतीजे ये तय कर देंगे कि कांग्रेस के लिए उत्तर प्रदेश की जमीन कितनी उपजाऊ साबित हुई. लेकिन, एग्डिट पोल के आंकड़ों के देखने के बाद कहा जा सकता है कि प्रियंका गांधी का हश्र तो राहुल गांधी से भी बुरा हुआ.

लेखक

देवेश त्रिपाठी देवेश त्रिपाठी @devesh.r.tripathi

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं. राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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