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Updated: 09 सितम्बर, 2022 01:54 PM
निधिकान्त पाण्डेय
निधिकान्त पाण्डेय
  @1nidhikant
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आपने गणतंत्र दिवस की परेड तो देखी ही होगी और उसके साथ कमेंट्री भी सुनी होगी...‘राजपथ पर सेना के तीनों अंगों के परेड और प्रदर्शन के साथ आप देख पाएंगे भारत की आन-बान-शान और राज्यों की झांकी निकलेगी तो दर्शन होंगे देश के गौरवशाली इतिहास के..’ शब्द कुछ और हो सकते हैं लेकिन ये झांकियां गुजरतीं रहीं राजपथ पर लेकिन अब और नहीं. अब ये राजपथ कहलाएगा 'कर्तव्य पथ.' मतलब अब कर्तव्य पथ पर हमारी जल, थल और वायु सेना के शौर्य की झांकी निकला करेगी. राजपथ यानी कर्तव्य के नाम बदलने की प्रक्रिया और इतिहास समेत सारी जानकारी आपको बताएं उससे पहले ये जान लीजिये कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए कर्तव्य पथ का उद्घाटन कर दिया है और अब इसके नए नजारे का आनंद देशवासी भी ले सकेंगे. पीएम मोदी ने 15 अगस्त को ही लाल किले की प्राचीर से कहा था कि आजादी के 75 साल बाद गुलामी का कोई भी प्रतीक नहीं रहना चाहिए, सबकुछ न्यू इंडिया वाले विजन को ताकतवर करने वाला साबित होना चाहिए. बस, तभी से राजपथ का नाम बदलने पर मंथन शुरू हो गया था.

Rajpath, Kartavya Path, Prime Minister, Narendra Modi, BJP, Name, Congress, Rahul Gandhiयदि राजपथ का यदि राजपथ का नाम बदला गया है तो ये फैसला पीएम मोदी के लिए भी आसान नहीं रहा होगा

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत विजय चौक से इंडिया गेट तक सेंट्रल विस्टा एवेन्यू बनकर तैयार हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 सितंबर को इसका उद्घाटन कर दिया. इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक कर्तव्य पथ के दोनों ओर के क्षेत्र को सेंट्रल विस्टा कहते हैं.पीएम मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का अनावरण भी किया. ये प्रतिमा उसी स्थान पर स्थापित की गई है जहां इस साल की शुरुआत में 23 जनवरी को नेताजी की जयंती पर उनकी होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण किया गया था. ग्रेनाइट से बनी ये प्रतिमा 28 फीट ऊंची है. इसका वजन 65 मीट्रिक टन है.

कर्तव्य पथ का उद्घाटन तो हो गया लेकिन ये नाम बदला कैसे गया ये भी आपको बता देते हैं.

राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक का करीब सवा-तीन किलोमीटर का रास्ता राजपथ कहलाता था. केंद्र सरकार ने हाल ही में इसका नाम बदलकर कर्तव्यपथ करने का फैसला किया. NDMC की बैठक में नाम बदलने के प्रस्ताव पर मुहर लग गई है. 7 सितंबर को ही नई दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन यानी NDMC ने राजपथ का नाम बदलकर 'कर्तव्य पथ' करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी. केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताते हुए सभी देशवासियों को बधाई दी है. उन्होंने कहा, राजपथ का नाम बदलने का फैसला मातृभूमि की सेवा करने की हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है.अब इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा से लेकर राष्ट्रपति भवन की पूरी सड़क और क्षेत्र को 'कर्तव्यपथ' के नाम से जाना जाएगा.

अब आपको बताते हैं कि नाम बदलने की प्रक्रिया कैसे होती है-

किसी जगह, शहर, गांव, या सड़क का नाम रखने या बदलने के लिए गृह मंत्रालय की एक गाइडलाइन है.

27 सितंबर 1975 को जारी की गई गृह मंत्रालय की एक गाइडलाइन का सभी राज्यों को पालन करना होता है.

किसी जगह या सड़क का नाम बदलने के प्रस्ताव पर विचार करते समय नए नाम के ऐतिहासिक महत्व पर भी ध्यान देना चाहिए.

किसी सड़क या जगह का नया नाम रखने के लिए स्थानीय लोगों की भावनाओं का ध्यान रखना होता है.

किसी सड़क या जगह का नया नाम रखने पर कोई भ्रम न हो, इसका भी ध्यान रखा जाता है.

किसी सड़क या जगह का नाम किसी व्यक्ति के नाम पर रखा जा रहा है तो उस व्यक्तित्व को लोगों को पहचानने की जरूरत पर ध्यान देना चाहिए.

अगर किसी विदेशी व्यक्ति के नाम पर सड़क या जगह का नाम रखा जा रहा है, तो उसकी स्पेलिंग का खास ध्यान रखा जाना चाहिए.

अगर कोई जगह या सड़क पुरानी है तो उसका नाम नहीं बदला जाना चाहिए. हालांकि, इसमें एक पेंच ये भी है कि अगर कोई बहुत पुरानी सड़क या जगह है तो उसका नाम बदल सकते हैं.

कोई जगह या सड़क नई है तो उसका नाम रखा या बदला जा सकता है.

जगह या सड़क का नाम बदलने को लेकर एक शर्त ये भी है कि किसी एक व्यक्ति की अपील या मांग पर ऐसा नहीं हो सकता.

जगह या सड़क का नाम तभी बदला जा सकता है, जब उसका प्रस्ताव गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, एनजीओ या किसी संगठन की ओर से आया हो.

राजपथ के मामले में ये प्रस्ताव केंद्र सरकार की ओर से ही है. NDMC की एक कमेटी ने प्रस्ताव पास कर दिया.

फिर दिल्ली सरकार के शहरी विकास विभाग की मंजूरी के बाद NDMC दिल्ली के पोस्ट मास्टर जनरल को चिट्ठी लिखती है जिसमें सड़क के नाम बदलने की जानकारी दी जाती है.

अब राज पथ का नाम प्रक्रिया के तहत बदलकर कर्तव्य पथ कर दिया गया है लेकिन क्या आप जानते हैं कि आजादी से पहले भी इसका इतिहास रहा है और इसका पहला नाम कुछ और था. आइये इसकी भी जानकारी आपसे शेयर कर लेता हूँ...

राजपथ/कर्तव्यपथ का इतिहास?

अंग्रेजों ने जब 1911 में अपनी राजधानी कोलकाता से दिल्ली बनाई, तो नई राजधानी को डिजाइन करने का जिम्मा दिया एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर को.

1920 में राजपथ बनकर तैयार हुआ था. तब इसे किंग्स-वे यानी 'राजा का रास्ता' कहा जाता था.

1905 में लंदन में जॉर्ज पंचम के पिता के सम्मान में एक सड़क बनाई गई थी, जिसका नाम किंग्स-वे रखा गया था. उन्हीं के सम्मान में दिल्ली में जो सड़क बनाई गई, उसका नाम भी किंग्स-वे रखा गया.

जॉर्ज पंचम 1911 में दिल्ली आए थे, जहां उन्होंने नई राजधानी की घोषणा की थी.

आजादी के बाद इसका नाम बदलकर 'राज पथ' रखा गया. हालांकि, ये किंग्स-वे का ही हिंदी अनुवाद था.

75 सालों से राजपथ पर ही गणतंत्र दिवस की परेड हो रही थी लेकिन अब परेड हुआ करेगी 'कर्तव्य पथ' पर.

नाम बदलने की इतनी बात हो गई तो दिल्ली में बदले हुए नामों की कुछ चर्चा और कर ली जाए क्योंकि दिल्ली में इससे पहले भी कई जगहों के नाम बदले जा चुके हैं.

ये तो हमने आपको बता दिया कि आजादी के बाद किंग्स-वे का नाम बदलकर राजपथ कर दिया गया था.

इसी तरह से जनपथ को पहले क्वींस-वे के नाम से जाना जाता था. इसका नाम भी आजादी के बाद बदलकर जनपथ किया गया.

इसी तरह से कर्जन रोड का नाम बदलकर कस्तूरबा गांधी मार्ग कर दिया गया था. रेटेंडन रोड को अमृता शेरगिल मार्ग और किचनर रोड को सरदार पटेल मार्ग कर दिया गया था.

2014 में मोदी सरकार आने के बाद रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग कर दिया गया था. प्रधानमंत्री आवास इसी जगह पर है.

2015 में औरंगजेब रोड का नाम एपीजे अब्दुल कलाम रोड कर दिया गया था.

2017 में डलहौजी रोड का नाम बदलकर दारा शिकोह रोड हो गया था.

कुछ और जगहों या रोड का नाम बदलने का भी प्रस्ताव है, लेकिन अब तक इस पर विचार नहीं हुआ है.

अब आपके मन में सवाल उठ सकता है कि राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ तो कर दिया गया लेकिन सिर्फ नाम बदला है या जगह में भी कुछ बदलाव हुआ है तो आइये जान लेते हैं कि वहां का नजारा अब कितना बदला-बदला और प्यारा-प्यारा नजर आएगा...

नाम बदलने के साथ 'कर्तव्य पथ' अब नए कलेवर, नए रंग-रूप में दिखेगा. कर्तव्य पथ के पास में ही करीब 19 एकड़ में नहर भी है. जिसे पूरी तरह से डेवेलप किया गया है. 19 एकड़ जमीन का जीर्णोद्धार किया गया है.

नहरों पर 16 पुल बनाए गए हैं. दो नहरों में तो बोटिंग की व्यवस्था भी होगी.

'कर्तव्य पथ' के आसपास लाल ग्रेनाइट से करीब साढ़े 15 किमी का वॉकवे यानी पैदल मार्ग बना है. जो बजरी रेत की जगह ले रहा है.

पैदल यात्रियों के लिए नए अंडरपास बनाए गए हैं. व्यस्त जंक्शनों पर चार नए पैदल यात्री अंडरपास बनाए गए हैं. बच्चों और दिव्यांगों के सुरक्षित उपयोग के लिए उपयुक्त ऊंचाई पर रेलिंग के साथ रैंप हैं.

इस पूरे क्षेत्र में करीब 3.90 लाख वर्ग मीटर में फैले क्षेत्र को चारों ओर से हरियाली के साथ विकसित किया गया है जो विशेष आकर्षण का केंद्र होगा.

कर्तव्य पथ के इस इलाके को शाम को जगमगाने के लिए आधुनिक लाइट्स का भी इस्तेमाल किया गया है. 74 ऐतिहासिक लाइट पोल और सभी चेन लिंक बहाल कर दिए गए हैं. 900 से अधिक नए लाइट पोल लगाए गए हैं.

परिसर के चरित्र को बनाए रखने के लिए कंक्रीट के बोल्डरों को एक हजार से अधिक सफेद बलुआ पत्थर के बोल्डरों से बदल दिया गया है।

इतना ही नहीं लोगों को आम सहूलियतें देने की भी पूरी तैयारी है.

अपराध और असुविधा से बचने के लिए करीब 80 सुरक्षाकर्मी इस मार्ग पर नजर रखेंगे.

पूरे हिस्से में 1100 से ज्यादा वाहनों के लिए पार्किंग की जगह बनाई गई है. इंडिया गेट के पास 35 बसों के लिए पार्किंग की जगह है.

अपने वाहन से आइये या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से या पैदल ही कर्तव्यपथ पर घूमने चले आइये लेकिन आपको खाने-पीने की कोई चिंता नहीं करनी होगी.

पांच वेंडिंग जोन बनाये गए हैं जहां 40 विक्रेता बैठेंगे. इंडिया गेट के पास दो ब्लाक आठ-आठ दुकानों के साथ होंगे. कुछ राज्यों ने भी अपने फूड स्टाल लगाने में रुचि दिखाई है मतलब ये कि पूरे देश का जायका आपको वहां मिलेगा बस आपको कर्तव्य-पथ तक आने का कर्तव्य ही करना है.

फूड स्टॉल के साथ दोनों ओर बैठने के भी इंतजाम किए गए हैं. पूरे इलाके में 400 से ज्यादा बेंच, 150 कूड़ेदान और 650 से अधिक नए साइनेज भी लगाए गए हैं.

अब आम लोग भी इसे देख सकेंगे. तो देर किस बात की. इन्तजार की घड़ियां समाप्त हो चुकी हैं. iChowk के पाठकों से हमारी गुजारिश है कि आप भी एक बार कर्तव्य-पथ पर घूम आइये और उन लम्हों को कैद करके अपनी कहानी हमारे साथ साझा कीजिये.

लेखक

निधिकान्त पाण्डेय निधिकान्त पाण्डेय @1nidhikant

लेखक आजतक डिजिटल में पत्रकार हैं.

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