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Updated: 02 जुलाई, 2015 08:16 PM
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योगी आदित्यनाथ कितने ही जहरीले बयान देते हों, लेकिन वे कुछ ऐसा करने जा रहे हैं जिससे संसद में बैठे उनके धुर-विरोधी भी मेजें थपथपाए बिना नहीं रहेंगे.
 
घोर नाइंसाफी : 2010 से सांसदों की सैलरी में कोई बढ़ोतरी नहीं
योगी आदित्यनाथ. सांसद बीजेपी के हैं लेकिन सभी सांसद 'मितरो' के लिए दिल में समान 'भाव' है. इनकी अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने ही सांसदों के हित में 60 प्रस्ताव सरकार के पास भेज दी है. इनका कहना है कि वर्तमान में सांसदों की सैलरी 50000 रुपये है, जिसमें 2010 से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. यह तो घोर नाइंसाफी है. इसे इंसाफ के तराजू पर तौलते हुए इन्होंने पे-कमीशन की तरह ही सांसदों की सैलरी में भी समय-समय पर ऑटोमैटिक इजाफे की मांग की गई है.

स्वाभाविक है: देश की अर्थव्यवस्था लचर है. लोग परेशान हैं. लोगों की 'आवाज' उठाने वाले भी परेशान हैं. महंगाई अलग है, जो मुंह बाए खड़ी है. ऐसे में पीएम साब मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया पर जोर दिए जा रहे हैं. आखिर कब तक चलता ऐसा! माना कि आप पीएम हैं, लेकिन सांसद भी हाड़-मांस के इंसान हैं. भले जनता की ही सही, नौकरी करते हैं. कल को जनता ने लात मार दिया तो... उन्हें भी अपना भविष्य सुरक्षित करना है. कदम बढ़ा चुके हैं - दोगुनी सैलरी और पेंशन में 75 फीसदी की बढ़ोतरी की सिफारिश कर दी है.

8 सिफारिशें जो जनता को जरूर जाननी चाहिए
- वर्तमान सैलरी को दोगुना कर दिया जाए.
- पे-कमीशन की तरह सांसदों की सैलरी में ऑटोमैटिक बढ़ोतरी हो.
- संसद सत्र के दौरान सदन में मौजूद रहने के लिए सांसदों को प्रति दिन मिलने वाले 2000 रुपये के भत्ते में उचित बढ़ोतरी हो.
- प्रत्येक सांसद को उनके निजी सचिव के लिए एक अतिरिक्त एसी फर्स्ट क्लास रेलवे पास दिया जाए. वर्तमान में सिर्फ सांसद के पति/पत्नी को ही एसी फर्स्ट क्लास में यात्रा करने की सुविधा है.
- पॉकेट मनी के तौर पर फर्स्ट क्लास रेल टिकट के किराए के बराबर पैसे दिए जाएं. अगर हवाई यात्रा करते हैं तो उसके टिकट के बराबर पॉकेट मनी दिया जाए. अभी तक सिर्फ सेकंड क्लास एसी टिकट की कीमत के बराबर पैसे दिए जाते हैं.
- स्वास्थ्य योजना के तहत सांसदों को जो लाभ मिलते हैं, उसका दायरा बढ़ाकर उनके बच्चों और पोते-पोतियों को भी शामिल किया जाए.
- पूर्व सांसदों का पेंशन (जोकि जीवन पर्यंत मिलता रहता है) 75 फीसदी तक बढ़ाया जाए. मतलब वर्तमान के 20000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर इसे 35000 रुपये किया जाए.
- पूर्व सांसदों को हर साल 20 से 25 मुफ्त घरेलू हवाई यात्रा करने का अधिकार दिया जाए.

संसद में वर्तमान सांसदों की स्थिति
- सांसदों की वर्तमान सैलरी देश की औसत सैलरी से 68 गुना ज्यादा है.
- भत्ते वगैरह लेकर एक सांसद को हर महीने 1.35 लाख रुपये मिलते हैं.
- सांसदों की सैलरी टैक्स फ्री होती है.
- घर से संबंधित जरूरी चीजें जैसे पानी, बिजली, फोन, इंटरनेट, फर्निचर, लॉन्ड्री वगैरह का खर्चा सब सरकार उठाती है.
- सांसदों को देश में कहीं भी जाने के लिए रेल के फर्स्ट क्लास का टिकट मुफ्त दिया जाता है. साल भर में 34 मुफ्त हवाई यात्रा के अधिकारी होते हैं सांसद.     

क्या हुआ था 2010 में
मनमोहन सिंह की सरकार ने वर्ष 2010 में सांसदों का वेतन 16000 रुपये से बढ़ाकर 80 हजार रुपये करने की संसदीय समिति की सिफारिश को स्वीकार नहीं किया था. हालांकि तब सरकार ने तीन गुना से कुछ ज्यादा बढ़ाकर सांसदों की सैलरी 50000 रुपये प्रति माह कर दिया था. साथ ही कार्यालय और संसदीय क्षेत्र भत्तों को भी 20000 से बढ़ाकर 40-40 हजार रुपये कर दिया था. इस मुद्दे पर संसद में आरजेडी, समाजवादी पार्टी और जेडीयू के सासदों ने भारी हंगामा किया था. उन्होंने संसदीय समिति की सिफारिश न माने जाने को संसद का अपमान बताया था. पूर्व सांसदों के पेंशन को भी 8000 से बढ़ाकर 20000 कर दिया गया था.

क्या हो सकता है 2015 में
कुछ बेतुके सिफारिशों को छोड़कर सब के सर्वसहमति से माने जाने की गुंजाइश ज्यादा है. सत्ता पक्ष और विपक्ष सब एक साथ मेजें थपथपाएंगे और देश की लचर अर्थव्यवस्था पटरी पर दौड़ने लगेगी. जनता जनार्दन इसे ही तो कहते हैं - अच्छे दिन...

सांसद, सैलरी, मोदी सरकार

लेखक

चंदन कुमार चंदन कुमार @chandank.journalist

लेखक iChowk.in में पत्रकार हैं.

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