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Updated: 07 जनवरी, 2021 11:09 PM
मशाहिद अब्बास
मशाहिद अब्बास
  @masahid.abbas
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पाकिस्तान चर्चा में है, इस बार भी पाकिस्तान की इमरान खान सरकार कठघरे में है. इमरान खान से इस्तीफे की मांग हो रही है. पाकिस्तान के हर बड़े शहर में सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन हो रहा है. पाकिस्तान में अल्पसंख्यक वर्ग के साथ कैसा कैसा ज़ुल्म होता है यह किसी से भी छिपा नहीं है. पाकिस्तान में शिया-सुन्नी का विवाद तो दशकों से है, लेकिन देश में अन्य जो अल्पसंख्यक वर्ग हैं, उनके साथ भी हमेशा ही ज़्यादती होने की खबरें आती रहती हैं. वह मुस्लिम वर्ग का अहमदिया समुदाय हो या फिर हिन्दू, सिख और ईसाई वर्ग. देश में जो भी अल्पसंख्यक है उसको हमेशा से पाकिस्तान में निशाना बनाया जाता रहा है. इमरान खान लाख दावे करें कि उनके कार्यकाल में अपराधों पर अंकुश लगा है लेकिन रिपोर्ट्स कहती हैं कि न तो अपराधों पर लगाम लग पाया है और न अल्पसंख्यक वर्ग पर हो रहे अत्याचारों पर. पाकिस्तान में इस वक्त एक बड़ा आंदोलन इमरान सरकार के खिलाफ हो रहा है, वजह है बलूचिस्तान स्थित एक कोयला खदान में काम करने वाले 11 शिया हजारा समुदाय के लोगों को नरसंहार. कोयला खदान से ही इन 11 मजदूरों की पहचान कर उनका अपहरण किया गया और फिर नज़दीक ही एक पहाड़ी पर ले जाकर उनकी गर्दन को काट दिया गया. इस हमले की ज़िम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने लिया है जिसका कोई खास वजूद अब नहीं रहा है.

Pakistan, Imran Khan, Coup, Muslim, Shia, Murder, ISIS, Minorityपाकिस्तान में शिया हजारा समुदाय के लोगों का नरसंहार हुआ है जिसने इमरान खान की मुसीबतें बढ़ा दी हैं

पाकिस्तान में शिया आबादी तकरीबन 20 फीसदी है, जिसमें बलूचिस्तान, कराची, रावलपिंडी, मुल्तान, पंजाब, हैदराबाद और लाहौर में शियाओं की अच्छी खासी संख्या है. इस हमले के बाद से ही खासतौर पर शिया वर्ग में काफी आक्रोश देखने को मिल रहा है. अभी कुछ ही महीने पहले पाकिस्तान में शिया समाज के खिलाफ कट्टरपंथी सुन्नी समुदाय ने एक बड़ी रैली निकाली थी. जिन समूहों ने रैली निकाली थी उऩ्हीं समुदायों पर अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों की हत्याओं का आरोप था, हालांकि इसमें सुन्नी समुदाय नहीं शामिल हुआ था बल्कि सिर्फ कट्टरपंथी विचारधारा के लोग ही शामिल हुए थे जिसके बाद माहौल पूरी तरह से गर्म हो गया था.

हालात पर किसी तरह से काबू तो पा लिया गया लेकिन इमरान खान की सरकार रैली निकाल माहौल खराब करने वालों पर पूरी तरह से चुप्पी साधे रहे और किसी भी तरह की कोई कार्यवायी करने से बचते रहे. इमरान खान ने उल्टा शिया वर्ग के 42 लोगों के खिलाफ कानूनी कार्यवाई की थी. आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि इन 42 में भी कुछ नाबालिग थे तो एक तीन साल का बच्चा भी शामिल था. पाकिस्तान में साल 2002 से लेकर साल 2018 तक लगभग 5 हज़ार से अधिक शियाओं की हत्या की गई है.

इनमें कई शिया समाज के बड़े नेता, बड़े धार्मिक गुरू, बुजुर्ग, महिला और बच्चे भी शामिल हैं. पाकिस्तान में शियाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर सरकार कार्यवाई करने के बजाए शियों को ही काबू में रखना चाहती है. पाकिस्तान के पंजाब विधानसभा में जुलाई के महीने में एक बिल पास किया गया जिसमें सुन्नी समुदाय के हिसाब से ही देश के संविधान को चलाने की मंज़ूरी दे दी गई. दरअसल इसमें बिल के अनुसार पाकिस्तान के पंजाब में अलैहिस्सलाम शब्द पर पाबंदी लगा दी गई जिसे शिया समुदाय पैगंबर मोहम्मद साहब के उत्तराधिकारियों के लिए इस्तेमाल करते हैं, सुन्नी समुदाय पैगंबर मोहम्मद साहब के उत्तराधिकारियों के लिए रज़ीअल्लाह शब्द का इस्तेमाल करते हैं.

अब नए कानून के मुताबिक सभी मुसलमानों को रज़ीअल्लाह शब्द का ही प्रयोग करना है अलैहिस्सलाम शब्द का प्रयोग करना अपराध माना जाएगा. पाकिस्तान के लगभग सभी राज्यों में शिया और अहमदी समुदाय के लोगों पर हमला होता रहता है, जिनमें इनके मस्जिद के अलावा अन्य धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाया जाता है.पाकिस्तान की सरकार अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को रोकने की कोशिश करने के बावजूद इसपर चुप्पी साध लेती है. जिसपर कई बार सुप्रीम कोर्ट ने भी तल्ख तेवर अपनाकर पाकिस्तान सरकार को डांट लगाई है.

पाकिस्तान में ऐसे कई संगठन हैं जिनको आंतकी संगठन कहकर पहले तो बैन किया गया मगर बाद में उन सबको इस लिस्ट से निकाल दिया गया जोकि अल्पसंख्यक वर्ग को निशाना बनाने का काम करने लग जाते हैं कुछ ऐसा ही हाल हाफिज़ सईद के संगठन के साथ भी है. पाकिस्तान में लगातार बढ़ रहे शिया-सुन्नी के टकराव के पीछे पाकिस्तान की इमरान खान की सरकार का भी बहुत बड़ा हाथ है. देश में तंगहाली, महंगाई, और आर्थिक स्थिति कंट्रोल से बाहर है.

इमरान खान के पास दुबारा सरकार में बने रहने के लिए कोई खास उपलब्धि भी नहीं है इसलिए वह किसी भी तरह बहुसंख्यक सुन्नी समुदाय के साथ खड़े होते हैं खासतौर पर कट्टरपंथ के साथ. ऐसे में वह बहुसंख्यक वर्ग के लिए हीरो बनने की चाह रखते हैं. अल्पसंख्यकों का बिखराव भी इमरान खान को फायदा पहुंचाने का काम ही करता है. इमरान खान अल्पसंख्यक समुदाये के कितने साथ हैं इसका अंदाज़ा आप यूं लगा लीजिए कि इऩ 11 मजदूरों की जो हत्या हुई है वह रविवार की घटना है. लेकिन अब तक किसी भी शव को दफनाया नहीं गया है. बल्कि उसे चौराहे पर रखकर सरकार से इस्तीफा और हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग की जा रही है.

सरकार इतनी गहरी नींद में है कि इतने बड़े धरने के बावजूद वह खामोश है और मामले में तेज़ी से कार्यवाई करने से बच रही है. वहीं शिया समुदाय के बड़े धार्मिक गुरूओं ने आंदोलन को तेज़ करने की बात कह इमरान खान के माथे पर पसीना ला दिया है. इमरान खान को अल्पसंख्यक समाज के लिए अपने विचार बदलने की ज़रूरत है वरना देश गृहयुद्ध में ऐसा तब्दील होगा कि इमरान खान का पाकिस्तान सैकड़ों वर्ष पीछे चला जाएगा. इमरान खान को गहरा मंथन करना ही होगा.

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मशाहिद अब्बास मशाहिद अब्बास @masahid.abbas

लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं और समसामयिक मुद्दों पर लिखते हैं

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