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Updated: 09 मार्च, 2019 11:46 AM
अनुज मौर्या
अनुज मौर्या
  @anujkumarmaurya87
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पिछले महीने 14 फरवरी को कश्मीर के पुलवामा में सेना के काफिले पर आतंकी हमला हुआ, जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए. इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान में पनाह लिए मसूद अजहर के संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली. साथ ही धमकी भी दी कि अगला हमला इससे भी बड़ा होगा. ऐसे में भारत के सामने सिर्फ एक ही रास्ता था कि पाकिस्तान की धरती पर चल रहे आतंकी कैंप को तबाह किया जाए और इसी वजह से 26 फरवरी को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान में घुसकर एयर स्ट्राइक की.

जहां एक ओर भारत सरकार दावा कर रही है कि इस हमले में सैकड़ों आतंकी मारे गए, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान का कहना है कि भारतीय वायुसेना तो जंगल में ही बम गिराकर चली गई. किसी भी आतंकी के मारे जाने की बात पाकिस्तान नहीं कबूल रहा है, क्योंकि इससे पूरी दुनिया में उसकी बदनामी होगी. सच को छुपाने के लिए इस समय पाकिस्तान ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है. ना तो वह खुद हमले वाली जगह की तस्वीरें या वीडियो जारी कर रहा है, ना ही किसी पत्रकार को घटनास्थल तक पहुंचने दे रहा है. पाकिस्तान की ये हरकत उसकी पोल खोलती है और साफ करती है कि सर्जिकल स्ट्राइक एकदम सच है, जिसमें आतंकी मारे गए हैं.

पाकिस्तान, बालाकोट, भारतीय वायुसेना, सर्जिकल स्ट्राइकपाकिस्तान ना तो खुद हमले वाली जगह की तस्वीरें जारी कर रहा है, ना ही किसी पत्रकार को घटनास्थल तक पहुंचने दे रहा है.

पत्रकारों को तीसरी बार रोका

गुरुवार को समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक टीम पाकिस्तान के बालाकोट में घटनास्थल की ओर जा रही थी. लेकिन पाकिस्तान के सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें उस पहाड़ी पर जाने से रोक दिया, जहां बने मदरसे पर भारतीय वायुसेना ने बमबारी की थी. पिछले 9 दिनों में ये तीसरी बार है जब रॉयटर्स के पत्रकार इलाके में पहुंचे हैं, लेकिन उन्हें घटनास्थल तक जाने की इजाजत नहीं मिली है. और इजाजत मिलेगी भी नहीं, क्योंकि अगर पत्रकार वहां पहुंच गए तो मदरसे का सच पूरी दुनिया के सामने आ जाएगा.

यहां आपके लिए ये जानना जरूरी है कि एयर स्ट्राइक के तुरंत बाद ही पाक सेना ने कहा था कि पत्रकारों को घटनास्थल तक ले जाया जाएगा, लेकिन अब पाकिस्तान अपनी बात से मुकरता सा नजर आ रहा है. पाकिस्तान ने दिखावे के लिए पत्रकारों को ले जाने की बात बोल तो दी थी, लेकिन अब वह डरा हुआ है कि कहीं बालाकोट में चल रहे आतंकी कैंप का सच जग-जाहिर ना हो जाए.

दुनिया को गुमराह कर रहा है पाकिस्तान

जहां एक ओर पूरी दुनिया का मीडिया ये पता लगाने की कोशिश में जुटा है कि भारत का दावा सही है भी या नहीं, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान दुनिया को गुमराह करने में व्यस्त है. पाकिस्तान इधर-उधर की तस्वीरें दिखाकर ये दावा कर रहा है कि कोई हमला ही नहीं हुआ.

पाकिस्तान का हवाई हमला बयां करता है सच

जैसा कि पाकिस्तान दावा कर रहा है कि बालाकोट में कोई नहीं मरा. अगर वाकई ऐसा था तो पाकिस्तानी एयरफोर्स ने भारतीय वायुसीमा में घुसकर हमला क्यों किया? जब कोई नुकसान ही नहीं हुआ तो उसका जवाब देने की जरूरत पाकिस्तान को क्यों पड़ी? पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई ही इस बात का सबूत है कि बालाकोट में बहुत ही भारी नुकसान हुआ. अगर ऐसा नहीं होता तो पाकिस्तान की ओर से भारतीय वायुसीमा का उल्लंघन करने की हिमाकत नहीं होती. पाकिस्तान ने इससे पहले 1971 में भारतीय वायुसेना का उल्लंघन किया था, जिसके बाद युद्ध की स्थिति पैदा हो गई और पाकिस्तान दो टुकड़ों में बंट गया.

सच और 'झूठ' के बीच 100 मीटर का फासला

रॉयटर्स के पत्रकारों को पहाड़ी के नीचे और मदरसे के करीब 100 मीटर दूर से ही जगह को देखना पड़ रहा है. यहां जिस बिल्डिंग पर बम गिराने की बात हो रही है, उसके चारों ओर ढेर सारे पेड़ हैं, जिसके चलते 100 मीटर दूर से कुछ भी सही से नहीं दिख पा रहा है. यानी ये कहना गलत नहीं होगा कि 100 मीटर दूर से सिर्फ वो झूठ दिख रहा है, जो पाकिस्तान पूरी दुनिया से बोल रहा है, जबकि अगर ये 100 मीटर का फासला पत्रकारों को तय करने दिया जाए तो वह सच दुनिया के सामने परोस देंगे.

पाकिस्तान में हुई एयर स्ट्राइक के अगले ही दिन भारत के विदेश सचिव विजय गोखले ने बताया था कि इस ट्रेनिंग कैंप पर की गई कार्रवाई में बड़ी संख्या में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी, ट्रेनर्स और सीनियर कमांडर मारे गए हैं. दुनिया भर का मीडिया और एजेंसियां सैटेलाइट से लेकर गांव वालों के बयानों तक से सच का पता लगाने में जुटी हैं. उस सच का पता, जो पाकिस्तानी सेना के पहरे में है. बालाकोट की उस पहाड़ी में किसी को जाने नहीं दिया जा रहा है, न जाने वहां पर क्या खिचड़ी पक रही है. मुमकिन है कि पाकिस्तान अपने गुनाहों के सबूत साफ कर रहा हो.

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