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Updated: 17 मई, 2018 11:02 AM
श्रुति दीक्षित
श्रुति दीक्षित
  @shruti.dixit.31
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कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2018 के नतीजे बड़े ही दिलचस्प रहे. सुबह 11 बजे लग रहा था कि येदियुरप्पा ही सीएम बनेंगे, 3 बजे तक दिल्ली जाने की तैयारी में थे येदियुरप्पा और पौने तीन बजे पांसा ही पलट गया. पार्टी से बहुमत छिन गया. जेडीएस और कांग्रेस ने मिलकर सरकार बनाने का न्योता दे दिया और बस हो गया कारनामा.

इस आखिरी मिनट के गठबंधन ने अमित शाह की पूरी प्लानिंग को हिला कर रख दिया होगा. दोनों पार्टियां मिलकर बहुमत ला रही हैं. हां, इसमें मायावती की दो सीटें भी शामिल हैं और तभी 112 का जादुई आंकड़ा पार हो रहा है. टक्कर अभी भी कांटे की ही है और अब कर्नाटक में रिजॉर्ट पॉलिटिक्स भी जोरों पर है.

सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस और जेडीएस की तरफ से येदियुरप्पा की शपथ के खिलाफ याचिका दायर की थी. इस मामले में अभी तक तो शपथ ग्रहण में कोई बदलाव नहीं हुआ है और सुप्रीम कोर्ट ने येदियुरप्पा को शुक्रवार तक का वक्त दिया है. इस मामले में आने वाले दिनों में जो भी फैसला हो, लेकिन लोगों की राय कांग्रेस और जेडीएस को लेकर कुछ अलग ही बन रही है.

कर्नाटक, लिंगायत, कांग्रेस, भाजपा, कांग्रेस, मोदी, जेडीएस, राज्यपाल, वजुभाई वाला

फिलहाल जहां एक तरफ कर्नाटक में इस तरह की बातें चल रही हैं वहीं दूसरी तरफ Quora पर भी कर्नाटक पॉलिटिक्स के जानकार इस मामले में अपनी राय पेश कर रहे हैं. Quora पर एक सवाल पूछा गया था कि आपको क्या लगता है कांग्रेस और जेडीएस के गठबंधंन को लेकर. उसका जवाब लोगों ने बड़ी ही तसल्ली से दिया है.

1. जनादेश के विपरीत होगा ये फैसला..

Pushkar Singh, Lawyer in Making नाम से इस Quora यूजर ने कांग्रेस को गलत ठहराया है. उसका सीधा सा लॉजिक भी दिया है.

कांग्रेस ये कह रही है कि वो ऐसे सरकार बना रही है जैसे भाजपा ने गोवा और मणिपुर में बनाई थी. पर भाजपा इन दोनों ही राज्यों में कांग्रेस से बस थोड़ी ही पीछे थी और जिस पार्टी को कम सीट्स मिली थी उसका सपोर्ट ले लिया था. साथ ही सीएम भी भाजपा का ही बना था.

कांग्रेस के साथ ये सिस्टम नहीं है. कांग्रेस जिसको 37% वोट मिले हैं और 75 सीटें हैं वो 18% वोट वाली पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनाने की बात कर रही है. साथ ही, सीएम भी उस पार्टी का ही बनेगा जिसको सिर्फ 4/5% वोट्स ही मिले हैं. यानी अगर कांग्रेस और जेडीएस की सरकार बनती है तो सीधी सी बात है कि जनादेश का कोई मतलब नहीं रह जाएगा. इससे कांग्रेस की आतुरता दिखती है और ये साबित होता है कि भाजपा को रोकने के लिए जनादेश का कोई मतलब नहीं है.

2. गठबंधंन की स्थिती में कहीं जेडीएस भी जेडीयू वाली हरकत न कर दे. 

Krishnamurthi CG, former Practice Head (GM) at Wipro नाम के एक Quora यूजर ने इस मामले में राजनीति को दोष दिया है. उनका कहना है कि ये तो भारत की राजनीति है और यहां कुछ भी हो सकता है. इसे भाजपा और जनतादल यूनाइटेड (बिहार) के गठबंधंन की तरह भी देखा जा सकता है. साथ ही 2019 को लेकर कुछ बातें भी कहीं :

कांग्रेस को ये ध्यान रखना होगा कि वो जेडी(एस) को जेडी(यू) न बनने दे. क्योंकि ऐसा हो सकता है और 2019 में भाजपा का गठबंधंन भी हो सकता है. ये राजनीति है और एक संभावना भी है.

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राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने के ख्वाब खाली ख्वाब ही रह जाएंगे. कारण ये है कि अगर भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं भी मिला तो भी इसकी उम्मीद है की यूपीए ही सरकार बने. ऐसे में भी राहुल गांधी प्रधानमंत्री नहीं बन पाएंगे और अगर यूपीए अपना पीएम नहीं भी घोषित कर पाए तो भी ये भाजपा के लिए ही एक मौके की तरह उबरेगा.

गुजरात और कर्नाटक इलेक्शन में मीडिया की हाईपरड्राइव से असल में कांग्रेस की निगेटिव छवि उभर कर आई है. दोनों ही राज्यों में कांग्रेस ने अपनी ट्रिक आजमाई और फिर भी सत्ता से दूर ही है. अगर कर्नाटक में जोड़-तोड़ की सरकार बन भी जाती है तो भी पावर तो जेडीयू के हाथ में ही रहेगी. गुजरात और कर्नाटक की गाथा पूरे देश में देखने को मिल रही है और राहुल गांधी का नेतृत्व गलत ही साबित हो रहा है. ऐसे में 2019 में उनका पीएम का कैंडिडेट होना थोड़ा मुश्किल लग रहा है.

भाजपा ने कर्नाटक में शायद अपना काम थोड़ी देरी से शुरू किया. चीन की यात्रा के बाद जब मोदी कर्नाटक पहुंचे तभी वहां भाजपा की मजबूती हो पाई. ये भाजपा के लिए एक सबक हो सकता है कि आने वाले समय में इलेक्शन के लिए वो तेज़ी से काम करे. भाजपा को कांग्रेस की चालों से बचने के लिए तोड़ तैयार रखने होंगे.

केंद्र सरकार को बेरोजगारी के मुद्दे पर जोरों शोरों से काम करना चाहिए. अगर अभी की सरकार नहीं करेगी तो आने वाली सरकार को करना होगा और ये मौजूदा सरकार के लिए अच्छी बात नहीं है. अरुण जेटली की पॉलिसी भाजपा को नुकसान भी पहुंचा सकती है. हमारे कोष 2014 के मुकाबले बेहतर हैं और भाजपा को अब कुछ काम लोगों के लिए भी करने चाहिए.

बाकी पार्टियां लगा सकती हैं अपना दांव: ये एक मौका है कि कांग्रेस को धरातल पर लाए और 2019 के लिए बेहतर डील्स ले जाएं. कांग्रेस की लीडरशिप वाजिब नहीं है और वो अभी यूपीए पार्टनर को कुछ भी देंगे, यहां तक की 2019 के लिए पीएम की गद्दी भी. उनके लिए अस्तित्व में बने रहना एक बड़ा मुद्दा है.

इनके अलावा भी कई लोगों ने इस सवाल का जवाब दिया और लगभग सभी के उत्तर में एक बार साफ दिखी और वो ये कि राजनीति में सब कुछ जायज़ है. कांग्रेस इस समय एकदम हाशिए पर खड़ी है और उसे बस किसी तरह अपनी सरकार बनानी है. यहां पावर में आने से ज्यादा भाजपा को रोकना मुद्दा है और उसके लिए कांग्रेस जेडीएस यानी किंग मेकर को किंग की सीट यानी सीएम पद देने तक को तैयार हो गई.

3. ये रणनीति कांग्रेस के अंत की शुरुआत है..

Raman Parashar, studied at Delhi Technological University नाम से Quora पर अपने उत्तर देने वाले यूजर का कहना है कि ये कांग्रेस के आखिरी अध्याय की शुरुआत है. कर्नाटक इलेक्शन के नतीजों के बाद राजनीति में तो काफी उथल पुथल हो सकती है, लेकिन कांग्रेस ने अपने लिए सबसे खराब स्थिती चुन ली है.

भाजपा को रोकने के लिए पागल कांग्रेस ये नहीं दे रही कि इससे वो अपना कितना नुकसान करती है. जेडीएस का सर्मथन लेकर कांग्रेस ने अगले कर्नाटक चुनावों (लोकसभा के लिए) को जीतने की अपनी आखिरी उम्मीद भी दांव पर लगा दी है. कांग्रेस का वोट शेयर 1-2% बढ़ा है, भाजपा का दुगना हुआ है, लेकिन जिस पार्टी का वोट शेयर गिरा है वो जेडीएस ही है. ऐसे में जो लोग कांग्रेस को वोट किए उन्हें ठगा सा महसूस हो सकता है और भाजपा के पास तो सबसे बड़ा वोट बैंक है ही.

कांग्रेस के अधिकतर लिंगायत एमएलए अपना आक्रोश पहले ही साबित कर चुके हैं ऐसे में यकीनन कांग्रेस के लिए हार की स्थिती बढ़ गई है. कर्नाटक के लोग भी खराब स्थिती में होंगे जैसे केंद्र में भाजपा और राज्य में उसकी विरोधी पार्टी.

4. कांग्रेस के लिए इससे बुरी बात नहीं हो सकती..

Sayak Biswas, Indian and proud यूजरनेम से Quora में उत्तर देने वाले यूजर का कहना है कि कांग्रेस ने अपनी इज्जत खुद ही गिरा ली है. कांग्रेस ने लोगों के सामने ये साबित कर दिया कि कांग्रेस अब खुद के दम पर इलेक्शन नहीं जीत सकती और न ही उसका ये सोचना है कि उसे सिर्फ इलेक्शन जीतना है और पावर में आना है.

अब कांग्रेस का उद्देश्य सिर्फ भाजपा को हराना ही रह गया है. ज्यादा वोट आने पर भी जूनियर पार्टी बनना कांग्रेस के लिए खराब स्थिती है. खुद ही राहुल गांधी ने जनतादल (सेक्युलर) को जनतादल (संघ) कहा था और अब वो अपनी बात से ही पलट रहे हैं. दुश्मन को दोस्त बनाने की स्थिती राजनीति में बहुत पुरानी रही है, लेकिन इस मामले में कांग्रेस की ये गलती है.

कांग्रेस और जेडीएस की सरकार बनती है तो यकीनन इसमें जनादेश कहीं नहीं होगा, लेकिन इस वक्त कर्नाटक की राजनीति कुछ ऐसे मोड़ पर आ गई है कि सरकार किसी भी पार्ट की बन सकती है. यकीनन हंग असेम्बली हुई है और अगर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां बहुमत साबित करने में नाकाम रहती हैं तो राज्य में कम से कम अगले 6 महीने के लिए राष्ट्रपति शासन लग जाएगा. फिलहाल, सबकी निगाहें राज्यपाल के फैसले पर ही टिकी हैं.

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श्रुति दीक्षित श्रुति दीक्षित @shruti.dixit.31

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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