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Updated: 24 दिसम्बर, 2019 05:55 PM
अनुज मौर्या
अनुज मौर्या
  @anujkumarmaurya87
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नागरिकता कानून (CAA) और NRC यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स को लेकर पूरे देश में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच मोदी सरकार ने NPR (National population register) पर काम करना शुरू कर दिया है. अगले हफ्ते होने वाली कैबिनेट की बैठक में मोदी सरकार को NPR के नवीनीकरण के लिए हरी झंडी भी मिल सकती है. अब सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिर NPR है क्या? (What is NPR) बता दें कि ये राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) हैं, जिसके जरिए जनगणना की जाएगी. अभी इस पर काम शुरू ही हुआ है कि इसका भी विरोध होने लगा है. एआईएमआईएम (AIMIM) सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने तो इसके नुकसान भी बताने शुरू कर दिए हैं. पश्चिम बंगाल और केरल भी NPR का विरोध कर रहे हैं. तरह-तरह की अफवाहें (NPR Rumors) भी फैलना शुरू हो गई हैं. ऐसे में जरूरी है कि आपको इस बात की पूरी जानकारी हो कि आखिर ये NPR है क्या. हम आपको पहले ही CAA की फुल फॉर्म (CAA Full Form) और NRC की फुल फॉर्म (NRC Full Form) बताने के साथ ये भी साफ कर चुके हैं कि नागरिकता संशोधन कानून क्या है (What is CAA) और एनआरसी क्या है (What is NRC). आइए अब NPR की फुल फॉर्म (NPR Full Form) जानते हैं और साथ ही जानते हैं कि NPR क्या है (What is NPR).

NPR full form vs NRC CAA full formपहले एनआरसी, फिर सीएए और अब एनपीआर.

क्या है NPR?

NPR (National Population Register) यानी राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर जनगणना करने की प्रक्रिया है. इसके तहत 1 अप्रैल 2020 से लेकर 30 सितंबर 2020 तक देश के नागरिकों का डेटाबेस तैयार किया जाएगा. पूरे देश में घर-घर जाकर जनगणना की जाएगी. बता दें कि इस व्यवस्था के तहत सरकार लोगों की बायोमीट्रिक जानकारी भी जमा करेगी.

क्या NRC का दूसरा रूप है NPR?

जैसे ही NPR को लेकर चर्चा तेज हुई, वैसे ही एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसका विरोध शुरू कर दिया. उनका कहना है कि यह NRC का ही दूसरा रूप है. वह इसे NRC की दिशा में उठाया गया पहला कदम बता रहे हैं. उनका आरोप है कि सरकार NPR के जरिए गुप्त रूप से NRC लागू करने की योजना बना रही है. वह कह रहे हैं NPR के जरिए भारत में रह रहे आम निवासियों का मिलान किया जाएगा. उन्होंने ये भी कहा कि इसके तहत जो लिस्ट बनेगी, उसे पहले स्थानीय अधिकारी वेरिफाई करेगा, फिर जो संदिग्ध लोग होंगे उन्हें अलग कर के मसौदा सूची प्रकाशित होगी. उनका ये भी आरोप है कि NPR लोगों का निजी डेटा भी इकट्ठा करता है.

अब NRC और NPR में फर्क समझिए

एनआरसी का मकसद उन लोगों की पहचान करना है जो भारत के नागरिक नहीं हैं, लेकिन भारत में ही रह रहे हैं. वहीं दूसरी ओर NPR में उन सभी लोगों को शामिल किया जाएगा, जो 6 महीने या उससे अधिक से भारत में रह रहे हैं. यानी भले ही कोई व्यक्ति एनआरसी के तहत देश का नागरिक साबित नहीं होता है, NPR में उसकी भी गिनती होगी. एनआरसी में अपनी नागरिकता साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं, जबकि NPR में ऐसे कोई दस्तावेज नहीं मांगे जाते हैं. सीधे-सीधे समझें तो ये बिल्कुल जनगणना ही है. यानी लोगों की गिनती.

किसने शुरू की थी ये योजना?

जब देश भर में एनआरसी पर बहस शुरू हुई और उसका विरोध हुआ तो कांग्रेस भी इसका पुरजोर विरोध करती दिखी. तब मोदी सरकार ने साफ किया कि यह उनकी योजना नहीं है, बल्कि इसे तो कांग्रेस ने ही शुरू किया था, जिसे मोदी सरकार सिर्फ लागू करने का बीड़ा उठा रही है. अब जब NPR पर बहस शुरू हुई है तो एक बार फिर ये सवाल उठ रहा है कि आखिर इसे किसने शुरू किया? क्या ये मोदी सरकार की तरफ से शुरू की गई योजना है? बता दें कि NPR की पहल 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में की गई थी. तब 2011 में जनगणना से पहले इस पर काम शुरू किया गया था और अब 2021 में होने वाली जनगणना से पहले एक बार फिर इस पर काम शुरू किया गया है. फर्क बस इतना है कि तब इसे कांग्रेस सरकार लागू करना चाहती थी और अब इसे मोदी सरकार लागू करना चाह रही है.

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