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Updated: 29 सितम्बर, 2021 06:18 PM
देवेश त्रिपाठी
देवेश त्रिपाठी
  @devesh.r.tripathi
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एक ओर दिल्ली में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से मुलाकात कर सीपीआई नेता कन्हैया कुमार और गुजरात के निर्दलीय विधायक व दलित राजनीति करने वाले जिग्नेश मेवाणी पार्टी में शामिल करने की तैयारियां चल रही थी. वहीं, पंजाब (Punjab) में उससे ठीक कुछ घंटे पहले ही राहुल गांधी के करीबी कहे जाने वाले नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. सिद्धू का इस्तीफा राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के लिए किसी झटके से कम नहीं कहा जा सकता है. क्योंकि, इन दोनों ही नेताओं ने नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब में अमरिंदर सिंह के खिलाफ बयान देने के मामलों में अप्रत्यक्ष रूप से 'फ्री हैंड' दिया था.

बीते कुछ महीनों में ये सिद्धू के सियासी बयानों का ही नतीजा रहा कि किसी समय 'अपराजेय' नजर आ रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) का किला धीरे-धीरे ढहने लगा. और, आखिरकार कांग्रेस (Congress) शीर्ष नेतृत्व ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर चरणचीत सिंह चन्नी को सीएम बना दिया. बुरी तरह अपमानित कर सीएम पद से हटाए गए अमरिंदर सिंह ने नवजोत सिंह सिद्धू और गांधी परिवार के खिलाफ सीधे तौर पर मोर्चा खोल दिया था. वहीं, पिछले वीकएंड पर अमरिंदर सिंह अपने एनडीए बैचमेट्स के साथ मस्ती करते दिखे थे. वैसे ये कहना गलत नहीं होगा कि सिद्धू के इस्तीफे से मचे इस घमासान में 'कैप्टन' सबसे ज्यादा फायदे में नजर आते हैं.

कांग्रेस के मास्टरस्ट्रोक की वजह से पंजाब कांग्रेस की पूरी टीम ही 'हिट विकेट' आउट हो गई.कांग्रेस के मास्टरस्ट्रोक की वजह से पंजाब कांग्रेस की पूरी टीम ही 'हिट विकेट' आउट हो गई.

चन्नी ने सिद्धू को किया 'हिट विकेट'

चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब का पहला दलित सिख मुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस आलाकमान अपनी पीठ थपथपाने में व्यस्त था. कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व ने चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाए जाने के फैसला को पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले अपना मास्टरस्ट्रोक बताया था. लेकिन, उनके इस मास्टरस्ट्रोक की वजह से पंजाब कांग्रेस की पूरी टीम ही 'हिट विकेट' आउट हो गई. चरणजीत सिंह चन्नी मुख्यमंत्री बनते ही नवजोत सिंह सिद्धू के दबाव से बाहर हो गए. मंत्रिमंडल से लेकर अफसरशाही तक के तमाम फैसलों पर चरणजीत सिंह चन्नी ने सिद्धू की बातों को अनसुना कर दिया. नतीजतन नवजोत सिंह सिद्धू का भड़कना तय था. लेकिन, चन्नी के खिलाफ भड़ककर सिद्धू इस्तीफा देने के अलावा कर भी क्या सकते हैं? दरअसल, पंजाब में कांग्रेस आलाकमान के सामने 'सांप-छछूंदर' वाली स्थिति बन गई है. अगर कांग्रेस ने सिद्धू को मनाने के लिए चन्नी को हटाया, तो कांग्रेस की दलित विरोधी छवि बनने का खतरा है. हालांकि, 'मीटू' के आरोपों को लेकर चन्नी का इस्तीफा लिया जा सकता है. लेकिन, तब चन्नी भी कांग्रेस से बगावत करने पर उतर जाएंगे.

वहीं, नवजोत सिंह सिद्धू को नहीं मनाया गया, तो कांग्रेस में फैली गुटबाजी का और भयानक चेहरा सामने आएगा. पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर शपथ लेने के दिन जब सिद्धू ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के सामने 'क्रिकेटिंग शॉट' खेला था. उसी दिन तय हो गया था कि पंजाब में कांग्रेस के बुरे दिन शुरू होने वाले हैं. जो नेता अमरिंदर सिंह के नाम के प्रभाव में चुप हो जाते थे, उन्होंने बगावत कर दी. इस वजह से कैप्टन अमरिंदर सिंह की कुर्सी जरूर चली गई. लेकिन, कांग्रेस आलाकमान ने तमाम गुटों को साथ लेकर चलने की जिस उम्मीद के साथ नवजोत सिंह सिद्धू को आगे बढ़ाया था, वो उसे अंजाम नहीं दे सके. उल्टा सीएम बनने की होड़ में सुनील जाखड़ से लेकर सुखजिंदर सिंह रंधावा सरीखे नेताओं ने अपनी दावेदारी पेश कर दी. स्थिति ऐसी हो गई कि मन मारकर चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाना पड़ा. लेकिन, सत्ता की बागडोर हाथ में आते ही चन्नी ने भी सिद्धू को साइडलाइन करने की कोशिश शुरू कर दी.

सिद्धू की नाराजगी से बढ़ा 'कैप्टन' का कद

माना जा रहा था कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद नवजोत सिंह सिद्धू को ही पंजाब का मुख्यमंत्री बनाया जाएगा. लेकिन, हुआ वही, जिस बात को लेकर अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस आलाकमान को पहले ही आगाह कर दिया था. दरअसल, कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्री रहने के दौरान पंजाब कांग्रेस में उनके खिलाफ कोई खुलकर आवाज उठाने वाला नहीं था. पंजाब की राजनीति में अपना एक अलग दबदबा रखने वाले अमरिंदर सिंह कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं. हालांकि, उस दौरान भी पंजाब कांग्रेस में आंतरिक गुटबाजी चलती रहती थी, लेकिन अमरिंदर सिंह सभी को साधते हुए जैसे-तैसे आगे बढ़ते रहते थे. आसान शब्दों में कहें, तो पंजाब में पहले केवल कैप्टन गुट और कैप्टन विरोधी गुट हुआ करता था. 

लेकिन, नवजोत सिंह सिद्धू के अमरिंदर सरकार से इस्तीफा देने के बाद कैप्टन के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सिद्धू को न टोक कर कई गुट खड़े कर दिये. राहुल गांधी तो अप्रत्यक्ष रूप से इसे बढ़ावा ही देते नजर आए. वहीं, पंजाब विधानसभा चुनाव की तारीख पास आते ही नवजोत सिंह सिद्धू और ज्यादा मुखर हुए, तो भी कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व चुप्पी साधे रहा.

सीएम अमरिंदर सिंह ने कई बार कांग्रेस आलाकमान से नवजोत सिंह सिद्धू के मामले पर हस्तक्षेप करने की मांग की. लेकिन, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की शह पर सिद्धू और उग्र होते गए. इसकी वजह से कांग्रेस की गुटबाजी खुलकर सड़क पर आ गई. वहीं, अब नवजोत सिंह सिद्धू ने कांग्रेस नेतृत्व को मुश्किल में डाल दिया है. खबर तो ये भी है कि इस नए सियासी घमासान पर कांग्रेस आलाकमान सिद्धू से खफा है. हालांकि, सिद्धू का इस्तीफा अभी मंजूर नहीं किया गया है. लेकिन, बताया जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान ने पंजाब में नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए मंथन भी शुरू कर दिया है. दरअसल, इस्तीफा स्वीकार न कर कांग्रेस आलाकमान नवजोत सिंह सिद्धू को अपने फैसले पर फिर से विचार करने का समय देना चाहता है. क्योंकि, बार-बार की किरकिरी से कांग्रेस को अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव में नुकसान होना तय है.

कैप्टन बनेंगे किंगमेकर

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को भी अंदाजा था कि इस बार उनका मुख्यमंत्री बनना संभव नहीं होगा. लेकिन, उन्होंने एक दांव खेल दिया था. वहीं, पंजाब कांग्रेस में अब तक हुए पूरे घटनाक्रम के बाद नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफे से अमरिंदर सिंह की इस बात पर मुहर लग गई कि पंजाब को समझने में शीर्ष नेतृत्व ने भूल कर दी. विधानसभा चुनाव से पहले हो रही कांग्रेस की ये फजीहत कहीं न कहीं पार्टी को नुकसान पहुंचाएगी. अगर इस दौरान कैप्टन अमरिंदर सिंह अपने विकल्पों को ध्यान में रखते हुए कोई फैसला लेते हैं, तो वह चुनाव नतीजों के सामने आने के बाद किंगमेकर की भूमिका में होंगे. इस स्थिति में कहना गलत नहीं होगा कि पंजाब के इस सियासी घमासान में सबसे ज्यादा फायदा कैप्टन का ही होगा.

लेखक

देवेश त्रिपाठी देवेश त्रिपाठी @devesh.r.tripathi

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं. राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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