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Updated: 22 नवम्बर, 2021 09:19 PM
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
  @bilal.jafri.7
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उत्तर प्रदेश में चुनाव है. इस चुनावी माहौल में छोटी से लेकर बड़ी हर चीज को न केवल मॉनिटर किया जा रहा है. बल्कि उसे खास तवज्जो भी दी जा रही है. सपा के संरक्षक और राम मंदिर आंदोलन के दौरान कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले मुलायम सिंह का जन्मदिन ऐसी ही एक बड़ी घटना है. यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और देश के रक्षा मंत्री रह चुके मुलायम सिंह के जन्मदिन पर सपा के खेमे में उत्साह का होना लाजमी है मगर जिस तरह उन्हें विरोधियों और उनमें भी उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और देश के पीएम नरेंद्र मोदी से मुबारकबाद मिली राजनीतिक पंडितों के बीच चर्चाओं और विमर्श के दौर की शुरुआत हो गयी है और पीएम मोदी और योगी आदित्यनाथ से मिली मुबारकबाद के तमाम अर्थ निकाले जा रहे हैं. चूंकि ये सब चुनाव पूर्व हो रहा है तो माना यही जा रहा है कि ये शुभकामना संदेश यादवों को प्रभावित करने का पूरा सामर्थ्य रखते हैं और यदि ऐसा हुआ तो इसका भी फायदा आने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिलेगा.

Mulayam Singh Yadav, SP, Birthday, BJP, Narendra Modi, Prime Minister, Yogi Adityanathमुलायम सिंह हमेशा पीएम मोदी के प्रिय रहे हैं और इसका कारण 2017 का विधानसभा चुनाव और अखिलेश हैं

राजनीति के लिहाज से मुसलमानों से हमदर्दी रखने वाले मुलायम सिंह यूं तो सत्ता पक्ष के बीच मुल्ला मुलायम के नाम से मशहूर हैं. मगर जिस तरह जन्मदिन पर पीएम मोदी से लेकर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रेम उमड़ा है सवाल ये है कि आखिर इस मुहब्बत की वजह क्या है? इस प्रश्न पर यूं तो जवाबों की लंबी फेहरिस्त हो सकती है मगर जो सबसे प्रबल कारण है उसके तार 19 के लोकसभा चुनाव और 17 के विधानसभा चुनाव से जुड़े हैं.

ध्यान रहे 2017 में जिस तरह का गतिरोध सपा में था उसने वोटिंग पैटर्न को प्रभावित किया और जिसका पूरा फायदा भाजपा ने उठाया और योगी आदित्यनाथ के हाथों में यूपी की कमान आई.

कैसे 2017 में सपा से मिले मौके का फायदा उठाया भाजपा ने

भले ही 2022 के चुनाव नजदीक हों लेकिन आज भी लोगों के जेहन में उस वक़्त की यादें ताजा हैं जब 2017 के विधानसभा चुनाव हो रहे थे. यदि हम उस वक़्त को याद करें तो आज भी हम कई दिलचस्प चीजों से दो चार होंगे. ध्यान रहे 2017 में सपा खेमे के हालात कहीं से भी अखिलेश यादव के पक्ष में नहीं थे. चाचा शिवपाल और अखिलेश यादव आमने सामने थे दोनों में तनातनी इस हद तक हो गयी थी कि शिवपाल को न केवल पार्टी से अलग होना पड़ा बल्कि अपना अलग दल बनाना पड़ा. उस दौर में जो बात सबसे मजेदार थी वो ये कि जिस समय सारा बवाल चल रहा था मुलायम सिंह चुप्पी साधे बैठे रहे खुद सोचिए क्या इसका फायदा भाजपा को नहीं मिला होगा?

अखिलेश - शिवपाल विवाद ने कार्यकर्ताओं को भी प्रभावित किया बाकी जैसी वोटिंग हुई और जिस तरह से सीटें आईं साफ हो गया कि सपा के वोट भी भाजपा में आए और उन्होंने सूबे में कमल के खिलने में निर्णायक भूमिका अदा की. इसके अलावा जिस तरह 2017 में अखिलेश ने आगे पीछे की परवाह न करते हुए कांग्रेस के साथ गंठबंधन किया और जैसे इसपर भी मुलायम ने पूरे मामले को नजरअंदाज किया तभी ये साफ हो गया था कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की वापसी नहीं होगी और भाजपा सरकार बनाएगी.

कुलमिलाकर 2017 में विधानसभा चुनावों के दौरान जैसा माहौल था तमाम उल्टे सीधे निर्णयों के बीच जैसे मुलायम चुपचाप मूकदर्शक बने बैठे रहे और जिस तरह उन्होंने अखिलेश की मूर्खताओं को सिरे से खारिज किया यूपी के चुनावी समीकरण बदले और ऐसी परिस्थितियां बनीं जो भाजपा के फेवर में रहीं.

इसके अलावा हमने बात 2019 के विधानसभा चुनावों की भी की थी और ये भी बताया था कि तब मुलायम सिंह ने इस बात की वकालत की थी कि नरेद्र मोदी को पुनः देश की कमान अपने हाथों में लेनी चाहिए और मुख्यमंत्री बनना चाहिए. ध्यान रहे ये बातें यूं ही नहीं थीं. न ही ये बातें मुलायम द्वारा दिये गए किसी इंटरव्यू की क्लिपिंग का हिस्सा थीं.

फरवरी 2019 में पूरा देश उस वक़्त हैरत में आ गया था जब लोकसभा में अपने भाषण के दौरान मुलायम सिंह यादव ने इस बात का जिक्र किया कि वो यही चाहते हैं कि नरेन्द्र मोदी ही देश के प्रधानमंत्री रहें. साथ ही तब मुलायम ने इस बात को भी कहा था कि उनकी प्रबल इच्छा यही है कि हाउस के सभी सदस्य पुनः चुने जाएं और भाजपा बहुमत से सरकार बनाए.

गौरतलब है कि अपने इस भाषण में मुलायम ने पीएम मोदी के लिए तारीफों का पिटारा खोल दिया था और ऐसा बहुत कुछ कह दिया था जिसने विपक्ष विशेषकर कांग्रेस और राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ा दी थीं. मुलायम ने कहा था की, 'कोई भी आपके बारे में कुछ भी गलत नहीं बोलता. कोई आपके खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं करता. आपको मेरी ओर से बधाई एवं शुभकामनाएं.

मेरी इच्छा है कि सदन के सभी सदस्य फिर से निर्वाचित हों और वापस आएं… हम सरकार नहीं बना पाएंगे, इसलिए मैं चाहता हूं कि आप फिर से पीएम बनें. आपने सबको साथ लिया है. इसके अलावा मुलायम ने पीएम मोदी की शान में कसीदे पढ़ते हुए ये भी कहा था कि जब भी मैं उनसे किसी भी काम के लिए मिला तो उन्होंने तुरंत कर दिया. प्रधानमंत्री ने सभी को खुश रखने की कोशिश की है.' 

मुलायम की इन तारीफों के बीच जो बात सबसे दिलचस्प थी वो ये कि तब पीएम मोदी ने भी यादव की टिप्पणियों को हाथ जोड़कर स्वीकार किया था.

बहरहाल भले ही राम मंदिर आंदोलन में कारसेवकों पर गोली चलवाने और अपनी मुस्लिम परास्त राजनीति के लिए मशहूर समाजवादी पार्टी के संरक्षक  मुलायम सिंह यादव किसी आम हिंदू को फूटी आंख न भाते हों और अक्सर ही आलोचनाओं का सामना करते हों. लेकिन जिस तरह भाजपा का मुलायम के प्रति 'मुलायम' रवैया है. भाजपा भी इस बात को जानती है कि ये मुलायम ही हैं जो 17 की तर्ज पर 22 में भी भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे और सूबे में लगातार दूसरी बार कमल के खिलने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे.

वहीं बात यूपी के मुखिया योगी आदित्यनाथ की हो. तो जैसे उन्होंने मुलायम को मुबारकबाद दी है और उस मुबारक बाद में राम का जिक्र किया है यूपी के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने मुलायम को बता दिया है कि आने वाले वक़्त में राम ही मुलायम का कल्याण करेंगे और उनकी तथा समाजवादी पार्टी की नैया को पार लगाएंगे. 

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लेखक

बिलाल एम जाफ़री बिलाल एम जाफ़री @bilal.jafri.7

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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