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Updated: 01 फरवरी, 2019 05:07 PM
मृगांक शेखर
मृगांक शेखर
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मोदी सरकार का आखिरी बजट भी पेश हो गया. ये आंतरिक बजट के तौर पर पेश किया गया, जिसमें पीयूष गोयल ने आम बजट के पूरे भाव उंड़ेल डाले, कहा भी - 'ये सिर्फ अंतरिम बजट नहीं, देश के विकास यात्रा का माध्यम है.'

बजट के जरिये मोदी सरकार ने नाराज किसानों और कर्मचारियों को मनाने, बड़े वोट बैंक मिडिल क्लास और गरीबों को लुभाने के साथ ही हर तबके में राष्ट्रवाद का जोश भरने की भरपूर कोशिश की है.

बात बजट की थी, इसलिए सर्जिकल स्ट्राइक का सीधे सीधे जिक्र ठीक नहीं लगा होगा. शायद इसलिए भी क्योंकि राष्ट्रपति के अभिभाषण में उसे शामिल किया जा चुका था. लेकिन फिल्म के बहाने 'उरी' का जिक्र जम कर हुआ - और उसके एक डायलॉग के जरिये 'जोश' का लेवल जानने की कोशिश भी हुई.

'हाउ इज द जोश?'

अरुण जेटली को शुभकामनाएं देने के बाद पीयूष गोयल ने बजट भाषण पढ़ना शुरू किया. कुछ ही देर में माहौल ऐसा हुआ कि किसी कवि सम्मेलन या मुशायरे जैसा फील गुड होने लगा. बात बात पर सत्ता पक्ष के सांसद 'वाह-वाह' किये जा रहे थे. वैसे पीयूष गोयल ने आखिर में अपने हिसाब से वीर रस की एक कविता पढ़ी भी - 'एक पांव रखता हूं, हजार राहें फूट पड़ती हैं.'

पीयूष गोयल ने तब भी खूब वाहवाही लूटी जब बोले, 'सरकार ने कमरतोड़ महंगाई की कमर ही तोड़ डाली है' - और जब टैक्स में छूट की घोषणा शुरू हुई तब तक तो 'वाह-वाह' सीधे 'मोदी-मोदी' में ही तब्दील हो चुका था.

बहरहाल, पीयूष गोयल के अंतरिम बजट में वे सारे पौष्टिक तत्व मौजूद नजर आ रहे हैं, जो सत्ता में वापसी को आतुर किसी भी राजनीतिक दल के मैनिफेस्टो में होने चाहिये. कुछ अलग तरीके से समझें तो लगता है जैसे 2019 के लिए बीजेपी का मैनिफेस्टो ही लीक होकर सबके सामने आ चुका है. ये था तो अंतरिम बजट ही, लेकिन चलते चलते पीयूष गोयल ने अगले दस साल के लिए एक विजन डॉक्युमेंट भी पेश कर दिया जो 2019 ही नहीं 2024 में भी बीजेपी सरकार की वापसी का इरादा दर्शाता है.

पीयूष गोयल का पूरा भाषण भी जोश से सराबोर था - 'देश बदल रहा है. देशवासियों के जोश से विकास जनांदोलन बन गया है. हमने नये भारत के लिए इतने सशक्त कदम उठाये हैं.'

वाह-वाह सिर्फ बीजेपी सांसद ही नहीं कर रहे थे, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर रहे थे. प्रधानमंत्री के मुंह से वाह-वाह सुनकर जोश का लेवल इस हद तक ऊपर चढ़ा कि बीजेपी सांसद विपक्षी दलों से पूछ बैठे - 'हाउ इज द जोश?'

narendra modiवाह वाह क्या बात है?

तभी ये भी ऐलान हुआ कि रक्षा बढ़ा कर 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा कर दिया गया है - और हाई रिस्क वाले इलाकों में तैनात सैनिकों के भत्ते भी बढ़ा दिये गये हैं. जय जवान. फिर जय किसान की बारी आ चुकी थी.

नाराज किसानों के लिए

मोदी सरकार की किसानों पर मेहरबानी से साफ है कि बीजेपी में किसानों की नाराजगी से कितनी दहशत है. तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की डायरेक्ट कैश ट्रांसफर योजना की तर्ज पर मोदी सरकार ने किसानों के लिए आर्थिक मदद का ऐलान किया है. साथ ही सभी किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने की भी घोषणा की गयी है.

सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना शुरू की है जिसके तहत छोटे किसानों को हर साल 6 हजार रुपये दिये जाने हैं. इस पैसे का पूरा इंतजाम सरकार करेगी जिस पर कुल 75 हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा.

सरकार का कहना है कि इस स्कीम से देश के 12 हजार करोड़ किसान परिवारों को फायदा मिलेगा. दो-दो हजार रुपये करके ये रकम तीन किस्तों में दी जाएगी.

ध्यान देने वाली बात ये है कि इस स्कीम को 1 दिसंबर, 2018 से ही लागू किया जा रहा है और पहली किस्त जल्द ही पात्र किसानों के खाते में पहुंच जाएगी.

जब प्रभारी वित्त मंत्री पीयूष गोयल ये घोषणा कर रहे थे तो एनडीए के सासंद लगातार जोर जोर से नारे लगा रहे थे - 'जय किसान-जय किसान'.

जय गौमाता की

मोदी सरकार के अंतरिम बजट में गायों पर भी विशेष कृपा बरसी है. वैसे तो गौरक्षकों के उत्पात के चलते गौ-विमर्श पूरे देश में चर्चित रहा. मध्य प्रदेश के साथ साथ दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने भी गायों में विशेष दिलचस्पी दिखायी है. राजस्थान में तो पूरा विभाग ही है, यूपी सरकार भी पूरे सूबे में गौशाले बनवा रही है. गौशाले जब बनेंगे तब की बात और है फिलहाल तो हालत ये है कि लोग गायों को सरकारी इमारतों में बंद कर दे रहे हैं और पुलिस की ड्यूटी में एक और इजाफा हो गया है.

पीयूष गोयल ने भी बजट भाषण में कहा, 'सरकार कामधेनु योजना करेगी. गौमाता के सम्मान में और गौमाता के लिए ये सरकार कभी पीछे नहीं हटेगी. जो जरूरत होगी, वो काम करेगी.'

कामधेनु योजना पर अमल के लिए राष्ट्रीय कामधेनु आयोग बनेगा और योजना पर 750 करोड़ रुपये खर्च होंगे. बीजेपी को हिंदूत्व के एजेंडे में गायों के जरिये खासी मदद मिलती है - और योगी आदित्यनाथ तो इसके ब्रांड एंबेसडर ही हैं - गूगल कीजिए और गायों से घिरी उनकी तस्वीरें बोल उठेंगी.

जय जय कामगार भी

2014 के चुनाव प्रचार में भी नरेंद्र मोदी और बीजेपी नेता मनरेगा पर ताने मानते रहे. प्रधानमंत्री बनने के बाद भी मोदी ने एक बार समझाया था कि सरकारों ने काम किया होता तो मशीनों से काम हो जाता और मजदूर ऐसे काम नहीं कर रहे होते. बाद में यूपीए सरकार का वही मनरेगा मोदी और उनके साथियों को भी इतना भाने लगा कि अब तो पहले से भी ज्यादा जोर दिया जाने लगा है.

piyush goyalएक पिटारा चुनाव क्षेत्र के लिए भी...

गरीबों और मजदूरों की भी सरकार बनाने और बिगाड़ने में बड़ी अहम भूमिका रही है. जनधन योजना के बाद, प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना के पीछे भी वही मकसद है - और घरेलू कामगार पेंशन योजना में भी. सरकार ने मजदूरों की न्यूनतम मासिक पेंशन 1,000 रुपये तक कर दी है और 100 रुपये प्रति माह के अंशदान पर 60 साल की आयु के बाद हर महीने 3000 रुपये की पेंशन भी मिलेगी.

बजट भाषण में पीयूष गोयल ने कहा, 'पहले देश का गरीब सोचता था कि वो अपनी कमाई का खर्च रोजमर्रा की जरूरतों पर करे या अपने परिवार से इलाज पर? लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम लॉन्च की जिसका लाभ देश के 50 करोड़ गरीब परिवारों को मिलेगा.'

पश्चिम बंगाल और दिल्ली जैसे राज्यों में भले ही आयुष्मान योजना अब तक शुरू न हो पायी हो, लेकिन पीयूष गोयल ने कहा कि ये बताने में खुशी हो रही है कि इस स्कीम के तहत 10 लाख लोगों का इलाज हो चुका है जिससे गरीबों का कुल 3000 करोड़ रुपया इलाज पर खर्च होने से बचा है.

जोर से बोलो जय मिडिल क्लास की

नौकरीपेशा और मिडिल क्लास हमेशा ही किसी भी राजनीतिक दल के लिए बड़ा वोट बैंक रहा है. कभी कांग्रेस इस वोट बैंक की दावेदार रही, लेकिन बाद में बीजेपी ने हथिया लिया.

माना जाता है कि मिडिल क्लास के लिए बड़े सपने और बचत बहुत महत्वपूर्ण होते हैं. हाल ही में नितिन गडकरी ने चेताया भी था कि जो लोग सपने दिखा कर उन्हें पूरे नहीं करते उनकी पिटाई भी होती है. मिडिल क्लास के लिए टैक्स में छूट बड़ी राहत होती है और मोदी सरकार ने बजट में इसे अच्छे से पिरोया भी है.

नौकरीपेशा लोगों को सरकार की ओर से जो तोहफा दिया गया है वो है कर्मचारियों की ग्रेच्युटी लिमिट को डबल कर दिया जाना. पहले ये सीमा 10 लाख रुपये की थी जो अब 20 लाख रुपये हो गई है.

रही बात टैक्स सीमा में छूट की तो उसे ढाई लाख से बढ़ा कर सीधे पांच लाख रुपये कर दिया गया है. गौर करने वाली बात ये है कि 2014 ये सीमा दो लाख से ढाई लाख बढ़ाई गयी थी, लेकिन उसके बाद इसे जस की तस रहने दिया गया - और अब जब कि चुनावी साल है इसे डबल कर दिया गया है. पीयूष गोयल पूरे भाषण के दौरान वाहवाही और जयकारे तो गूंजते ही रहे जैसे ही आयकर में छूट की घोषणा हुई संसद का माहौल किसी चुनावी रैली जैसा हो गया. सरकार की तारीफ में शोर की पिच इतनी ऊंची हो चली कि पीयूष गोयल को भाषण रोक कर कुछ देर खामोश होना पड़ा.

पीयूष गोयल ने मध्य वर्ग को खुश करने की कोशिश में पूरा जोर लगा दिया और शुक्रिया अदा करते हुए बोले कि मिडिल क्लास को देश की तरक्की में बहुत बड़ा भागीदार है.

विजन डॉक्युमेंट-2030

बजट से पहले जब कैबिनेट बैठक के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे तो कैमरे उन पर फोकस होकर ठहर से गये. वजह रही उनकी हरे रंग की जैकेट. सिर्फ मोदी ही नहीं कृषि मंत्री राधामोहन सिंह भी हरी जैकेट ही पहुंचे हुए थे. मोदी के कीमती सूट की तरह कैमरे को जूम करके अंकित नाम देखने का ये मौका तो नहीं रहा, लेकिन किसी न किसी हरियाली के संकेत जरूर देखे गये - राधामोहन सिंह ने कहा भी कि मोदी सरकार का अब तक का पांचों बजट कृषि और किसानों को समर्पित रहा है और इस बार भी ऐसा ही होगा. बजट में किसानों पर मेहरबानी ने सही साबित भी कर दिया.

बजट तो तकनीकी तौर पर जरूर अंतरिम रहा लेकिन पीयूष गोयल ने उसे न सिर्फ 2019 के लिए चुनावी मैनिफेस्टो की तरह पेश किया ही, लगे हाथ अगले 10 साल का बीजेपी का विजन डॉक्युमेंट भी पेश कर दिया. बात बात पर जताने की कोशिश यही रही कि 2019 ही नहीं, 2024 में जब बीजेपी की सत्ता में वापसी होगी - और इस क्रम में 2030 तक भारत कैसा होगा, ये झलक भी दिखाने की कोशिश की.

बाकी चीजें अपनी जगह हैं, पर बात पते की ये है कि किसानों को डायरेक्ट बेनिफिट स्कीम का लाभ तो मिल जाएगा - लेकिन आयकर छूट तो अगली सरकार ही लागू करेगी. इसके लिए पूर्ण बजट जुलाई में पेश होगा. ऐसी ही कई चीजें हैं जिसका जिक्र भर ही जोश से भरपूर है - लेकिन अमलीजामा तो उसे अगली सरकार ही पहनाएगी.

लोगों के लिए मोदी सरकार का मैसेज ये है कि वोट दोगे तो बजट में बताये गये सारे फायदे मिलेंगे - वरना, सरकार किसी और ने बनायी तो वो इतना बड़ा बोझ भला क्यों उठाएगा. मुद्दे की बात ये है कि ये कितनों को समझ आता है और कौन किसे किस हद तक समझा पाता है.

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लेखक

मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkieshindi

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

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