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Updated: 11 मई, 2019 06:00 PM
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12 मई को छठे दौर के मतदान के बाद बस आखिरी चरण बच रहा है. छठे चरण में 7 राज्यों की 59 सीटों पर वोटिंग हो रही है, जिनमें दिल्ली की सभी सात सीटों लोग वोट डालेंगे. 2014 में इन 59 सीटों में 44 पर बीजेपी, 8 पर तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस को 2 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि 5 सीटें अन्य के खाते में हैं.

छठे दौर में जो नेता जनता की अदालत के कठघरें में खड़े हैं, वे हैं - दिग्विजय सिंह, साध्वी प्रज्ञा, अखिलेश यादव, ज्योतिरादित्य सिंधिया, राधा मोहन सिंह और गौतम गंभीर.

1. भोपाल, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश की भोपाल सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प है. भोपाल के चुनावी मैदान में मुकाबला कांग्रेस के सीनियर नेता दिग्विजय सिंह और मालेगांव धमाकों की आरोपी बीजेपी उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के बीच है. चुनाव प्रचार के दौरान 26/11 के मुंबई हमले में शहीद हेमंत करकरे पर साध्वी प्रज्ञा का बयान और दिग्विजय सिंह के काफिले में साधु-संत और भगवा गमछा लिये पुलिसवाले खासे चर्चित रहे.

2. गुना, मध्य प्रदेश

गुना संसदीय सीट को सिंधिया परिवार का गढ़ माना जाता है. 2002 से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया एक बार फिर मैदान में हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ बीजेपी ने बीजेपी ने डॉ. केपी यादव को टिकट दिया है. केपी यादव को सिंधिया के मुकाबले कमजोर कैंडिडेट माना जा रहा है.

कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया चुनाव तो मध्य प्रदेश से लड़ रहे हैं, लेकिन उनकी ज्यादा सक्रियता और जिम्मेदारी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सिंधिया को अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ मिल कर यूपी में कांग्रेस को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी है.

3. आजमगढ़, उत्तर प्रदेश

यूपी की राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले हर किसी की निगाह आजमगढ़ के चुनाव पर टिकी है. मुलायम सिंह यादव की संसदीय सीट से समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव चुनाव लड़ रहे हैं. मुलायम सिंह इस बार मैनपुरी शिफ्ट हो गये हैं.

अखिलेश यादव के खिलाफ बीजेपी ने भोजपुरी स्टार दिनेशलाल यादव निरहुआ को टिकट दिया है. मुकाबला कड़ा इसलिए माना जा रहा है क्योंकि अखिलेश यादव गठबंधन के उम्मीदवार हैं और अपने यादव वोट बैंक के साथ साथ उन्हें बीएसपी के वोटों का भी भरोसा है. कांग्रेस ने कोई उम्मीदवार नहीं खड़ा किया है, इसलिए मुस्लिम वोट भी गठबंधन के ही पक्ष में रह सकते हैं. हालांकि, निरहुआ के प्रचार के लिए आजमगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की. मोदी ने कहा कि 2014 से पहले आजमगढ़ का नाम कांग्रेस सरकार ने आतंकवाद से जोड़ दिया था लेकिन उनके सत्ता संभालने के बाद से ये बंद हो गया.

nirahua, pawan singh, amrapali dubeyनिरहुआ के लिए वोट मांगने वालों में भोजपुरी गायक पवन सिंह और आम्रपाली दूबे भी आजमगढ़ पहुंची थीं

मोदी के नाम और राष्ट्रवाद को मुद्दा बना कर चुनाव लड़ रहे निरहुआ के प्रशंसकों की भी तादाद भारी है. निरहुआ को समाजवादी पार्टी की सरकार में यूपी के यश भारती सम्मान से नवाजा गया था.

4. सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश

सुल्तानपुर से इस बार बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को टिकट दिया है. 2014 में सुल्तानपुर से मेनका के बेटे वरुण गांधी चुनाव जीते थे, लेकिन इस बार बीजेपी आलाकमान ने उन्हें उनकी मां के चुनाव क्षेत्र पीलीभीत भेज दिया है.

चर्चा रही कि अदला बदली का ये सुझाव मेनका गांधी का ही रहा क्योंकि वरुण गांधी से ज्यादातर विधायक नाराज बताये जा रहे थे. ऐसे में ये सीट निकालनी वरुण के लिए मुश्किल हो सकती थी. वरुण गांधी को लेकर बीजेपी नेतृत्व गांधी परिवार के प्रति उनके सॉफ्ट स्टैंड से भी खफा था, हालांकि, टिकट पाते ही इस बार वरुण गांधी ने जोरदार हमला बोल कर सारी कसर पूरी भी कर दी.

5. पूर्वी दिल्ली

पूर्वी दिल्ली संसदीय सीट हाल फिलहाल काफी चर्चा में रही है. आप उम्मीदवार आतिशी मार्लेना और क्रिकेटर रहे गौतम गंभीर के बीच भयंकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला है. यहां तक कि दोनों एक दूसरे को कानूनी नोटिस भेज कर माफी मांगने की मांग कर रहे हैं.

आतिशी मार्लेना का आरोप है कि बीजेपी उम्मीदवार गौतम गंभीर ने उनके खिलाफ आपत्तिजनक पर्चे बंटवाये. गौतम गंभीर ने चुनौती दी है कि अगर आप नेता ने आरोप साबित कर दिये तो चुनाव से हट जाएंगे. बाद में तो गौतम गंभीर ने यहां तक कह दिया कि अगर आरोप सही पाये गये तो सरेआम फांसी लगा लेंगे.

6. उत्तर पूर्वी दिल्ली

पूर्वी दिल्ली सीट पर बीजेपी और कांग्रेस दोनों के प्रदेश प्रमुख आमने सामने हैं. बीजेपी ने दिल्ली प्रमुख मनोज तिवारी को फिर से उम्मीदवार बनाया है तो कांग्रेस ने 15 साल दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित को प्रत्याशी बनाया है.

2013 का विधानसभा चुनाव आप नेता अरविंद केजरीवाल से हारने के बाद शीला दीक्षित नेपथ्य में चली गयी थीं. यूपी चुनाव के दौरान कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी से गठबंधन होने से पहले कुछ दिन के लिए मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया जरूर था. आम चुनाव से पहले कांग्रेस ने अजय माकन का इस्तीफा मंजूर करते हुए कमान शीला दीक्षित को सौंप दी थी.

दिल्ली में आप और कांग्रेस के बीच चुनावी गठबंधन की खूब कोशिशें हुई थीं, लेकिन समझा जाता है कि शीला दीक्षित के ही अड़े होने के कारण ये मुमकिन नहीं हो पाया.

7. उत्तर पश्चिम दिल्ली

आम आदमी पार्टी ने इस सीट से गुग्गन सिंह को काफी पहले ही उम्मीदवार घोषित कर दिया और तभी से उन्होंने चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया था. बीजेपी ने गुग्गन सिंह के खिलाफ पंजाबी सिंगर हंसराज हंस को उम्मीदवार बनाया है.

आम आदमी पार्टी ने हंसराज हंस को घेरने की भी कोशिश की, लेकिन धमकी मिलने पर शांत भी हो गयी. आप का आरोप था कि हंसराज हंस ने इस्लाम कबूल कर लिया है, इसलिए वो सुरक्षित सीट से चुनाव नहीं लड़ सकते. 2014 में बीजेपी ने यहां दलित नेता उदित राज को टिकट दिया था, लेकिन विवादों में आने के कारण बीजेपी ने उदित राज का टिकट काट दिया. नाराज होकर उदित राज कांग्रेस में चले गये, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी क्योंकि नामांकन की तारीख खत्म हो चुकी थी.

हंसराज हंस ने 2009 में राजनीतिक पारी शिरोमणि अकाली दल से शुरू की और 2014 में कांग्रेस में पहुंच गये. 2016 में हंसराज हंस बीजेपी में शामिल हो गये और एमसीडी चुनावों बीजेपी के लिए काफी फायदेमंद साबित हुए - उसी के इनाम में उन्हें टिकट मिला है.

8. पू्र्वी चंपारण, बिहार

केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह एक बार फिर पूर्वी चंपारण से चुनाव मैदान में हैं. राधामोहन सिंह के खिलाफ महागठबंधन की ओर से आकाश सिंह चुनाव लड़ रहे हैं. आकाश सिंह को उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी RSLP ने टिकट दिया है.

आकाश सिंह के पिता अखिलेश प्रसाद सिंह कांग्रेस के राज्य सभा सांसद हैं. अखिलेश प्रसाद सिंह 2004 में आरजेडी की ओर से यहां से सांसद रह चुके हैं. पांच बार के सांसद राधामोहन सिंह अपना आखिरी चुनाव बताकर वोट मांग रहे हैं.

9. धनबाद, झारखंड

बीजेपी के बागी नेताओं में शुमार रहे कीर्ति आजाद ने कांग्रेस का हाथ तो थाम लिया लेकिन दरभंगा से टिकट नहीं मिल पाया. आरजेडी ने दरभंगा सीट अपने पास ही रखी और अब्दुल बारी सिद्दीकी को टिकट दे दिया. हालांकि, तेजस्वी यादव आरजेडी में भी बगावत नहीं रोक सके. आरजेडी नेता एमएए फातमी निर्दलीय चुनाव मैदान में कूद पड़े.

कांग्रेस ने मजबूर होकर कीर्ति आजाद को झारखंड भेज दिया - और वो धनबाद सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. कीर्ति आजाद के पिता कांग्रेस नेता भगवत झा आजाद बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं.

10. घाटल, पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल की घाटल सीट बीजेपी उम्मीदवार भारती घोष के कारण काफी चर्चा में रही है. भारती घोष के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने बांग्ला फिल्मों के सुपर स्टार दीपक अधिकारी उर्फ देव को ही दोबारा टिकट दिया है. देव ने 2014 में सीपीआई उम्मीदवार संतोष राणा को करीब ढाई लाख वोटों से शिकस्त दी थी. सीपीआई ने इस बार तपन कुमार गांगुली को टिकट दिया है.

पूर्व आईपीएस अधिकारी भारती घोष को कभी ममता बनर्जी का करीबी माना जाता था, लेकिन वो बीजेपी में शामिल हो गयीं. भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते भारती घोष विवादों में रही हैं और हाल ही में पश्चिम बंगाल पुलिस ने उनकी कार से 1.13 लाख रुपये नकद बरामद किये थे. तृणमूल कांग्रेस की शिकायत पर पुलिस ने भारती घोष की तलाशी ली और रकम जब्द कर ली.

पुलिस कार्रवाई को लेकर भारती घोष का कहना था, 'मैं बैंक से अपने चुनावी फंड के पैसे निकाल कर लाई थी. वो कैसे उस रकम को जब्त कर सकते हैं, जो मेरा है.' कुछ दिन पहले भारती घोष के एक बयान पर भी बवाल हुआ था. भारती घोष ने टीएमसी कार्यकर्ताओं को धमकाया था कि वो यूपी से लोगों को बुलाकर उन्हें 'कुत्ते की मौत' मारेंगी. भारती घोष के बयान पर ममता बनर्जी ने उन्हें शालीनता की हदें न पार करने के लिए चेताया था.

छठे दौर में दिल्ली की सभी सात सीटों के साथ ही यूपी की 14, हरियाणा की 10 के अलावा बिहार, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल की आठ-आठ सीटों पर वोटिंग होने जा रही है. इस बार 979 उम्मीदवारों की किस्मत पर करीब 10 करोड़ 16 लाख वोटर अपना फैसला सुनाने वाले हैं जिसके लिए 1.13 लाख मतदान केन्द्र बनवाए गये हैं. इसके बाद सिर्फ 59 सीटों के लिए मतदान बाकी रह जाएंगे जिन पर 19 मई को वोटिंग होनी है. आम चुनाव के नतीजे 23 मई को आएंगे.

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