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Updated: 01 जुलाई, 2018 02:38 PM
बिजय कुमार
बिजय कुमार
  @bijaykumar80
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कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर अपनी आवाज़ लोगों के बीच पहुंचाने की रणनीति को नया रूप दिया है. देश के सबसे पुराने राजनीतिक दल कांग्रेस ने मीडिया में बयान जारी करने वालों और टीवी चर्चाओं में शामिल होने वाले पैनलिस्ट के चयन के लिए उत्तर प्रदेश की राजधानी में 70 के करीब भावी प्रवक्ताओं की परीक्षा ली. इस परीक्षा में पार्टी के वो लोग भी शामिल हुए जो कई वर्ष से प्रवक्ता के रूप में कार्य कर रहे हैं, ये सभी लोग उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय पर परीक्षा में बैठे थे, जो प्रदेश इकाई में प्रवक्ताओं के पद के लिए चुने जाएंगे.

पहले तो इन लोगों की लिखित परीक्षा हुई, फिर उसको आधार बनाकर इनका इंटरव्यू लिया गया. उम्मीदवारों को 14 सवालों वाला एक प्रश्न-पत्र दिया गया था, जिसमें प्रदेश के जिलों, मंडलों और ब्लॉक की जानकारी मांगी गयी थी. साथ ही प्रदेश की लोकसभा और विधान सभा की सीटों की संख्या के साथ ही इससे जुड़े और सवाल भी थे. यही नहीं प्रदेश और केंद्र सरकार की विफलता के कारण और मनमोहन सरकार की उपलब्धियों के बारे में भी पूछा गया था. इन सब में सबसे कठिन प्रश्नों में आज के अख़बारों की तीन बड़ी ख़बरें और पार्टी के विचारों की एक प्रेस रिलीज़ जारी करना था.

कांग्रेस, भाजपा, राजनीति, उत्तर प्रदेश

ख़बरों के अनुसार ऐसा भी देखने को मिला कि पुराने प्रवक्ता जो कांग्रेस पार्टी के सिद्धांतों से तो वाकिफ़ थे, लेकिन इन सवालों कि फेहरिश्त में उलझते दिखे. लेकिन युवाओं में ऐसा नहीं देखने को मिला जो गूगल कि मदद से आंकड़ों तक पहुंच जा रहे थे. ये भी देखा गया कि कुछ लोग एक दूसरे की मदद से सवालों के जवाब लिख रहे थे तो कुछ ने बीच में ही परीक्षा छोड़ दी. लिखित परीक्षा के बाद राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने प्रदेश प्रवक्ता की दौड़ में शामिल कांग्रेसियों का इंटरव्यू लिया. बताया जा रहा है कि अगले सप्ताह तक नतीजे घोषित किए जा सकते हैं. प्रियंका चतुर्वेदी ने बताया कि कर्नाटक, राजस्थान और मध्य प्रदेश में इस तरह की परीक्षा ली गई है. उत्तर प्रदेश में ऐसा पहली बार हो रहा कि प्रवक्ताओं की परीक्षा ली जा रही हो. बता दें कि करीब 10 दिन पहले प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने मीडिया विभाग समेत दूसरे विभागों को भंग कर दिया था. इस परीक्षा में पास उम्मीदवारों का ही चयन हो सकेगा.

ऐसा माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस पार्टी ने अपनी स्थिति को दुरुस्त करने के लिए ये कवायद शुरू की है. तभी तो मीडिया विभाग में अब सिफारिश से पद नहीं मिलेंगे, बल्कि सामान्य ज्ञान, सरकार और पार्टी के बारे में पर्याप्त जानकारी रखने वालों को ही प्रवक्ता व पैनलिस्ट बनाया जाएगा, जिससे पार्टी विरोधियों के हमलों का भरपूर जवाब दे सके, साथ ही अपने पक्ष को मजबूती से रख सके. ऐसा नहीं है कि पार्टी ने इस तरह का काम पहली बार किया हो, जिसे लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. इससे पहले भी पार्टी इस तरह के क़दमों के लिए चर्चा में रह चुकी है.

दिसंबर 2016 में भी ऐसी ख़बरें आयी थीं कि कांग्रेस नेतृत्व पार्टी कार्यकर्ताओं को वफादारी कि शपथ लेने के लिए मजबूर कर रहा है. इंदिरा गांधी की जयंती मनाने के लिए बुलायी जाने वाली उत्तर प्रदेश की बूथ समिति की बैठकों में पार्टी के सदस्यों को शपथ दिलाई जाती है कि चाहे जो भी उनके निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार घोषित किया जाये वो पार्टी के लिए निस्संदेह काम करेंगे. इन बैठकों में एआईसीसी की ओर से आम तौर पर एक पर्यवेक्षक शपथ दिलाने के लिए मौजूद रहता था. कुछ ऐसी ही ख़बरें दूसरे प्रदेशों से भी आयी थीं.

कुछ ऐसा ही साल 2016 की शुरुआत में बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद भी देखने को मिला था जब कांग्रेस के सभी नए निर्वाचित विधायकों को पार्टी के प्रति निष्ठा शपथ ग्रहण करने वाले हलफनामे पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया था.

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लेखक

बिजय कुमार बिजय कुमार @bijaykumar80

लेखक आजतक में प्रोड्यूसर हैं.

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