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Updated: 06 अप्रिल, 2019 04:24 PM
श्रुति दीक्षित
श्रुति दीक्षित
  @shruti.dixit.31
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पाकिस्तान एक ऐसा देश है जहां पर मंत्री, धर्म गुरू, कट्टपपंथी और पाकिस्तानी सेना सभी खुश हैं. यदि कोई बदहाल है तो वो है वहां की आम जनता. पाकिस्तान में जहां अभी तक जमींदारी सिस्टम चलता है वहां पाकिस्तानी सेना के पास कितनी जमीन होगी इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है. ताज़ा मामला पाकिस्तान के पूर्व सेना अध्यक्ष का है. 2016 में पाकिस्तानी सेना से रिटायर हो चुके राहील शरीफ को लाहौर में करीब 90 एकड़ जमीन आवंटित हुई है.

पाकिस्तान सरकार द्वारा दी गई इस जमीन की कीमत 1.35 बिलियन पाकिस्तान रुपए (65 करोड़ भारतीय रुपए) है. इसमें से 50 एकड़ जमीन विशेषाधिकार से दी गई है क्योंकि वो 4 स्टार आर्मी जनरल रहे हैं. और 40 एकड़ इसलिए क्योंकि वो आर्मी चीफ रहे हैं. पाकिस्तान सरकार द्वारा दी गई इस जमीन की कीमत 1.35 बिलियन पाकिस्तान रुपए (65 करोड़ भारतीय रुपए) है. रिटायरमेंट के बाद 2017 से राहील शरीफ को पाकिस्तानी सरकार ने 39 मुस्लिम देशों के गठबंधन से बनी आतंकवादी रोधी इस्लामिक सेना के कमांडर इन चीफ बनने की अनुमति दे दी थी. इसका हेडक्वार्टर सऊदी अरब में है. 

अगर राहील शरीफ को इतनी जमीन मिली है तो सोच लीजिए कि आने वाले समय में जनरल बजवा को भी इसी तरह की जमीन मिलने वाली है.

खेती के लिए बहुत अच्छी जमीन और कमर्शियल जमीन आर्मी अफसरों को देने की पूरी जिम्मेदारी General Headquarters (GHQ) की होती है. सिर्फ पूर्व आर्मी चीफ या जनरल को नहीं जिनकी रैंक मेजर जनरल, लेफ्टिनेंट जनरल और अन्य आर्मी अफसरों को देते हैं जिन्होंने कुछ सराहनीय काम किया होता है.

पूरे पाकिस्तान में सभी बॉर्डर एरिया कमेटी के पास ये रिकॉर्ड है कि कहां-कहां और किस सेना अधिकारी को जमीन दी गई है. GHQ में फैसला लेने के बाद बॉर्डर एरिया कमेटी के चेयरमैन को इसकी जानकारी दे दी जाती है. जो जमीन पूर्व जनरल राहील को दी गई है वो बॉर्डर एरिया कमेटी लाहौर द्वारा आवंटित की गई थी.

पाकिस्तानी सेना दुनिया की एकलौती ऐसी सेना है जो देश के नागरिकों से भी ज्यादा अमीर है. पाकिस्तान जहां आज भी जमींदारी सिस्टम चलता है वहां पाकिस्तानी सेना के पास इतनी जमीन है कि वो अपना खुद का छोटा-मोटा देश बना सकती है.

50 से ज्यादा कंपनियां और 12% जमीन की मालिक है पाकिस्तानी सेना-

अगर कोई सोच रहा है कि पाकिस्तानी सेना आखिर कितनी अमीर है तो इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सेना के नाम पर 50 से ज्यादा कंपनियां चलती हैं. ये खबर खुद पाकिस्तानी वेबसाइट DAWN द्वारा प्रकाशित की गई थी. पाकिस्तानी संसद में इस बारे में बात भी हुई थी. 50 बड़े बिजनेस पाकिस्तानी सेना के नाम हैं. इनमें से कई तो पाकिस्तान के सबसे बड़े बिजनेस हैं. इनमें से अधिकतर चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम पर चलते हैं जो पाकिस्तानी सीनियर आर्मी अफसरों द्वारा चलाए जाते हैं.

उदाहरण के तौर पर पाकिस्तानी Fauji Foundation जो पाकिस्तान के सबसे विविद व्यवसायों में से एक है वो 25 कंपनियां चलाती है. इनमें से 4 पूरी तरह से फौजी फाउंडेशन के अंतरगत हैं और 21 सहायक कंपनियां हैं. इस फाउंडेशन के हेड पूर्व फौजी ही हैं. साथ ही मौजूदा पाकिस्तानी आर्मी के कई सदस्य भी हैं.

पाकिस्तानी आर्मी कितनी अमीर है इसका अंदाजा तो 2007 में आई किताब Inc: Inside Pakistan’s Military Economy से ही लगाया जा सकता है. पाकिस्तानी मिलिट्री साइंटिस्ट डॉक्टर आइशा सिद्दिका ने पाकिस्तानी सेना को बेनकाब किया था जहां उन्होंने अपनी रिसर्च कर बताया था कि पाकिस्तानी सेना का नेट वर्थ 10 बिलियन पाउंड (9,072 करोड़ भारतीय रुपए) है. ये पाकिस्तानी में आने वाली FDI के मुकाबले 4 गुना ज्यादा पैसा है. ध्यान रहे ये उस देश की बात है जिसे अपने रोजमर्रा के काम के लिए भी IMF के आगे हाथ फैलाने पड़ते हैं और जहां के प्रधानमंत्री को अपनी गाड़ियां बेचनी पड़ी हैं. आइशा ने अपनी किताब में एक किस्से का जिक्र भी किया था जहां पंजाब प्रांत में सेना को दी गई जमीन में गोल्फ कोर्स और ड्राइविंग रेंज बनवा दी गई थी. और फौजी फाउंडेशन ने एक शुगर मिल को बेहद सस्ते दामों में एक पूर्व आर्मी अफसर को ही बेच दिया था.

उनकी रिसर्च में सामने आया था कि पाकिस्तान की 12 प्रतिशत जमीन और सिंध-पंजाब की सबसे ज्यादा उपजाऊ जमीन सेना के कब्जे में है. इसमें से दो तिहाई तो सिर्फ पूर्व और मौजूदा सेना के अधिकारियों को तोहफे में दी गई है. पाकिस्तान के टॉप 100 मिलिट्री अधिकारियों की कुल संपत्ती £3.5 बिलियन (271 करोड़ रुपए) है.

पाकिस्तान, जमीनदार, राहील शरीफ, पाकिस्तानी सेनापाकिस्तानी सेना के लगभग सभी बड़े अधिकारियों के पास रुतबा और पैसा दोनों ही है.

इतना ही नहीं आर्मी वेलफेयर ट्रस्ट जिसो 1971 में बनाया गया था वो देश के सबसे बड़े देनदार बैंक Askari Commercial Bank को चलाती है, इसी के साथ इस ट्रस्ट के पास एक एयरलाइन बिजनेस भी है. एक ट्रैवल एजेंसी यहां तक की कई फार्म भी हैं.

पाकिस्तानी जमींदारी की सच्चाई-

पाकिस्तान में जमींदारी सिस्टम अभी भी लागू है. जहां भारत में आज़ादी के बाद ये खत्म हो गया था वहीं ये अभी भी पाकिस्तानी गलियों में बसा हुआ है. पाकिस्तान के संसद में बैठने वाले मंत्रियों से लेकर सेना के अधिकारियों तक सभी के पास जमीने हैं और जहां ये जमीनें उन्हें दी जाती हैं वहीं उसपर काम करने और रहने वालों पर हुकुम चलाने का अधिकार भी दे दिया जाता है. जमींदार कैसे जमीन का गलत फायदा उठाता है और वहां रहने वाले लोगों की जिंदगी कैसे बर्बाद करता है ये तो शायद आप समझ ही गए होंगे. अक्सर इन जमींदारों को सबसे ताकतवर समझा जाता है और उनके अंतरगत आने वाली जमीनों पर रहने वाले लोग उन्हें भगवान की तरह देखने लगते हैं. और यहीं से शुरू होता है शोषण का चक्र.

ब्रितानी साम्राज्य में पनपा जमींदारी सिस्टम असल में गरीबों का शोषण करने का एक तरीका बन गया था जो भारत में तो खत्म हो गया, लेकिन पाकिस्तान में अभी भी तटस्थ है. क्योंकि वहां पावर स्ट्रक्चर ऐसा नहीं है कि आम लोगों को ज्यादा अवसर नहीं मिलते और ताकतवर लोग और भी ज्यादा ताकतवर होते जाते हैं.

पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है यहां के जागिरदारों का जमीनों पर राज करना और यहां के लोगों की समस्याओं को सरकार पर थोप देना. पाकिस्तान में तो सरकारें भी सेना ही चलाती है और यहां की सेना इतनी ताकतवर है कि पाकिस्तान में न्याय का फैसला भी सेना कर लेती है.

सन 2000 में जनरल परवेज मुशर्रफ ने 65 हज़ार एकड़ जमीन कब्जे में ले ली थी और तब से लेकर 2015 तक कई किसानों को इसी जमीन पर कब्जा जमाने के लिए मार डाला गया. ये जमीन पाकिस्तानी आर्मी ने अपनी बना ली थी जो पाकिस्तान की Okara डिस्ट्रिक्ट में थी. ये स्थानीय किसानों के पास करीब 100 सालों से थी, लेकिन मुशर्रफ सरकार ने इसे सेना के नाम कर दिया था.

सोने और तांबे की खदानों पर भी सेना का हक!

पाकिस्तान में सेना की संपत्ती लगातार बढ़ने के कुछ कारणों में से एक पाकिस्तानी सेना का उस देश के आंतरिक और विदेशी व्यवसायों पर भी नजर रहती है. इसका हालिया उदाहरण है दुनिया की सबसे बड़ी सोने और तांबे की खदान जो पाकिस्तान, अफ्गानिस्तान और ईरानी सरहद पर स्थित है. पाकिस्तानी सेना द्वारा संचालित संस्था Frontier Works Organisation (FWO) कुछ इस तरह से राजनीति कर रही है ताकि वो इस सुरंग का फैसला खुद ले सके.

इमरान खान सरकार चाहती है कि इस भंडार से पाकिस्तान में FDI आ सके और Reko Diq mine पाकिस्तान के लिए नए रास्ते खोल दे. इस खदान पर इतने समय से काम इसलिए रुका हुआ है क्योंकि इसको लेकर अन्य देशों की कई कंपनियां जैसे कनाडा की Barrick Gold और चिली की Antofagasta अपना-अपना दावा पेश कर रही है, लेकिन सेना इसे रणनीतिक संपत्ति के तौर पर देख रही है और अब पाकिस्तानी आर्मी का फैसला अब इस खदान के लिए आखिरी फैसला साबित होगा.

पाकिस्तानी सेना और विदेशी नौकरियां-

पाकिस्तानी सेना और उसके अधिकारियों की दौलत यहीं खत्म नहीं होती. कई पाकिस्तानी पूर्व सेना अधिकारी असल में विदेशों में बड़ी नौकरियां करते हैं. 2018 में पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने ये सवाल भी किया था कि आखिर क्यों पूर्व सेना अधिकारी और ISI चीफ विदेशों में नौकरियां ढूंढ लेते हैं. जनरल राहील शरीफ को भी इसी लिस्ट में शामिल हैं. पाकिस्तानी कोर्ट ने ये सवाल किया था कि कैसे आर्मी अधिकारी जिनके पास देश की सबसे खूफिया जानकारी होती है वो बिना दो साल का रिटायरमेंट पीरियड पूरा किए विदेशों में नौकरियां करने चले जाते हैं.

पाकिस्तानी सेना की ये मनमानी देखकर अचंभा नहीं होता क्योंकि पाकिस्तानी सेना ही उस देश की सरकार को चलाती है और मनमानी ऐसी की आर्मी कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी नहीं माना जाता. पाकिस्तानी आर्मी ही इसकी जिम्मेदार है कि वहां की 208 मिलियन की आबादी बेसहारा है.

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लेखक

श्रुति दीक्षित श्रुति दीक्षित @shruti.dixit.31

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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