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Updated: 15 अगस्त, 2019 01:49 PM
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जम्मू-कश्मीर से जुड़ी धारा 370 हटाये जाने को लेकर RSS प्रमुख मोहन भागवत और भैयाजी जोशी के बाद इंद्रेश कुमार का भी बयान आ गया है. भागवत और जोशी की ही तरह इंद्रेश कुमार जम्मू कश्मीर के मामले में संघ में अलग हैसियत रखते हैं. इंद्रेश कुमार के पास जम्मू-कश्मीर में 18 साल तक काम करने का अनुभव है - और वो संघ के एक खास एजेंडे की अगुवाई भी करते हैं - राष्ट्रीय मुस्लिम मंच. इंद्रेश कुमार राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के संयोजक हैं.

धारा 370 खत्म किये जाने पर मोहन भागवत और जोशी ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा था कि ये जम्मू-कश्मीर सहित पूरे देश के हित के लिए अत्यधिक आवश्यक था. इंद्रेश कुमार का कहना है कि धारा 370 के खात्मे से जम्मू-कश्मीर में रहने वाले कश्मीरी पंडितों, डोगरा समुदाय के लोगों और दलितों को इंसाफ मिला है. साथ ही, इंद्रेश कुमार ने कश्मीरी मुसलमानों को लेकर भी एक विशेष बात कही है.

धारा 370 समाप्त किये जाने के बाद इंद्रेश कुमार का कहना है कि अगला कदम कश्मीरी मुसलमानों को भारतीयता के रास्ते पर लाने का होना चाहिये. सवाल ये है कि कश्मीरी मुसलमानों के लिए RSS नेता ने भारतीयता पर जो पाठ्यक्रम तैयार किया है - वो देश के बाकी हिस्सों में मुसलमानों के प्रति संघ के नजरिये से क्या अलग होगा?

और अगर अलग होगा तो न्यू-कश्मीर में मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए क्या खास होगा?

और जो खास होगा वो क्या कश्मीरी पंडितों और कश्मीरी मुस्लिमों के लिए अलग अलग होगा या एक जैसा होगा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संदेश में तो किसी समुदाय विशेष का नाम तक न लिया था - और वो पूरे कश्मीर के लोगों की बात कर रहे थे - फिर इंद्रेश कुमार के मन में क्या चल रहा हो सकता है?

'सबका विश्वास' और 'भारतीयता' के पाठ में कितना फर्क है?

संसद के जरिये धारा 370 को खत्म किये जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संदेश दिया था, जिसमें फोकस जम्मू और कश्मीर पर ही था. अपने 38 मिनट के संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार भी कश्मीरी पंडित या कश्मीरी मुसलमानों का नाम नहीं लिया. मोदी ने जो कुछ भी कहा वो सभी कश्मीरियों के लिए था. बल्कि, कश्मीर के लोगों को देश के बाकी हिस्सों के लोगों से जोड़ते हुए समग्रता का एहसास कराते हुए था.

RSS नेता इंद्रेश कुमार ने एक इंटरव्यू में खास तौर पर कश्मीरी मुसलमानों का जिक्र किया है. इंद्रेश कुमार का कहना है कि जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाये जाने के बाद अब अगला कदम सूबे के लोगों को 'भारतीयता' और 'राष्ट्रवाद' की अवधारणा से जोड़ने की कोशिश होगी.

इंद्रेश कुमार कहते हैं कि घाटी में अब तक एक अलग तरह की इस्लामिक अवधारणा का प्रचार किया गया है, जिससे सिर्फ हिंसा के हालात जन्मे हैं, लेकिन कश्मीर के लोगों को अब ऐसे विचारों से दूर रहना होगा.'

इंद्रेश कुमार मानते हैं कि ये अलग इस्लामिक अवधारणा ऐसी है जिसमें न तो रमजान और न ही ईद को लेकर कोई सम्मान की बात होती है. राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के संयोजक आगे कहते हैं, 'ये सिर्फ हिंसा फैलाता है. पुलवामा हमले ने इसे साफ कर दिया है. कश्मीरी मुस्लिमों को इस तरह के इस्लाम धर्म से दूर रहना चाहिए. देशभर के अन्य जगहों के मुसलमानों ने एक राष्ट्र, एक झंडा, एक संविधान और एक नागरिकता के सिद्धांत को स्वीकार किया है.' इंद्रेश कुमार का दावा है कि लद्दाख और कश्मीर घाटी के एक चौथाई लोग धारा 370 के हटाने से खुश हैं - जो सूबे की करीब दो-तिहाई आबादी है.

2019 का आम चुनाव 2014 के मुकाबले बड़े बहुमत के साथ जीतने के बाद जब प्रधानमंत्री मोदी को एनडीए का नेता चुना गया तो पहले ही भाषण में उन्होंने बीजेपी का स्लोगन 'सबका साथ, सबका विकास' एक नये फीचर के साथ पेश किया - 'सबका विश्वास'. ये सबका विश्वास देश के मुस्लिम समुदाय के लिए ही है. खुद मोदी की पुरानी छवि और बीजेपी की राजनीति ऐसी रही है कि विरोधी राजनीतिक दल इसे मुसलमानों के खिलाफ होने का इल्जाम लगाते हैं.

यही वजह लगती है कि अब बीजेपी नेतृत्व सबको साथ लेकर चलने के लिए ज्यादा जोर लगाने की कोशिश कर रहा है. वैसे तो सबका साथ में भी आशय समग्रता से ही है जिसमें मुस्लिम समुदाय को भी समाहित करने की धारणा की तरह इशारा है, लेकिन बदलते राजनीतिक हालात में उसके अप्रासंगिक होने के चलते - सबका विश्वास जोड़ने की जरूरत समझी गयी.

ऐसे में जबकि बीजेपी नेतृत्व सबका विश्वास जीतने की कोशिश में लगा है, आखिर इंद्रेश कुमार कश्मीरी मुसलमानों को क्या मैसेज देना चाहते हैं? इंद्रेश कुमार की बातों से ऐसा लगता है जैसे जम्मू-कश्मीर के एक-तिहाई लोग धारा 370 खत्म किये जाने के खिलाफ हैं - और ये कश्मीरी मुसलमान हैं. ये वही लोग हैं जिन्हें अब तक इस्लामिक अवधारणा में हिंसा का पाठ पढ़ाया जाता रहा है - अब संघ उन्हें भारतीयता का पाठ पढ़ाना चाहता है. ऐसा क्यों है कि प्रधानमंत्री मोदी सबको एक साथ लेकर कर सोच रहे हैं - और संघ कश्मीरी पंडितों और कश्मीरी मुसलमानों को अलग अलग रख कर सोच रहा है?

फिर तो ये जानना भी जरूरी हो जाता है कि RSS ने कश्मीरी मुसलमानों के लिए क्या पाठ्यक्रम तैयार कर रखा है? और ये पाठ्यक्रम क्या मोदी सरकार की नीतियों से अलग है? क्या संघ को BJP का 'सबका विश्वास' जीतने की सोच और मोदी सरकार के उस पर अमल का इरादा कोर एजेंडे में किसी बाधा जैसा लग रहा है?

विवादित बयानों के धुरंधर इंद्रेश कुमार की बातें कितनी अहम?

कभी आपने देखा होगा वाराणसी में मुस्लिम महिलाएं फूल माला हाथ में लिए 'मोदी-मोदी' कर रही हैं, तो कभी रक्षा बंधन पर मुस्लिम समुदाय और हिंदू राखी बंधवा रहे हैं. कुछ कार्यक्रम ऐसे भी देखे होंगे जिनमें प्रधानमंत्री मोदी के इर्द कुछ मुसलमान हंसते मुस्कुराते बातचीत में मशगूल भी नजर आते हैं. ये सब इंद्रेश कुमार की मुहिम का हिस्सा है. राष्ट्रीय मुस्लिम मंच इफ्तार और सेहरी जैसे आयोजनों के जरिये सांप्रदायिक सद्वाव दिखाने की कोशिश करता है.

दूसरी तरफ मॉब लिंचिंग और बीफ के मुद्दे से लेकर अयोध्या मसले तक - अक्सर ही इंद्रेश के विवादित बोल सुर्खियों का हिस्सा बनते हैं.

आइए देखते हैं, इंद्रेश कुमार के ऐसे ही कुछ बयान -

1. मॉब लिंचिंग : 'आज मॉब लिंचिंग पर शोर मच रहा है, जबकि कश्मीर से ही इसकी शुरुआत हुई थी. छह लाख अल्पसंख्यक हिंदुओं को घर से निकाल दिया गया था. अपने ही देश में वे विस्थापित की तरह जीवनयापन कर रहे हैं... किसी भी दल की ओर से कभी प्रतिक्रिया तो नहीं दी गई.'

2. बीफ : मॉब लिंचिंग रोकने के उपाय भी बताते हैं इंद्रेश कुमार, 'लोग बीफ खाना बंद दे तो इस तरह की घटनाएं रुक सकती हैं.'

3. वैलेंटाइन डे : वैलेंटाइन डे की वजह से महिलाओं से रेप की घटनाएं होती हैं. बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों के लिए भी यही दिन जिम्मेदार है.'

4. अयोध्या केस : 'जो लोग भारत माता की जय और वंदे मातरम नहीं बोलते हैं वे गद्दार और धोखेबाज हैं.' इंद्रेश कुमार ऐसा न करने पर पिटाई करने वाली भीड़ का भी समर्थन कर चुके हैं.

पकौड़ा बेचने की तरह भीख मांगने को भी रोजगार करार देने वाले इंद्रेश कुमार ने हेमंत करकरे पर साध्वी प्रज्ञा के बयानों का भी सपोर्ट किया था और अयोध्या मामले में तो सारी हदें ही लांघ चुके हैं - 'साधु-संतों को राम मंदिर मामले की सुनवाई करने वाले जजों के घर हल्ला बोल देना चाहिए.'

अब ये समझना जरूरी है कि कश्मीरी मुसलमानों के भारतीयता का पाठ पढ़ाने की बात कर इंद्रेश कुमार क्या संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं. क्या ये प्रधानमंत्री मोदी के राष्ट्र के नाम संदेश से आगे की बात है या फिर कुछ और?

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