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 |  5-मिनट में पढ़ें  |   16-05-2018
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कर्नाटक चुनाव प्रचार के दौरान जब कांग्रेस के सिद्धारमैया और जेडीएस के देवेगौड़ा और कुमारस्‍वामी एक-दूसरे पर हमला कर रहे थे, तो किसी को आश्‍चर्य नहीं हो रहा था. दोनों के बीच दुश्‍मनी पुरानी है. लेकिन, जब कर्नाटक चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद कांग्रेस ने जेडीएस के सामने बिना शर्त समर्थन का प्रस्‍ताव रखा तो थोड़ा आश्‍चर्य हुआ. आखिर इस गठबंधन की रूपरेखा तैयार कैसे हुई होगी ? बेटे कुमारस्‍वामी को मुख्‍यमंत्री बनाने के लिए क्‍या देवेगौड़ा अपना पुराना अनुभव भूल गए हैं ? और सबसे बड़ी बात, बड़ा दल होते हुए कांग्रेस ने जेडीएस से क्‍या कहकर बात चलाई होगी ? अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट में इस गुत्‍थी को सुलझाने की जो कोशिश हुई है, वो इस तरह है:

कर्नाटक के चुनाव से एक हफ्ते पहले, सोनिया गांधी ने वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता सीताराम येचुरी से जनता दल (सेक्युलर) अध्यक्ष एचडी देवेगौड़ा से बात करने के लिए कहा. दोनों नेताओं के करीबी एक सूत्र ने कहा, "येचुरी ने उन्हें 1990 के दशक के दिनों की याद दिलाई, जब सभी पार्टियों के नेता बीजेपी को सत्ता से बाहर रखने के लिए देवेगौड़ा के पीछे एकजुट हो गए थे. येचुरी, सोनिया गांधी और देवेगौड़ा के बीच हमेशा से ही अच्छे संबंध रहे हैं."

देवेगौड़ा की दो शर्तें थीं. उनके तीन सूत्रों ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि पहली शर्त ये थी कि उनके बेटे एचडी कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री पद दिया जाएगा. और दूसरी शर्त ये कि वो राहुल गांधी से नहीं बल्कि सोनिया से बात करेंगे. जैसे ही एक्जिट पोल में खंडित जनादेश के आसार दिखने लगे बातचीत का दौर और तेजी पकड़ने लगा. बातचीत में शामिल एक स्रोत ने व्यंग्य करते हुए कहा, "यह भारतीय फैमिली ड्रामा का एक क्लासिक उदाहरण था. दोनों बेटे एक दूसरे से बात नहीं करेंगे, इसलिए माता-पिता आगे आए."

Karnataka election 2018, HD deve Gaowdaबेटों की दूरी को मिटाने का जिम्मा अभिभावकों ने संभाला

कर्नाटक चुनाव नतीजे के बाद सामने आए कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के बाद 2019 के लिए साफ संकेत तो पता चल ही गए हैं. क्योंकि कांग्रेस और क्षेत्रीय दल, किसी भी हालत में भाजपा को रोकने की कोशिश करेंगे:

- कांग्रेस पीछे से नेतृत्व करेगी.

- राहुल गांधी नहीं बल्कि सोनिया गांधी बातचीत करेंगी.

- चुनावों के पहले के समझौतों के आधार पर चुनाव के बाद गठबंधन बनाकर एक नेशनल फ्रंट बनाया जाएगा.

एक विपक्षी नेता ने कहा, "क्षेत्रीय दल इस बात को लेकर बहुत ही ज्यादा स्पष्ट हैं. अगर कांग्रेस को अपने आप बहुमत नहीं मिलता है, तो अगर कांग्रेस उन्हें शीर्ष पद ऑफर करती है तभी बाकी लोग उन्हें समर्थन देंगे."

माहिर खिलाड़ी मैदान में कूद चुके हैं-

कांग्रेस और जेडी (एस) के वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव के पहले ही, चुनाव के बाद गठबंधन का मन बना लिया था. चुनाव प्रचार के दौरान दोनों ही दलों के बीच समझौते की संभावना घट गई थी कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रचार के दौरान बार-बार कहा कि जेडी (एस) और भाजपा के बीच में पर्दे के पीछे से समझौता हो चुका है. राहुल गांधी के करीबी लोग भी यही मानते थे. वहीं जेडी (एस) के नेता राहुल गांधी से इसलिए खफा थे क्योंकि उन्हें लगता था कि राहुल गांधी के बेबुनियाद आरोपों की वजह से दक्षिण कर्नाटक में उनके मुस्लिम वोट उन्हें नहीं मिले.

जैसे ही खंडित जनादेश की संभावनाएं साफ होने लगी सोनिया गांधी ने अपने नेटवर्क को सक्रिय कर दिया. वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और रणनीतिकार गुलाम नबी आजाद ने जेडी (एस) के दिल्ली प्रतिनिधि दानिश अली से मुलाकात की. दानिश अली को कुमारस्वामी का "आंख और कान" कहा जाता है. इस बीच, सीपीआई (एम) के सीताराम येचुरी ने अपनी पार्टी की आंतरिक लड़ाई में विजय पाई थी. और एचडी देवेगौड़ा को शांत करने और अपने खेमे में लेने की ड्यूटी उन्हें ही दी गई थी.

सूत्रों ने बताया कि देवेगौड़ा ने येचुरी को गठबंधन सरकार में कांग्रेस के इतिहास को याद दिलाया. खासकर जब वो खुद प्रधान मंत्री थे तब कांग्रेस ने सिर्फ एक साल में ही उनकी सरकार गिरा दी थी. इसके साथ ही उन्होंने ये स्पष्ट आश्वासन भी मांगा कि कर्नाटक में गठबंधन अपने पांच साल पूरे करेगा. राहुल गांधी के करीबी सूत्रों ने माना कि इस पूरी योजना के पीछे सोनिया गांधी का ही हाथ है. लेकिन राहुल ने भी अहमद पटेल, आजाद और अशोक गहलोत के बेंगलुरु जाने से पहले उनसे मुलाकात की. उनको भाजपा को कर्नाटक से हर कीमत पर दूर रखने के निर्देश दिए गए थे.

संयुक्त गठबंधन के आसार

चर्चा में शामिल एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "भाजपा को रोकने में चुनाव के पूर्व कोई राष्ट्रीय गठबंधन कभी भी सफल नहीं होगा. यहां क्षेत्र के हिसाब से व्यवस्था करनी होगी, जिसके परिणामस्वरूप चुनाव के बाद गठबंधन हो सकता है."

बीजेपी के खिलाफ पहला गठबंधन 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी की तेरह दिन की बीजेपी सरकार के गिरने के बाद सामने आया था. इस समय देवेगौड़ा को प्रधानमंत्री बनाया गया था. 2004 में कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन भी चुनाव के बाद किए गए गठबंधन का परिणाम था. हर राज्य में कांग्रेस की भूमिका, कर्नाटक में उनकी भूमिका का बदला ही होगा, जहां इसे संख्यात्मक रूप से छोटे साझेदार को बढ़ावा देने के लिए अपनी महत्वाकांक्षा की तिलांजलि देनी होगी.

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