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Updated: 20 मार्च, 2017 02:54 PM
कुमार शक्ति शेखर
कुमार शक्ति शेखर
  @KumarShaktiShekhar
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भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लड़ाई को भारी झटका लगा है. जहां वो डिजिटल इंडिया का ख्वाब देख रहे हैं वो कहीं चकनाचूर न हो जाए. चार महीने पहले सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (CVC) के जिस पोर्टल पर भ्रष्‍ट अफसरों का रिकॉर्ड था, वह पोर्टल क्रैश हो गया.

'इंडिया टुडे' को पता चला है कि 28 नवंबर को सीवीसी की साइट की हार्ड डिस्क क्रैश हो चुकी है और जो डाटा उसमें जमा था वो खो चुका है. बता दें, उस डाटा का कोई बैकअप भी नहीं था. यानी CVC ने जो मेहनत की थी उसमें पानी फिर गया है. इस पोर्टल की सुरक्षा टाटा कंसलटेंसी सर्वेसिस (TCS) के पास थी.

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चिंता की बात ये है कि सीवीसी का टीसीएस से कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो चुका है. इस घटना के बाद सूत्रों का कहना है कि इसी साल सीवीसी के पोर्टल को केंद्र की वेब सेवा संगठन और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (NIC) ने संभाला है. एनआईसी क्रैश डाटा को फिर प्राप्त करने की कोशिश कर चुकी है. लेकिन, वो नाकामयाब रही. हालांकि नई शिकायतें और जानकारियां सीवीसी के पास है, लेकिन पुरानी केस पूरी तरह से गुम हो चुके हैं.

नेशनल टैक्सटाइल कॉर्पोरेशन में भ्रष्टाचार

मुंबई के रहने वाले एचआर कोसिया ने 2013 में आरटीआई फाइल की थी जिसमें कहा गया था कि एनटीसी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर पीसी वैश ने एनटीसी की पौद्दार मिल को बिना टैक्सटाइल मिनिस्ट्री और एनटीसी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को बताए मुंबई के ओम वास्तु शांती नामक बिल्डर को 75 लाख में बेचा है. बता दें, उस वक्त उस मिल की कीमत करोड़ों की थी.

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उस वक्त कोसिया एनटीसी में डिप्‍टी मैनेजर थे और उन्होंने भष्टाचार को उजागर करने के लिए कई मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा था. यहां तक की उन्हें जुलाई 2016 में निकाल भी दिया था. कोसिया की शिकायत ये भी थी कि टेक्सटाइल मिनिस्ट्री ने उनके खिलाफ न एफआईआर दर्ज की थी और न ही पंचनामा किया गया था.

सीवीसी में अफसोस की स्थिति

कोसिया की ये आरटीआई फाइल सीवीसी में थी, कई बार पूछने पर, सीवीसी डायरेक्टर और केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी ज्योति त्रिवेदी ने 22 दिसंबर 2016 को जवाब दिया कि, आयोग की शिकायत पोर्टल के कार्य में तकनीकी समस्या होने के कारण, शिकायत पर की गई कोई कार्रवाई नहीं हो सकती. उन्होंने कहा कि इस मामले में अपीलीय प्राधिकारी सीवीसी के अतिरिक्त सचिव प्रवीण सिन्हा थे.

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कोसिया ने प्रवीण सिन्हा को याचिका दायर करते हुए कहा कि ज्योति त्रिवेदी की प्रतिक्रिया आरटीआई अधिनियम 2005 के अनुसार मान्य नहीं थी. जिसके बाद सिन्हा ने कोसिया को 24 जनवरी को जवाब देते हुए माना था कि एक्शन की कॉपी सीवीसी के पास होनी चाहिए थी. सिन्हा ने यह भी लिखा कि वो केंद्रीय सूचना आयोग में अपील कर सकते हैं. जिसके बाद उन्होंने अपील की.

जिसके बाद ज्योति त्रिवेदी ने कोसिया को 9 फरवरी को लेटर में लिखा कि कमीशन का टीसीएस सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा, जिसके चलते कोई भी एक्शन नहीं लिया जा सकता.

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जिसके बाद कोसिया ने दूसरी बार केंद्रीय सूचना आयोग में अपील की. उनको ये भी आशंका थी कि इस पूरे प्रकरण के पीछे कुछ बड़ा षड्यंत्र है. उन्होंने कहा कि पोर्टल का 28 नवंबर को क्रैश होना, सीवीसी का टीसीएस से दिसंबर में ही कॉन्ट्रैक्ट खत्म होना, डाटा का बैकअप न होना... ये कोई संयोग नहीं हो सकता. पीएम मोदी को तुरंत जांच के ऑर्डर देने चाहिए.

कोसिया के केस की तरह कई ऐसे हजारों केस हैं जिन पर अब कोई एक्शन नहीं लिया जा सकेगा क्योंकि अब फाइल ही क्रैश हो गई तो क्या किया जा सकता है. लेकिन एक बाद तो है भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के अभियान के लिए गंभीर झटका लगा है.

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लेखक

कुमार शक्ति शेखर कुमार शक्ति शेखर @kumarshaktishekhar

लेखक इंडिया टुडे ग्रुप से जुड़े पत्रकार हैं.

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