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Updated: 08 अप्रिल, 2021 06:18 PM
मशाहिद अब्बास
मशाहिद अब्बास
  @masahid.abbas
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मुख्तार अंसारी एक ऐसा नाम है जिसे उत्तर प्रदेश में शायद ही कोई न जानता हो. मुख्तार अंसारी का परिवार देश की सियासत में दबदबा रखता है और बड़े रसूखदार घरानों में जाना जाता है. मुख्तार अंसारी को पंजाब की जेल से उत्तर प्रदेश के बांदा जेल में लाया गया है जिसकी चर्चा जोरोशोर से हो रही है. इसके सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं और इस पूरे घटनाक्रम के अपने समीकरण भी साधे जा रहे हैं. मुख्तार अंसारी खुद एक नेता रहे हैं और राजनीति में मुख्तार की एक अच्छी खासी पैठ मानी जाती रही है. राजनीतिक रसूख की बात की जाए तो उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल हिस्से में मुख्तार का दबदबा रहा है और इस नाम से ही डर और भय का माहौल रहा है. पूर्वी हिस्से से लेकर दिल्ली की सीमा तक मुख्तार के इशारे पर हर वह काम आसानी से हो जाया करता था जिसे नामुमकिन माना जाता था. मुख्तार अंसारी का परिवार राजनीति के क्षेत्र में पिछले 100 सालों से अधिक समय से रहा है. मुख्तार के दादा डॉक्टर मुख्तार अहमद अंसारी खुद एक नेता भी थे और स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के दौरान 1926-27 में इंडियन नेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे थे और पाकिस्तान के खिलाफ नौशेरा की लड़ाई लड़ कर भारत को विजय भी दिलाई थी हालांकि इसी युद्ध में वह भारत की ओर से शहीद भी हो गए थे. वह गांधी जी के करीबी नेता भी माने जाते थे. इसी युद्ध में मुख्तार के दादा के साथ मुख्तार के नाना ब्रिगे़डियर उस्मान मुख्तार अंसारी भी शहीद हुए थे जिन्हें पाकिस्तान के खिलाफ नौशेरा की जीत का हीरो भी माना जाता है.

Mukhtar Ansari, Mafia, Crime, Criminal. UP, MLA, Yogi Adityanath, Chief Ministerमुख्तार अंसारी को बांदा जेल लाने का फायदा योगी आदित्यनाथ को यूपी चुनाव में मिलेगा

मुख्तार अंसारी के चाचा पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी हैं जिनका रुतबा कांग्रेस पार्टी में किसी से भी छिपा नहीं है. इतने बड़े राजनीतिक और बहादुर घराने में जन्म लेने वाला मुख्तार कब खौफ का नाम बन गया इसकी एक बहुत लंबी दास्तान है. कैसे मुख्तार को बाहुबली माना जाने लगा और किस तरह की दहशत मुख्तार ने पैदा कर रखी थी ये सारी चीज़ों का बखान पिछले कई दिनों से आपके सामने हो रहा है. मुख्तार अंसारी एक ऐसा राजनेता जो जेल की सलाखों के पीछे रहने के बावजूद चुनाव जीत जाया करता है.

मुख्तार अंसारी के ऊपर अपराधिक मामलों की एक बेहद लंबी लिस्ट रही है. लेकिन किसी भी मामले में मुख्तार अंसारी को कोई खास सजा नहीं भुगतनी पड़ी है. अदालतों में गवाही से पहले जैसा फिल्मों में होता है वैसा ही मुख्तार के साथ होता था कि गवाहों की जान गवाही देने से पहले ही ले ली जाया करती थी. मुख्तार अंसारी अब पुलिस की गिरफ्त में हैं और सबसे खास यह है कि वह अब उत्तर प्रदेश की पुलिस की गिरफ्त में है.

पंजाब की जेल में बंद रहे मुख्तार अंसारी को यूपी लाने की बहुत कोशिशें की गई लेकिन मामला नहीं सुलझा. आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने मुख्तार को यूपी भेजने का फैसला सुनाया तो कड़ी सुरक्षा के बीच मुख्तार को यूपी के बांदा शहर में भेज दिया गया है. मुख्तार अंसारी को यूपी लाने में अहम भूमिका खुद यूपी सरकार की रही है. उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज भाजपा की योगी आदित्यनाथ के नेतृव्य में सरकार के लिए मुख्तार अंसारी तुरुप का पत्ता साबित होते दिखाई पड़ रहे हैं.

एक ओर जहां भाजपा मुख्तार असांरी को उत्तर प्रदेश में लाकर यह संदेश देने में जुट गई है कि उत्तर प्रदेश के कुल अपराधी डरे हुए हैं और उनको किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जा रहा है तो दूसरी ओर राजनीति के मैदान पर भी खूब दंगल भाजपा की ओर से दिखाई दे रहा है. भाजपा उत्तर प्रदेश की सभी विपक्षी पार्टी को मुख्तार मामले में घेराबंदी कर रही है. एक ओर जहां भाजपा सपा को मुख्तार अंसारी का पालनहार बतला रही है तो दूसरी ओर मुख्तार को शह देने वाली बसपा मुखिया मायावती की चुप्पी को भी घेरने का कार्य कर रही है.

वहीं कांग्रेस पार्टी को मुख्तार अंसारी का साथी बतला कर पंजाब पुलिस और सरकार और मुख्तार अंसारी के बीच सांठगांठ को भी जिम्मेदार ठहरा रही है. कुल मिलाकर सीधे शब्दों में कहा जाए तो भाजपा के चारों तरफ लड्डू ही लड्डू है जिसे वह 2022 के विधानसभा चुनाव में भुनाने का खेल आसानी से खेलने का कार्य करने वाली है.

उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार को मुख्तार अंसारी मामले का फायदा ज़रूर हासिल होगा, इसकी एक तस्वीर तो उस वक्त ही दिखाई पड़ गई जब सड़क के रास्ते मुख्तार अंसारी को बांदा जेल लाया जा रहा था तब महज उत्तर प्रदेश में ही नहीं बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी इसकी जोरशोर से चर्चा थी. मुख्तार अंसारी मामले का पूरा नफा योगी आदित्यनाथ की सरकार वर्ष 2022 के शुरुआती महीनों में ही भुनाना चाहेगी.

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मशाहिद अब्बास मशाहिद अब्बास @masahid.abbas

लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं और समसामयिक मुद्दों पर लिखते हैं

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