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सियासत

 |  4-मिनट में पढ़ें  |   13-11-2017
अशोक उपाध्याय
अशोक उपाध्याय
  @ashok.upadhyay.12
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प्रायः नेता अपनी बात को सही ठहराने के लिए या विरोधियों को गलत साबित करने के लिए कुछ ऐसा कह देते हैं जो बिना सिर पैर का प्रतीत होता है. ऐसी बातें तथ्यों से परे एवं तर्क से कोसों दूर होती हैं. ऐसा बोलने वाले अक्सर बड़बोले होते हैं, जो बोलते पहले हैं एवं सोचते बाद में हैं. ऐसे नेताओं की बात अकसर लोग बहुत गंभीरता से नहीं लेते हैं. आश्चर्य तब होता है जब कोई गंभीर छवि वाला राजनेता इस तरह की बात करता है.

ऐसा ही वाकया पिछले दिनों हुआ. केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भोपाल में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि नोटबंदी से देह व्यापार में भी भारी कमी आयी है. इसके लिए बड़े पैमाने पर नकदी नेपाल और बांग्लादेश चली जाती थी. कानून मंत्री ने कहा की 500 रुपये और 1000 रुपये के पुराने नोटों को देह व्यापार और मानव तस्करी में भुगतान के लिए इस्तेमाल किया जाता था. हालांकि उन्होंने वेश्यावृति में आई कमी के अपने दावे के समर्थन में कोई आंकड़ा नहीं पेश किया लेकिन यह जरूर कहा कि अब दलालों को नकद भुगतान नहीं होता है. इस हास्यास्पद एवं विवादित बयान से कई प्रकार के सवाल उठते हैं. 

रविशंकर प्रसाद नोटबंदी, वेश्यावृति  वेश्यावृति पर बयान से पहले रविशंकर प्रसाद को एक समझदार नेता समझा जाता थाक्या है उनके वक्तव्य का स्रोत?

पहला सवाल जो मन में आता है वो ये कि, आखिर उनके इस बयान का स्रोत क्या है? उन्होंने पहले कहा कि गृह मंत्रालय की ओर से यह जानकारी दी गई है. पर उन्होंने यह नहीं बताया की गृह मंत्रालय ने उनको क्या बताया जिससे वो इस निष्कर्ष पर पहुंचे. जब लोगों ने सोशल मीडिया पर जोर शोर से मजाक उड़ाना प्रारम्भ किया तो एक और खबर आई. इसमें कहा गया की मंत्री जी का ये बयान मीडिया की रिपोर्ट पर आधारित था. कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने ट्विटर पर कटाक्ष करते हुए लिखा है कि अगर वास्तव में रविशंकर प्रसाद का दावा सच है तो माननीय कानून मंत्री कृपया हमें बताएं कि कौन सा सरकारी विभाग वेश्याओं पर नजर रखता है और उनकी आय का आंकलन करता है. देश जानना चाहता है?

क्या वो जेटली के वक्तव्य को सही साबित करने का प्रयास कर रहे थे?

8 नवंबर को नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर, नोटबंदी को संगठित लूट बताने को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर निशाना साधते हुए, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि नोटबंदी एक नैतिक आर्थिक कवायद थी. भारतीय समाज में वेश्यावृति को सदैव हेय दृष्टि से देखा जाता रहा है. इसको अनैतिक एवं असामाजिक भी माना जाता है. वित्त मंत्री ने नोटबंदी को नैतिक आर्थिक कवायद बताई थी. अर्थात इससे हर तरह की अनैतिक आर्थिक गतिविधियों पर असर हुआ. इसलिए वेश्यावृति भी कम हुई. तो क्या कानून मंत्री अपने वरिष्ठ मंत्री के कथन को सही साबित करने का प्रयास कर रहे थे?

क्या एक वेश्या को डिजिटल ट्रांजेक्शन करना नहीं आ सकता ?

नोटबंदी के बाद से सरकार एवं भाजपा के नेता यह कहते नहीं अघाते की इससे डिटिटल लेनदेन को बहुत जोर मिला है. अब सब्जी की दुकान में भी डेबिट और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल किया जाने लगा है. इतना ही नहीं अब तो सिंघाड़े का ठेला लगाने वाला एवं मोची भी पेटीएम का इस्तेमाल कर रहे हैं. अगर ये लोग अपने व्यवसाय को बचाने के लिए डिजिटल लेनदेन कर सकते हैं तो वेश्यावृति में शामिल लोग ऐसा क्यों नहीं कर सकते?

कानून मंत्री क्यों नहीं वेश्यावृति को बंद करा देते?

कहते हैं वेश्यावृति दुनिया का सबसे पुराना पेशा है. सरकार से लेके समाज तक यह मनाता है कि यह गलत है. कानून मंत्री भी अपने बयान से यह जताने का प्रयास कर रहे थे कि नोटबंदी से इस पेशे पर रोक लगी है. तो फिर सरकार क्यों नहीं इसको बंद करवा देती. रिपोर्ट्स के अनुसार देश में आज कुल ग्यारह सौ सत्तर रेड लाईट एरिया हैं. अगर सरकार इसको गलत मानती है तो आजतक सरकार ने इन्हें बंद करने का कोई प्रयास क्यों नहीं किया?

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद न केवल बहुत बड़े वकील है बल्कि गंभीर छवि के नेता हैं. वो अपनी सधी हुई एवं तथ्यपूर्ण बातों के लिए जाने जाते हैं. हालांकि उनकी पार्टी में बिना सोचे समझे कुछ भी बोलने वाले नेताओं की लम्बी फेरहिस्त है. पर रविशंकर प्रसाद से लोगों को इस तरह के बयानों की अपेक्षा नहीं थी.

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लेखक

अशोक उपाध्याय अशोक उपाध्याय @ashok.upadhyay.12

लेखक इंडिया टुडे चैनल में एडिटर हैं.

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