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Updated: 02 जून, 2019 07:10 PM
श्रुति दीक्षित
श्रुति दीक्षित
  @shruti.dixit.31
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कांग्रेस की सोशल मीडिया सचिव Divya Spandana/Ramya अब ट्विटर का हिस्सा नहीं हैं. ये खबर बेहद चौंकाने वाली है क्योंकि दिव्या स्पंदन जो राहुल गांधी के ट्विटर हैंडल से ट्वीट करती थीं और साथ ही साथ कांग्रेस की सोशल मीडिया हेड भी थीं वो लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे आने के बाद इस तरह ट्विटर से गायब हो गईं. उनकी आखिरी ट्वीट Narendra Modi Oath Taking Ceremony के बाद की थी जिसमें नई वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन को बधाई दी गई थी. उन्होंने अपनी ट्वीट में निर्मला सीतारमन को बधाई देने के साथ-साथ ये भी लिखा था कि भारत की जीडीपी अभी ठीक नहीं चल रही है और मुझे उम्मीद है कि आप अर्थव्यवस्था को ठीक करने में शानदार काम करेंगी. इस ट्वीट में भी बधाई के साथ-साथ एक ताना छुपा था कि मोदी सरकार के पहले पांच सालों में अर्थव्यवस्था ठीक नहीं हुई.

दिव्या के अकाउंट से सबसे पहले सारी ट्वीट डिलीट हुईं और उसके बाद उनका अकाउंट ही डिलीट हो गया. जब उनके अकाउंट से ट्वीट डिलीट हुई थीं तो उसी के साथ उनके बायो से कांग्रेस सोशल मीडिया हेड की पोस्ट भी हट गई थी.

दिव्या के अकाउंट में शनिवार 1 जून को ही ये बदलाव आया था.दिव्या के अकाउंट में शनिवार 1 जून को ही ये बदलाव आया था.

अब उनका अकाउंट ही डिलीट हो गया है और उनका नाम सर्च करने पर “This account doesn’t exist.” वाला मैसेज आता है. अटकलें ये भी लगाई जा रही हैं कि ये उनके कांग्रेस से अलविदा कहने का तरीका है, लेकिन ANI को दिए जवाब में उन्होंने इस खबर को कोरी अफवाह ही बताया है. दिव्या स्पंदन (राम्या) को हमेशा कांग्रेस की सोशल मीडिया स्थिति को मजबूत करने के लिए जाना जाता था. उन्हें हमेशा भाजपा को ट्रोल करते पाया जाता था, लेकिन कांग्रेस की हालत सुधारते-सुधारते दिव्या से एक अहम गलती हो गई जिसका खामियाजा पूरी पार्टी ने झेला.

Divya Spandana की वो गलती जो Rahul Gandhi को भारी पड़ गई-

दिव्या स्पंदन ने काफी मेहनत से कांग्रेस की छवि सोशल मीडिया पर बनाई, लेकिन वो छवि उल्टी ही पड़ गई. इसका अहम कारण जो समझ आता है वो ये कि दिव्या स्पंदन शायद ये फैसला नहीं कर पाईं कि एक आम सोशल मीडिया ट्रोल और एक नेता जो कि विपक्ष का लीडर है उसमें फर्क क्या होता है. राहुल गांधी का ट्विटर अकाउंट दिव्या हैंडल करती थीं ये बात सार्वजनिक थी. ऐसे में कई बार राहुल गांधी के ट्विटर अकाउंट से ऐसी ट्वीट भी हुई हैं जिन्हें देखकर ये न लगे कि कोई नेता ट्वीट कर रहा है.

इसके अलावा, दिव्या अपने ट्विटर अकाउंट से भी जब ट्वीट करती थीं तो वो एक आम ट्रोल की शक्ल ही ले लेती थीं. उदाहरण के तौर पर हिटलर और नरेंद्र मोदी वाली तस्वीर.

दिव्या ने हिटलर की फोटोशॉप की हुई फोटो मोदी के साथ शेयर की थी.दिव्या ने हिटलर की फोटोशॉप की हुई फोटो मोदी के साथ शेयर की थी.

इस तस्वीर में वो ये कहना चाहती थीं कि हिटलर भी मोदी की ही तरह बच्चों के कान पकड़ता था. ये बेहद ओछी तुलना थी क्योंकि हिटलर लाखों लोगों की मौत का जिम्मेदार था. दुनिया का सबसे खराब तानाशाह. इस जैसी ट्वीट्स कांग्रेस के सोशल मीडिया हेड की तरफ से आ रही थीं. उस महिला के अकाउंट से जो खुद राहुल गांधी का ट्विटर हैंडल देखती है. ऐसे में लोग कितना भरोसा करेंगे दिव्या स्पंदन पर या राहुल गांधी पर?

इसका एक उदाहरण इस वीडियो में दिखता है.

दिव्या को लेकर ऐसे कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए रहते थे जहां लोग खुद ये कहते थे कि कांग्रेस की सोशल मीडिया हेड को इस बात से कोई लेना-देना नहीं है कि असल में उन्हें ट्रोल की जगह राहुल गांधी और कांग्रेस की स्कीम और आइडियोलॉजी शेयर करनी चाहिए.

सोशल मीडिया हेड होने का मतलब सिर्फ ट्रोल करना, मीम्स शेयर करना नहीं होता. उदाहरण के तौर पर भाजपा IT cell ने न सिर्फ नरेंद्र मोदी की छवि और बढ़ाने के लिए काम किया बल्कि विपक्षियों की कमियां और भाजपा की नीतियां सब कुछ लोगों तक पहुंचाया.

दिव्या के साथ गलत यही हुआ कि उन्हें इस रणनीति पर ज्यादा काम करना चाहिए था, लेकिन वो आम सोशल मीडिया ट्रोल बनकर रह गईं. राहुल गांधी की छवि सुधारने का जो मौका दिव्या को मिला था उसमें वो बुरी तरह से फेल हो गईं.

अब उनका ट्विटर अकाउंट डिएक्टिवेट होना भी कांग्रेस की हार से जोड़ा जा रहा है. उनका इंस्टाग्राम अकाउंट भी डिलीट हो गया है, लेकिन फेसबुक और लिंक्डइन पर अभी भी उनका अकाउंट मौजूद है. ये ट्विटर अकाउंट डिलीट करना राहुल गांधी के इस्तीफे की तरह ही हो गया. राहुल गांधी कांग्रेस की हार के लिए खुद को पूरी तरह से जिम्मेदार मान रहे हैं, लेकिन इसमें थोड़ा श्रेय तो दिव्या का भी था.

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लेखक

श्रुति दीक्षित श्रुति दीक्षित @shruti.dixit.31

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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