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Updated: 05 अगस्त, 2022 06:20 PM
देवेश त्रिपाठी
देवेश त्रिपाठी
  @devesh.r.tripathi
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देशभर में कांग्रेस ने महंगाई, बेरोजगारी और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए जोर-शोर से प्रदर्शन किया. दिल्ली में पीएम आवास को घेरने के लिए निकाले जाने वाले मार्च से पहले इन्ही मुद्दों पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. 33 मिनट की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बीच में जब राहुल गांधी से उनके कांग्रेस अध्यक्ष बनने को लेकर सवाल पूछा गया. तो, उन्होंने कहा कि 'आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस महंगाई, बेरोजगारी और देश की हालत पर है. तो, उस पर ही बात कीजिए. ये सबसे जरूरी मुद्दे हैं.' राहुल गांधी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में काफी आक्रामक नजर आ रहे थे. और, उन्होंने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत भारत में तानाशाही के राज से शुरू की. आसान शब्दों में कहा जाए, तो राहुल गांधी की पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही बड़ा विरोधाभास नजर आया.

मुद्दा महंगाई का, लेकिन शुरुआत तानाशाही से

राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में मीडिया पर ही सवाल उठाते हुए कहा कि 'हाऊ आर यू इन्जॉइिंग द ऑन सेट ऑफ डिक्टेटरशिप ऑफ इंडिया? आर यू इन्जॉइिंग इट? लोकतंत्र की जो मौत हो रही है, उसके बारे में क्या लगता है. क्या महसूस हो रहा है. जो इस देश ने 70 साल में बनाया, उसको 8 साल में खत्म कर दिया गया है. आज हिंदुस्तान में लोकतंत्र नही है. आज हिंदुस्तान में चार लोगों की डिक्टेटरशिप है. हम महंगाई, बेरोजगारी, समाज को बांटने की कोशिशों पर बहस करना चाहते हैं. यहां करना चाहते हैं. संसद में करना चाहते हैं. संसद में हमें बोलने नहीं दिया जाता है. हमें गिरफ्तार किया जाता है.' इतना बोलने के बाद ही राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ईडी, सीबीआई के छापों को लेकर बोलने लगे.

वैसे, राहुल गांधी की ये शुरुआती लाइनें ही चौंकाने के लिए पर्याप्त हैं. जब पूरे देश का मीडिया कांग्रेस की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को कवर कर रहा है. तो, राहुल गांधी कहते हैं कि हमें बहस के लिए समय नही दिया जाता है. जबकि, संसद का मानसून सत्र कांग्रेस और तमाम विपक्षी पार्टियों के विरोध और हंगामे की ही भेंट चढ़ गया. अगर कांग्रेस को महंगाई, बेरोजगारी और सांप्रदायिक सद्भाव में आई कमी पर बात करनी थी. तो, उसके सांसदों को संसद में विरोध और हंगामे की जगह बहस के जरिये अपना पक्ष रखना चाहिए था. लेकिन, संसद में तो ऐसा हुआ नही. और, राहुल गांधी की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी संसद जैसा ही हाल था. अपने विरोध को दिखाने के लिए राहुल गांधी महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दों को बस छुआ ही. बहस करने वाले कोई तथ्य या तर्क सामने नही रखे.

Congress Leader Rahul Gandhi Press Conference hot topics are National Herald Case ED Congress Gandhi Family barely talk about Inflation and Unemploymentराहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस भले ही महंगाई और बेरोजगारी पर थी. पर उनका ध्यान ईडी की ओर ही था.

संस्थान निष्पक्ष नही, मुझे पूरा ढांचा दे दो फिर बताऊं

11वें मिनट में राहुल गांधी ने फिर से माइक संभाला और दावा किया कि 'आरएसएस और भाजपा ने देश के हर संस्थान पर कब्जा कर लिया है. इसीलिए विपक्ष के आक्रामक रूप से खड़े होने के बावजूद उसका प्रभाव नही दिखता है.' राहुल गांधी के अनुसार, विपक्ष को देश के कानूनी, न्यायिक, चुनावी और मीडिया स्ट्रक्चर से समर्थन नही मिल रहा है. ये सभी केंद्र सरकार के पक्ष में खड़े हैं. जिसकी वजह से विपक्ष का प्रदर्शन लोगों को दिखाई नही पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि 'जर्मनी की सभी संस्थाएं हिटलर के हाथ में थीं. वह भी चुनाव जीतता था. आज हिंदुस्तान की सभी संस्थाएं आरएसएस के हाथ में हैं. मुझे पूरा ढांचा दे दो, फिर मैं बताता हूं.' 

दरअसल, राहुल गांधी की समस्या ये है कि वो अपने विचार नही बदलना चाहते हैं. 2014 के बाद से लगातार सिकुड़ती कांग्रेस के लिए वह अपनी गलतियों को मानने की जगह देश के संस्थानों के साथ भाजपा और आरएसएस को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. अगर राहुल गांधी के पास सुप्रीम कोर्ट से लेकर चुनाव आयोग तक पर कब्जे के किसी तरह के सबूत हैं. तो, इसकी जानकारी है, वो सबके सामने लाएं. राहुल गांधी देश में लोकतंत्र की मौत और इसके एक याद में बदल जाने की बात करते हैं. लेकिन, खुलकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं. इतना ही नही, संस्थानों पर कब्जे का विरोध करने वाले राहुल गांधी खुद उन पर कब्जा करने की बात करने लगे.

वहीं, राहुल गांधी ने ईडी और सीबीआई के छापों की बात कही. लेकिन, पार्थ चटर्जी, नवाब मलिक, अनिल देशमुख जैसे नेताओं के भ्रष्टाचार पर कुछ नही कहा. दरअसल, राहुल गांधी को अपने विचार बदलने की जरूरत है. जो उन्हें जनता से जुड़ने नही दे रहे हैं. क्योंकि, महंगाई और बेरोजगारी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईडी और सीबीआई की बात नही की जाती है.

14वें मिनट में महंगाई का मुद्दा आया, लेकिन फिर बात घूम गई

प्रेस कॉन्फ्रेस के 14वें मिनट में राहुल गांधी ने कहा कि 'महंगाई को नकारना पूरी तरह से बेवकूफी है. आज भारत में सबसे ज्यादा बेरोजगारी है. महंगाई बढ़ती जा रही है. लेकिन, वित्त मंत्री को ये आंकड़े नही दिख रहे हैं. वो केवल बोलती हैं. जबकि, पूरे देश में महंगाई की हालत सच्चाई है. लेकिन, परसेप्शन कुछ और बनाया जा रहा है. स्टार्टअप इंडिया की बात की जाती है. लेकिन, पूरे देश में स्टार्टअप इंडिया है कहां? स्टार्टअप इंडिया से लोगों को निकाला जा रहा है? कोरोना में हिंदुस्तान में कोई मौत नही हुई. यूएन की रिपोर्ट कह रही है कि कोरोना से भारत में 5 मिलियन लोग मरे. लेकिन, हिंदुस्तान की सरकार कह रही है कि ये झूठ बोल रहे हैं. बेरोजगारी और महंगाई बढ़ती जा रही है. लेकिन, हिंदुस्तान की सरकार और वित्त मंत्री कहते है कि नही. पूरा कम्युनिकेशन स्ट्रक्चर उनके हाथ में है.'

16वें मिनट के बाद गांधी परिवार को राहुल की 'क्लीन चिट'

प्रेस कॉन्फ्रेंस के 16वें मिनट में ही राहुल गांधी महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को छोड़ 'गांधी परिवार' पर हो रहे हमलों (ई़डी द्वारा नेशनल हेराल्ड घोटाले की जांच) पर आ गए. राहुल गांधी ने खुद को 'क्लीन चिट' देते हुए कहा कि 'मेरे खिलाफ कुछ नही है. ये पूरा देश जानता है. मेरा काम आरएसएस के विचार का विरोध करना है. और, मैं ये करूंगा. जितना ज्यादा मैं इसका विरोध करूंगा. उतना ही मुझ पर हमला किया जाएगा.' राहुल गांधी कहते दिखे कि 'मेरी समस्या ये है कि मैं सच बोलता हूं. मैं डरता नही हूं. क्योंकि, जो डरते हैं, वो ही धमकी देते हैं. जिन्होंने मुझसे पूछताछ की उन ईडी ऑफिसर्स से पूछिएगा, वो आपको बता देंगे कि उस कमरे में क्या हुआ?'

22वें मिनट में महंगाई तो नहीं, लेकिन गांधी परिवार पर चर्चा

राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के 20वें मिनट में फिर से देश के संस्थानों की निष्पक्षता की बात उठाई. और दावा किया कि देश में लोकतंत्र खत्म हो गया है. इसके साथ ही राहुल गांधी ने ये भी दावा किया कि अभी देश के लोगों को ये बात समझ नही आ रही है. लेकिन, इसके दुष्प्रभाव सामने आएंगे. और, जब ऐसा होगा, तो देश के लोग चुप नही बैठेंगे. वहीं, 22वें मिनट में एक बार फिर से महंगाई और बेरोजगारी को लेकर की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस गांधी परिवार पर आ गई.

राहुल गांधी ने कहा कि 'ये (भाजपा) गांधी परिवार पर हमला क्यों करते हैं? क्योंकि, हम एक विचारधारा के लिए लड़ते हैं. और, हमारे जैसे देश में करोड़ों लोग हैं. हम लोकतंत्र और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए सालों से लड़ रहे हैं. इसके लिए मेरे परिवार ने जान दी है. ये हमारी जिम्मेदारी है. क्योंकि, हम इन विचारधाराओं के लिए लड़ते हैं. जब हिंदुस्तान को हिंदू-मुसलमान के नाम पर बांटा जाता है, जब किसी को दलित कहकर पीटा जाता है, जब किसी महिला को पीटा जाता है, हमें दर्द होता है. इसीलिए हम लड़ते हैं. ये एक परिवार नही है. ये एक विचारधारा है.'

24वें मिनट में बहस न करने देने के लिए भाजपा पर आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस के 24वें मिनट में राहुल गांधी ने कहा कि 'हम मांग कर रहे हैं कि महंगाई पर बहस कराइए. संसद में महंगाई, चीनी बेरोजगारी अग्निपथ किसी भी मामले पर चर्चा करने का मौका नही दिया जाता है. वो बहस करना ही नहीं चाहते हैं.' इसके बाद से प्रेस कॉन्फ्रेंस के खत्म होने तक राहुल गांधी तानाशाही, विपक्ष के काम, कांग्रेस की विचारधारा और संस्थानों में भाजपा-आरएसएस के लोगों की ही बात करते रहे. आसान शब्दों में कहा जाए, तो महंगाई और बेरोजगारी को लेकर की गई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने बमुश्किल 10 बार ही महंगाई और बेरोजगारी जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया होगा.

प्रदर्शन भी नेता को बचाने के लिए ही

राहुल गांधी का महंगाई और बेरोजगारी के जरिये शक्ति प्रदर्शन सिर्फ नेशनल हेराल्ड केस में चल रही जांच को लेकर भाजपा पर दबाव बनाना ही है. वैसे, कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने खुद ही दावा किया है कि 'मैं अपने नेता को बचाने आऊंगा. क्योंकि, मेरा नेता मुझे बचाता है.' खैर, सलमान खुर्शीद का बात जरूरी भी नजर आती है. क्योंकि, बीते दिनों नेशनल हेराल्ड केस में राहुल गांधी और सोनिया गांधी से पूछताछ की गई थी. उस दौरान कांग्रेस ने दिल्ली मे जमकर विरोध-प्रदर्शन किया था. लेकिन, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर किसी तरह का दबाव नही बना. इसके उलट नेशनल हेराल्ड केस में जांच को आगे बढ़ाते हुए ईडी ने कांग्रेस समर्थित अखबार के दफ्तरों पर ही छापेमारी कर दी थी. 

लेखक

देवेश त्रिपाठी देवेश त्रिपाठी @devesh.r.tripathi

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं. राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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