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Updated: 16 सितम्बर, 2021 12:59 PM
मृगांक शेखर
मृगांक शेखर
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चिराग पासवान (Chirag Paswan) के लिए एक साल में बहुत कुछ बदल चुका है. पिता रामविलास पासवान का साया सिर से उठ जाने के बाद चिराग पासवान दुनिया के ज्यादातर रंग देख चुके हैं - और राजनीति के तो तकरीबन हर रंग से रूबरू हो ही चुके हैं. पासवान की पुण्यतिथि का चिराग को शिद्दत से इंतजार रहा होगा, लेकिन अब तो लगता है बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) भी बरसी की बेसब्री से ही प्रतिक्षा करते रहे होंगे.

पासवान को लेकर प्रधानमंत्री मोदी की चिट्ठी, चिराग से फोन पर बाद करना और फिर चिराग पासवान को भी एनडीए का हिस्सा बता दिया जाना यूं ही तो कतई नहीं लगता.

ये तो ऐसा लगता है जैसे चिराग पासवान के कंधे पर बंदूक रख कर फिर से नीतीश कुमार (Nitish Kumar) को ही निशाना बनाया जा रहा हो. 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों में तो नीतीश कुमार के खिलाफ बीजेपी नेतृत्व ने जिस तरीके से चिराग पासवान का इस्तेमाल किया, पहले से ही जगजाहिर है.

चिराग पासवान खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान होने का दावा करते आ रहे हैं, लेकिन पूरे चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक संकोच तो दिखाया, लेकिन चिराग पासवान को नीतीश कुमार के पक्ष में खारिज ही किया. वो तो चल भी जाता, लेकिन जिस तरीके से चिराग पासवान को अकेला छोड़ कर प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी मर्जी के खिलाफ उनके चाचा पशुपति कुमार पारस को कैबिनेट में शामिल कर लिया - चिराग पासवान तो जैसे कहीं के नहीं रहे, ऐसे नजर आने लगे थे.

बड़ी मुश्किल से चिराग पासवान बदले हालात में अपनी राजनीति को शेप देने की कोशिश कर रहे थे - और ऐन वक्त पर प्रधानमंत्री मोदी ऐसा पासा फेंका कि फिर से चिराग पासवान की राजनीति चौराहे पर आ खड़ी हुई है.

बड़ी मुश्किल है - चिराग करें तो क्या करें

बिहार विधानसभा 2020 की तैयारियों के बीच ऑपरेशन के लिए जाने से पहले रामविलास पासवान ने ट्विटर पर खुद ही जानकारी दी थी - और लगे हाथ ये भी बता दिया था कि चिराग पासवान के हर फैसले में उनकी सहमति मान लिया जाना चाहिये. रामविलास पासवान अस्पताल से लौट नहीं सके - और ये सब एक साल पहले की बातें हैं.

एक साल के भीतर ही लोक जनशक्ति पार्टी तो बिखर चुकी है, जिसके एक हिस्से के दावेदार रामविलास पासवान के भाई पशुपति कुमार पारस और दूसरे हिस्से के बेटे चिराग पासवान हैं.

पशुपति कुमार पारस केंद्र सरकार में मंत्री बन चुके हैं और चिराग पासवान को अपनी तरफ से अध्यक्ष पद से हटाकर खुद को लोक जनशक्ति पार्टी का मुखिया घोषित कर चुके हैं. लोक सभा में स्पीकर ओम बिड़ला ने तो पशुपति कुमार पारस को ही लोक जनशक्ति पार्टी के संसदीय बोर्ड के नेता के तौर पर मान्यता पहले ही दे दी थी.

chirag paswan, narendra modi, nitish kumarमोदी के असली टारगेट तो नीतीश कुमार ही हैं, लेकिन कंधा देकर चिराग पासवान दोबारा फंस गये हैं!

बिहार चुनाव में जीत कर आये लोक जनशक्ति पार्टी के एकमात्र विधायक को भी नीतीश कुमार ने जेडीयू में शामिल करा लिया - और चिराग पासवान को जितना भी डैमेज कर सकते थे, अपनी तरफ से कोई कोशिश नहीं छोड़े. छोड़ते भी कैसे चिराग पासवान की वजह से ही तो बिहार विधानसभा में जेडीयू के लिए पचास का आंकड़ा छूना दूभर हो गया. हालांकि, लाख कोशिशों के बावजूद बीजेपी एक नंबर से आरजेडी से पिछड़ कर दूसरे नंबर की पार्टी हो गयी.

चुनाव बाद चिराग पासवान को उम्मीद रही होगी कि बीजेपी नेतृत्व खासकर प्रधानमंत्री मोदी उनको इनाम जरूर देंगे. पिता की राज्य सभा सीट, पिता के हिस्से का मंत्री पद और जो चिराग पासवान ने विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिए किया था उसके बदले तो कुछ भी कम ही होता.

चिराग पासवान ने तो अपनी तरफ से कोई कसर बाकी नहीं रखी और ऊपर से मुफ्त में नीतीश कुमार से जिंदगी भर की दुश्मनी भी मोल ली, लेकिन फिर नीतीश कुमार के ही दबाव में बीजेपी ने चिराग पासवान से हाथ पीछे खींच लिया - और जब चिराग पासवान ने अपने बूते पटरी से उतर चुकी राजनीति को संवारने की कोशिश कर रहे थे तभी प्रधानमंत्री मोदी ने सरप्राइज एंट्री मार दी.

तेजस्वी यादव और लालू प्रसाद यादव बार बार इशारे कर रहे थे और चिराग पासवान को अपनी तरफ खींचने की कोशिश कर रहे थे. चिराग पासवान को अच्छी तरह मालूम था कि एक मुलाकात भी उन पर भारी पड़ सकती है अगर बीजेपी नेतृत्व के मन में कुछ भी उनके लिए करने को बचा हो वैसी स्थिति में. रामविलास पासवान के बर्थडे पर भी चिराग पर लालू परिवार की तरफ से डोरे डाले गये लेकिन चिराग पासवान ने बड़ी समझदारी से सब हैंडल कर लिया.

चिराग पासवान के साथ प्लस प्वाइंट ये रहा कि एलजेपी कार्यकर्ता उनके साथ हैं - और पासवान वोट बैंक के बीच पैठ बरकरार है. पिता की जन्मतिथि और पुण्यतिथि दोनों ही मौकों पर चिराग पासवान ने जड़ों से जुड़ने की कोशिश भी की. हाजीपुर तो गये ही, पहली बरसी पर पैतृक गांव शहरबनी भी गये और बड़ी मां यानी पासवान की पहली पत्नी से उनके गले मिलने की तस्वीरें भी मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से उनके समर्थकों तक पहुंचीं.

नीतीश कुमार की चिराग पासवान से निजी दुश्मनी की खास वजह है. बिहार चुनाव में तो चिराग पासवान ने नीतीश कुमार के खिलाफ जो किया वो तो किया ही, पहले से भी लगातार वो हमलावर रुख ही अपनाये रहे. राजनीतिक बयानबाजी की बात और है ऐसा भी नहीं कि चिराग के पिता पासवान और नीतीश कुमार के बीच कोई अच्छे संबंध रहे हों. दरअसल, नीतीश कुमार को हमेशा इस बात का मलाल रहा कि पहली बार जब लालू की पार्टी को शिकस्त मिली थी, तब पासवान चाहते तो वो मुख्यमंत्री बन सकते थे, लेकिन पासवान ने ऐसा नहीं किया. ताउम्र रिश्ता एक जैसा ही रहा. चुनावों से पहले दोनों की मुलाकातों की तस्वीरें जरूर आयीं, लेकिन उसका कोई खास मतलब नहीं रहा.

पासवान की बरसी के बहाने चिराग पासवान ने लालू प्रसाद से भी मुलाकात कर ली. मुलाकात हुई तो बातें भी हुई ही होंगी. एक दूसरे को कॉमन मिनिमम प्रोग्राम वाले अंदाज में भरोसा भी दिलाया गया होगा. तय भी हुआ हो सकता है कि सही वक्त पर सारी बातें सार्वजनिक भी कर दी जाएंगी - लेकिन तभी प्रधानमंत्री मोदी ने पासवान को लेकर एक इमोशनल चिट्ठी लिखी और चिराग पासवान को भेज दिया. फोन कर हालचाल भी लिये और ये सब चिराग पासवान ने ट्विटर पर अपडेट भी कर दिया.

प्रधानमंत्री मोदी ने चिट्ठी में पासवान की काफी तारीफ की, 'स्वतंत्र भारत के राजनीतिक इतिहास में पासवान जी का हमेशा अपना एक अलग स्थान रहेगा... साठ के दशक में पासवान जी ने जब चुनावी राजनीति में कदम रखा था, उस समय देश का परिदृश्य बिल्कुल अलग था - तब देश की राजनीति मुख्य रूप से केवल एक राजनैतिक विचारधारा के अधीन थी, लेकिन पासवान जी ने अपने लिए एक अलग और कठिन रास्ता चुना.'

और आज के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत भी बताया, 'आज जो युवा राजनीति को जानना और समझना चाहते हैं, या फिर राजनीति के माध्यम से देश की सेवा करना चाहते हैं, पासवान जी का जीवन उन्हें काफी कुछ सिखा सकता है - हमेशा चेहरे पर मुस्कान लिये मिलने वाले रामविलास जी... सभी के थे... जन-जन के थे.'

अब तो मुश्किल ये है कि चिराग पासवान करें तो क्या करें? नीतीश कुमार से दुश्मनी तो निभा भी लेंगे, जिनके हनुमान हैं उनके खिलाफ जायें तो कैसे जायें - वो भी तब जब उम्मीदों के उलट नये सिरे से कृपा बरस रही हो!

नीतीश पर नकेल की तैयारी तो नहीं

विधानसभा चुनाव में बुरी तरह पछाड़ने के बाद बीजेपी ने नीतीश कुमार के छह विधायक अरुणाचल प्रदेश में भी झटक लिये. मजबूरी ऐसी की नीतीश कुमार उफ तक न बोल सके. हां, पार्टी में इतना इंतजाम जरूर कर दिया था कि भड़ास निकालने का रास्ता बना रहे. जेडीयू नेताओं ने अपने अपने तरीके से बीजेपी नेतृत्व को खूब खरी खोटी भी सुनायी.

सरकार बनती उससे पहले ही नीतीश कुमार के सबसे खास सहयोगी रहे सुशील कुमार मोदी को उनसे दूर कर दिया. नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री रहते डिप्टी सीएम की जो जोड़ी बनी थी, बीजेपी नेतृत्व ने तोड़ दिया. सरकार भी बनी तो मंत्रियों के नाम से लेकर विभागों पर भी अपनी ही चलायी. ऊपर से एक डिप्टी सीएम हटा कर दो-दो डिप्टी सीएम अगल बगल बिठा डाले - और बाद में सुशील मोदी के रिप्लेसमेंट के रूप में निगरानी के लिए स्थायी तौर पर सैयद शाहनवाज हुसैन को भी वहीं शिफ्ट कर दिया.

नीतीश कुमार करते भी तो क्या करते चुपचाप सब सहते रहे, लेकिन जैसे ही देखा कि जातीय जनगणना की मांग जोर पकड़ने लगी - आव न देखा ताव नीतीश कुमार ने तपाक से लपक लिया. जिस तेजस्वी यादव को देखना तक नहीं चाहते थे, उनसे मिलते ही जातीय जनगणना पर प्रतिनिधि मंडल के नेतृत्व के लिए तैयार हो गये - और प्रधानमंत्री मोदी से समय लेकर सदल बल मुलाकात भी कर आये. खास बात ये रही कि नीतीश कुमार अपने साथ जो प्रतिनिधि मंडल लेकर कर गये थे उसमें बीजेपी के एक विधायक को भी शामिल होना पड़ा था - जाहिर है ये सब प्रधानमंत्री मोदी या बीजेपी नेता अमित शाह और जेपी नड्डा को बुरा ही लगा होगा.

पासवान की पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री मोदी का बयान तो बनता है, पासवान वोट बैंक का जो सवाल है - और वो भी तब उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाले हैं. चिट्ठी लिखते भी तो किसे भेजते, चिराग पासवान को ही भेजना होता - लेकिन नीतीश कुमार को सबसे बुरा लगा होगा प्रधानमंत्री मोदी का फोन कर चिराग पासवान से बात करना. क्योंकि एक चिट्ठी जो सार्वजनिक कर दी जाये उसमें और फोन पर बातचीत में काफी फर्क है.

ऊपर से जो बची खुची कसर रही, बिहार बीजेपी के नेताओं न पूरी कर दी है - ये बता कर कि लोक जनशक्ति पार्टी भी एनडीए का ही हिस्सा है और पार्टी है तो चिराग पासवान भी हुए ही.

चिराग पासवान के एनडीए से जुड़े होने-न होने के सवाल पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा कि स्पष्ट है। जो एनडीए के पार्ट हैं, वे सामने हैं। आज पशुपति कुमार पारस केन्द्र सरकार में मंत्री हैं तो लोजपा हमारे गठबंधन का हिस्सा है। चिराग पासवान पर कुछ भी बोलने से बचते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति का नहीं पार्टी का मसला है।

बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय जायसवाल ने तो राजनीतिक बयान दिया, लेकिन नीतीश सरकार में ही मंत्री बीजेपी नेता नीरज कुमार बबलू ने साफ तौर पर बोल दिया कि चिराग पासवान एनडीए का हिस्सा हैं और आगे भी रहेंगे.

बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय जायसवाल ने समझाया कि पशुपति कुमार पारस जब मोदी कैबिनेट का हिस्सा हैं तो लोक जनशक्ति पार्टी एनडीए से अलग कैसे हुई?

बात जब चिराग पासवान की उठी तो बातों में उलझाने की कोशिश किये, 'व्यक्ति की बात नहीं, दल की बात है... व्यक्ति कुछ नहीं होता... आज लोक जनशक्ति पार्टी एनडीए का हिस्सा है और पार्टियां व्यक्ति से नहीं होती... पार्टी पार्टी होती है - व्यक्ति से समझौता नहीं होता, पार्टी का समझौता होता है.'

बिहार चुनाव शुरू होने से लेकर अब तक की बात करें तो ये पहला मौका है जब बीजेपी की तरफ से चिराग पासवान का जिक्र हुआ है - क्योंकि माना जा रहा था कि नीतीश कुमार के सख्त ऐतराज के चलते चिराग पासवान के मामले में बीजेपी की तरफ से पूरी तरह खामोशी अख्तियार कर ली गयी थी.

सवाल ये है कि बीजेपी नेतृत्व ने चिराग पासवान के कंधे पर एक बार फिर बंदूक रख कर नीतीश कुमार को मैसेज दे दिया - लेकिन चिराग पासवान के हिस्से में भी कुछ बचा है क्या?

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लेखक

मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkieshindi

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

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