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Updated: 23 अगस्त, 2020 05:53 PM
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गुजरात (Gujarat ), महाराष्ट्र (Maharashtra) कर्नाटक (Karnataka) और दिल्ली (Delhi) को प्रभावित करने के बाद उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) कोरोना वायरस (Coronavirus) के निशाने पर है. मौजूदा वक्त में यूपी में 1,67,510 लोग कोरोना वायरस की चपेट में (Corona cases in UP) हैं. जिनमें 24,127 लोग होम आइसोलेशन में हैं. जबकि 1766 लोगों का इलाज प्राइवेट अस्पतालों में चल रहा है और 281 लोग सेमी पेड व्यवस्था के जरिये अपना इलाज करा रहे हैं. यूपी में भले ही 2,691 लोगों ने कोरोना के चलते दम तोड़ दिया हो मगर राज्य की योगी सरकार (Yogi Government) का दावा है कि सूबे में कोरोना को लेकर कोई समझौता नहीं किया जा रहा है और लोगों को बेहतर से बेहतर इलाज मुहैया कराया जा रहा है. एक तरफ सरकार के दावे हैं. दूसरी तरह समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के एमएलसी सुनील सिंह यादव (Sunil Singh Yadav) हैं जिन्होंने लखनऊ पीजीआई (Lucknow PGI) में इलाज की जो सच्चाई बताई है वो यदि सत्य है तो फिर स्थिति बेहद गंभीर है. इसमें कोई शक नहीं है कि कोरोना की आड़ में सुनील सिंह यादव ने राजनीति की है लेकिन अगर उनके दावे सत्य है तो फिर अब वो वक़्त आ गया है जब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को कोरोना के प्रति सजग हो जाना चाहिए और इस महामारी के प्रति अपना ढीला ढाला रवैया त्याग देना चाहिए.

Coronavirus, UP, Chetan Chauhan, Sunil Singh Yadav, PGI सपा के सुनील सिंह यादव ने कोरोना के मद्देनजर यूपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं

सपा एमएलसी सुनील सिंह यादव का एक वीडियो इंटरनेट पर बड़ी ही तेजी के साथ वायरल हुआ है.वायरल वीडियो में सुनील, विधानसभा सत्र में कोरोना के मद्देनजर अपनी बात रख रहे हैं. मौके पर उन्होंने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तीखी आलोचना की है और बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में कोरोना को लेकर झूठ बोला जा रहा है.

वीडियो में जैसा सुनील सिंह यादव का अंदाज है और जिस तरह इसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार में केबिनेट मंत्री रह चुके दिवंगत चेतन चौहान के साथ पीजीआई के डॉक्टर्स द्वारा की गई शर्मनाक हरकत का जिक्र किया है मालूम पड़ता है कि सरकारी दावों के विपरीत कोरोना को लेकर स्थिति बिल्कुल भी अच्छी नहीं है. यकीन मानिए सुनील की बातें रौंगटे खड़े करने वाली है.

बता दें कि अभी गुजरे दिनों ही पूर्व क्रिकेटर और यूपी सरकार में होम गार्ड मंत्री रहे चेतन चौहान की मृत्यु हुई है जिनका इलाज पीजीआई लखनऊ में चल रहा था. वहीं बात अगर सुनील यादव की हो तो अभी गुजरे दिनों ही सुनील भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं और पीजीआई लखनऊ में रहकर अपना इलाज करा रहे थे. बकौल सुनील वो और चेतन चौहान एक ही वार्ड में एडमिट थे और यदि आज वो हमारे बीच नहीं हैं तो ये मौत कोरोना के चलते नहीं हुई है बल्कि इसका एक बड़ा कारण वो अव्यवस्था है जिसका सामना चेतन चौहान को करना पड़ा.

बात एकदम सीधी और शीशे की तरह साफ है. सुनील कोरोना को हथियार बनाकर और स्वर्गीय चेतन चौहान के कंधे पर बंदूक रखकर योगी आदित्यनाथ को घेरने का प्रयास करते हुए अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं. अब चूंकि सुनील के दावों का सत्य बताने चेतन चौहान नहीं प्रकट होने वाले इसलिए इसपर अभी कुछ कहना जल्दबाजी है लेकिन अगर इन बातों में जरा भी सच्चाई है तो फिर ये साफ हो जाता है कि उत्तर प्रदेश में हकीकत कुछ और है और फ़साना कुछ और.

बेहतर है कि सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ इन बातों का संज्ञान लें. यदि पीजीआई के डॉक्टर्स ने एक जनप्रतिनिधि रहते हुए दिवंगत चेतन चौहान के साथ बदसलूकी की है तो उनके खिलाफ सख्त से सख्त एक्शन लिया जाए ताकि सूबे की जनता के साथ साथ विपक्ष को भी सबक मिले की कोरोना के तहत राज्य सरकार बिल्कुल भी बेपरहवाह नहीं है. साथ ही उसके दावों में कहीं से कोई खोट नहीं है.

बहरहाल अब जबकि सुनील यादव अपनी बात रख चुके हैं. तो देखना दिलचस्प रहेगा कि यूपी सरकार और स्वयं सीएम योगी आदित्यनाथ इसका क्या संज्ञान लेते हैं? लेते भी हैं या फिर चेतन चौहान की मौत भी कोरोना से हुई मौतों की फेहरिस्त में एक नम्बर बन कर रह जाती है? यूपी सरकार को समझना होगा कि सुनील ने उसपर गंभीर आरोप लगाए हैं और यदि इन बातों का खंडन नहीं किया जाता है तो इसके दूरगामी परिणाम न तो राज्य सरकार के हित में होंगे न ही सीएम योगी आदित्यनाथ के.

अंत में हम बस ये कहकर अपनी बात को विराम देंगे कि यूपी में कोरोना के तहत स्थिति गंभीर है. जिस हिसाब से रोज नए मामले आ रहे हैं. यदि इनको अब भी राज्य सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया तो वो दिन दूर नहीं है जब एक राज्य के रूप में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, कर्नाटक और गुजरात जैसे राज्यों को कोसों पीछे छोड़ देंगे और उत्तर प्रदेश उस स्थिति में आ जाएगा जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की हो.   

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