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Updated: 24 मार्च, 2019 12:54 PM
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल पहुंच कर साफ कर दिया है कि विपक्षी दलों की रैलियों से वो परहेज क्यों करते रहे हैं. कोलकाता में ममता बनर्जी के बाद दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने भी विपक्षी दलों की रैली की थी. उसी कड़ी में चंद्रबाबू नायडू की अमरावती रैली अभी होने वाली है. राहुल गांधी विपक्षी नेताओं के साथ मंच शेयर नहीं करते, हालांकि, बंद कमरों में होने वाली मीटिंग में वो शामिल होते हैं. कांग्रेस के दूसरे दलों के साथ गठबंधन को लेकर वो राज्यों के नेताओं की मंशा आगे कर देते हैं. यूपी में तो ऐसी नौबत ही नहीं आ सकी, लेकिन पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली और आंध्र प्रदेश के मामलों में राहुल गांधी के पास रटा-रटाया एक ही बहाना होता है.

पश्चिम बंगाल के मालदा में राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ जिस तरह का हमला बोला है - उससे तो यही लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ गठबंधन के आसार बहुत कम हैं. विपक्ष का ये बिखराव मोदी की सत्ता में वापसी की राह आसान बना रही है, ऐसा समझा जा सकता है.

ममता के खिलाफ राहुल के बीजेपी जैसे बोल

कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड से विपक्षी दिग्गजों ने एक सुर में बीजेपी की केंद्र में वापसी नहीं होने देने का जो संकल्प दिखाया था, कांग्रेस भी उसका हिस्सा रही. ममता की रैली में राहुल गांधी खुद तो नहीं गये थे लेकिन अपने प्रतिनिधि के तौर पर अभिषेक मनु सिंघवी और मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा जरूर था - और वे भी ममता के मेहमानों से हर बात में इत्तेफाक जताते देखे गये. मगर कांग्रेस का वो रूख हाथी के दांत जैसा लगता है - खाने के और दिखाने के और.

राहुल गांधी ने ममता बनर्जी को झूठा करार दिया है. राहुल गांधी ने ममता बनर्जी और नरेंद्र मोदी को एक ही जैसा करार दिया है. राहुल गांधी ने जो आरोप ममता बनर्जी पर लगाये हैं वो मोदी पर भी लगाते रहते हैं.

राहुल गांधी के अनुसार, एक तरफ मोदी झूठ बोलते हैं तो दूसरी तरफ ममता बनर्जी झूठे वादे करती हैं. पश्चिम बंगाल में सिर्फ एक व्‍यक्ति पूरा प्रदेश चलाता है - वो किसी की बात नहीं सुनता. क्या एक व्यक्ति को पूरा प्रदेश चलाने देना चाहिए?

ये तो हुई राहुल गांधी द्वारा ममता बनर्जी और नरेंद्र मोदी की तुलना की बात. राहुल गांधी ने लेफ्ट और ममता सरकार की भी तुलना की और एक जैसा बताया. बीजेपी नेता भी तो ऐसी ही बातें करते हैं. राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेसियों को वहां मारा जाता है, बीजेपी कहती है कि उसके कार्यकर्ताओं को मारा जाता है. वैसे पंचायत चुनाव में तो वाम दल भी ममता बनर्जी और तृणमूल कार्यकर्ताओं पर यही आरोप लगा रहे थे.

रैली में राहुल गांधी ने कहा, 'आपने सालों सीपीएम की सरकार देखी. इसके बाद ममता की सरकार चुनी, लेकिन इस सरकार में अत्याचार हो रहा है. यहां कांग्रेसियों को मारा जाता है.'

narendra modiविपक्ष में बिखराव मोदी से आसान होती मोदी की राह...

ये सब समझाने के बाद राहुल गांधी ने बंगाल की तरक्की के लिए कांग्रेस की सरकार की जरूरत बतायी. राहुल गांधी ने वादा भी किया - 'देश में जब कांग्रेस की सरकार बनेगी तो मैं आपकी जरूरतों को पूरा करूंगा. मैं आपकी मदद करूंगा. ये पुराना रिश्ता है. ये राजनीतिक रिश्ता नहीं है, दिल का रिश्ता है.'

मालदा राहुल गांधी का भाषण सुनकर ऐसा लगता है जैसे बीजेपी की स्क्रिप्ट हो. राहुल गांधी ने तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी पर बिलकुल वैसे ही हमला बोला है जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह किया करते हैं. अगर राहुल गांधी और मोदी-शाह के भाषणों पर गौर करें तो बहुत सारे शब्द मिलते जुलते लगते हैं लेकिन जो शब्द सबसे ऊपर है वो है - झूठा.

ये तो बीजेपी के फायदे की बात हो रही है

कांग्रेस अब तक जिन राज्यों में ठीक ठाक गठबंधन दिखता है तो वे हैं - बिहार, तमिलनाडु और जम्मू-कश्मीर. दिल्ली में कोई सर्वे करा रहा है तो कोई कांग्रेस नेता कह रहा है कि उसे मालूम ही नहीं. आप की ओर से कहा जा रहा है कि अब तो गठबंधन का सवाल ही नहीं पैदा होता. आंध्र प्रदेश का पहले से ही साफ है. यूपी में तो अभी कांग्रेस नेता आपस में ही फ्रंटफुट पर शॉट्स खेल रहे हैं. किसी की सीट बदली जा रही है तो किसी का मान-मनौव्वल चल रहा है.

अब तक कांग्रेस ये मैसेज देने की कोशिश करती रही कि राज्यों में कांग्रेस नेता अपने स्तर पर अलग अलग लड़ेंगे और केंद्र में पार्टी का सभी दलों के साथ गठबंधन कायम रहेगा.

ममता बनर्जी तो अब भी राहुल गांधी को ज्यादा भाव नहीं देतीं. वो दिल्ली में सोनिया से तो मिलने जाती हैं लेकिन राहुल गांधी की परवाह भी नहीं करतीं. राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बन जाने के बहुत बाद ममता बनर्जी के रूख में थोड़ा बदलाव आया है.

क्या ममता बनर्जी जैसे नेता से राहुल के इस भाषण के बाद कांग्रेस के साथ होने की अपेक्षा की जा सकती है? पहले अखिलेश यादव कांग्रेस के साथ होने की बात करते रहे, लेकिन मायावती के कोई नाता न रखने के ऐलान के बात तो उन्होंने भी चुप्पी साध ली है.

जिस तरह विपक्षी खेमा आपस में लगातार टकरा रहा है - वो सब तो सीधे सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पक्ष में जा रहा है. पुलवामा की घटना के बाद विपक्ष के सारे नेता मानने लगे हैं कि बीजेपी को फायदा मिल सकता है - फिर भी चुन चुन कर ऐसे बयान दे रहे हैं जिससे माहौल खिलाफ बनता जा रहा है.

अब तक न तो विपक्षी खेमे में किसी नेता का कद इस लेवल तक पहुंचा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुलेआम चैलेंज कर सके - ऊपर से ऐसा आपसी टकराव तो बिखरे विपक्ष का ही सबूत पेश कर रहा है. ये तो रवैया तो कुल्हाड़ी पर पैर मारने जैसा ही है - क्योंकि इससे राह तो नरेंद्र मोदी और अमित शाह की ही आसान हो रही है.

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