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Updated: 11 अक्टूबर, 2020 12:11 PM
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चिराग पासवान ने हाल ही में तेजस्वी यादव को छोटा भाई बताया था - और शुभकामना भी दी थी. बीजेपी (BJP) की तरफ से तो किसी ने कुछ नहीं कहा, लेकिन जेडीयू नेताओं को चिराग पासवान (Chirag Paswan) का ये रवैया ठीक नहीं लगा. जेडीयू का कहना रहा कि एक तरफ तो चिराग पासवान, नरेंद्र मोदी जिंदाबाद बोल रहे हैं, दूसरी तरफ तेजस्वी यादव को शुभकामना दे रहे हैं - लेकिन बीजेपी को इस बात से कोई ऐतराज नहीं है. ऐसा लगता है जेडीयू नेताओं को बीजेपी के एक सर्वे रिपोर्ट की खबर मीडिया में आने से ज्यादा चिढ़ मची है.

बीजेपी के एक आंतरिक सर्वे में नीतीश कुमार को लेकर कई बातें पता चली थीं, लेकिन पार्टी को दो ही चीजें परेशान करने वाली लगीं. एक, नीतीश कुमार के खिलाफ बिहार में सत्ता विरोधी लहर और दूसरी, लालू प्रसाद यादव को लेकर कहीं न कहीं सॉफ्ट होना, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित सभी नेता सीधा हमला बोलते हैं. ऐसा भी नहीं कि नीतीश कुमार बिलकुल खामोश रहते हैं, ऐसे किसी भी कार्यक्रम में वो जंगलराज को याद करना नहीं भूलते जहां उससे राजनीतिक फायदा मिल सकता हो, लेकिन बीजेपी का सर्वे रिपोर्ट को लेकर चिंतित होना भी स्वाभाविक है.

लेकिन सवाल तो जेडीयू नेताओं का भी वाजिब है - आखिर बीजेपी को चिराग पासवान के तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) को लेकर सदाशयता के इजहार से आपत्ति क्यों नहीं है?

कई मुद्दों पर चिराग और तेजस्वी एक राय देखे गये

चिराग पासवान ने जब एलजेपी को बिहार एनडीए से अलग नहीं किया था तब भी, उनका रुख बीजेपी जैसा स्पष्ट कभी नहीं देखने को मिला. बीजेपी की राजनीतिक लाइन तो यही रही है कि वो आरजेडी और महागठबंधन के विरोध में और नीतीश कुमार के साथ रही है, जब से जेडीयू ने एनडीए में वापसी की है - लेकिन चिराग पासवान को साफ तौर पर एक तरफ कम ही देखा गया.

जितने मुखर और आक्रामक चिराग पासवान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर देखे गये हैं, आरजेडी के प्रति कभी वैसी स्पष्टवादिता या कड़ा विरोध नहीं देखने को मिला है. खासकर जब से चिराग पासवान बिहार चुनाव को लेकर एक्टिव हुए और अपने विजन डॉक्युमेंट पर काम करना शुरू किया - बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट. चिराग पासवान ने ट्विटर पर अपने नाम से पहले 'युवा बिहारी' वैसे ही जोड़ रखा है जैसे आम चुनाव के दौरान राहुल गांधी के 'चौकीदार चोर है' के विरोध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सारे बीजेपी नेताओं ने 'चौकीदार' जोड़ लिया था.

न्यूज एजेंसी ANI ने इंटरव्यू के दौरान चिराग पासवान से एक सवाल तेजस्वी यादव के खुद को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किये जाने पर पूछा था.

जवाब में चिराग पासवान बोले, 'वो मेरे छोटे भाई हैं. मैं अपनी तरफ से उन्हें शुभकामनाएं देता हूं. लोकतंत्र में लोगों के पास जितने ज्यादा विकल्प हों, वही सही होता है. जनता को तय करने देते हैं कि वो किसे अपने नेता के तौर पर देखना चाहते हैं.'

चिराग पासवान की ये प्रतिक्रिया वैसे ही लगी जैसे अरविंद केजरीवाल के आम आदमी पार्टी बनाने पर ज्यादातर नेताओं की रही - स्वागत है. अच्छा है खुल कर राजनीति में आ गये. हो सकता है चिराग पासवान ऐसी ही भावना का इजहार किये हों, लेकिन जेडीयू नेताओं की आपत्ति भी अपनी जगह सही है.

nitish kumar, chirag paswanजिस बात पर चिराग पासवान और नीतीश कुमार एक जैसा व्यवहार करते हैं, बीजेपी अलग क्यों?

जब सिर पर चुनाव हों तो किसी नेता से अपने विरोधी के बारे में ऐसी बातें कम ही सुनने को मिलती हैं. ऊपर से जेडीयू नेताओं को ज्यादा बुरा इसलिए भी लगा क्योंकि एक ही मुद्दे पर बीजेपी की तरफ से डबल स्टैंडर्ड देखने को मिला - नीतीश कुमार को लेकर अलग और चिराग पासवान को लेकर बिलकुल अलग.

एक बात तो साफ है जिस तरह के आरोप प्रत्यारोप आरजेडी और जेडीयू या आरजेडी और बीजेपी में देखने को मिलते रहे हैं, आरजेडी और एलजेपी के बीच सुनने को नहीं मिलते. तेजस्वी यादव ऐसा कोई भी मौका नहीं छोड़ते जिसमें वो नीतीश कुमार को घेर सकते हों. भले ही लॉकडाउन और कोरोना के चलते नीतीश कुमार के घर से ही काम करने की बात क्यों न हो. चिराग पासवान को लेकर तेजस्वी की तरफ से ऐसी कोई बात सुनने को नहीं मिली है - और न ही चिराग पासवान ने कभी तेजस्वी यादव के मुश्किल वक्त में बिहार से बाहर होने पर सवाल उठाया है. सबसे खास बात कई मौके तो ऐसे भी आये हैं जब चिराग पासवान और तेजस्वी यादव का स्टैंड बिलकुल एक जैसा देखने को मिला है.

सुशांत सिंह राजपूत केस अब भले ही चुनावी मुद्दा न रह गया हो, लेकिन उनके परिवार की आवाज उठाने वालों में तेजस्वी यादव और चिराग पासवान सबसे आगे रहे. तेजस्वी यादव ने बाहर तो सीबीआई जांच की मांग की ही, विधानसभा में भी ये डिमांड रखी. चिराग पासवान ने भी ट्विटर पर लगातार सुशांत सिंह का मामला उठाया और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से बात भी की. बाद में चिराग पासवान ने नीतीश कुमार से भी इस मुद्दे पर बात की थी.

चिराग पासवान और तेजस्वी यादव दोनों एक राय बिहार में विधानसभा चुनाव कराये जाने को लेकर भी रही. चिराग पासवान और तेजस्वी यादव दोनों ने ही कोविड 19 की वजह से चुनाव आयोग से चुनाव टालने की मांग किये, जबकि नीतीश कुमार और बीजेपी हमेशा ही समय पर चुनाव कराये जाने के पक्षधर रहे.

रही बात नीतीश कुमार के प्रति हमलावर रुख की तो दोनों में रेस ही मची रहती है - और एनडीए छोड़ने की घोषणा के बाद तो चिराग पासवान ने जेडीयू उम्मीदवारों के खिलाफ अपने प्रत्याशी भी खड़े कर दिये हैं.

ये चाचा-भतीजे का रिश्ता क्या कहलाता है

तेज प्रताप यादव और ऐश्वर्या के रिश्ते को लेकर नीतीश कुमार भी लालू यादव के परिवार की तरह ही दुखी देखे गये थे. सूत्रों के हवाले से आई खबर के मुताबिक नीतीश कुमार ने कई बार तेज प्रताप को समझाने की कोशिश की कि आपसी विचार-विमर्श से और मिल बैठकर मनमुटाव को दूर करने की कोशिश करें - और किसी भी सूरत में गृहस्थी को तबाह न होने दें.

बताते हैं उस दौरान रात को भी तेज प्रताप कॉल किया करते थे और नीतीश कुमार रिसीव भी करते और समझाने की कोशिश करते. उसी दौरान तेज प्रताप ने तलाक की अर्जी देने के साथ ही अपने लिए अलग रहने का इंतजाम करने में जुट गये. जब अफसरों ने तेज प्रताप की बातों को अनसुना कर दिया तो सीधे नीतीश कुमार को फोन लगाया और बोले, 'चाचा, मुझे घर नहीं मिलेगा?'

ये भी बताते हैं कि उसके बाद नीतीश कुमार ने लालू यादव से बात की और फिर तेज प्रताप को बंगाल अलॉट हो गया. नीतीश कुमार नहीं चाहते थे कि कोई ऐसा मैसेज जाये कि वो लालू यादव का परिवार तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. तेज प्रताप यादव को स्ट्रैंड भवन रोड पर बंगला मिला है. जिस दिन महागठबंधन के सीटों के बंटवारे का ऐलान होने वाला था तेज प्रताप की तबीयत अचानक खराब हो गयी थी. तभी तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी दौड़े दौड़े तेज प्रताप के बंगले पर पहुंचे और उनको साथ लेकर आये - बाद में तेज प्रताप भी प्रेस कांफ्रेंस में तेजस्वी यादव के साथ बैठे देखे गये थे.

अपवादों की बात और है, वरना रिश्तों में राजनीति को आड़े आते नहीं देखा गया है. लालू यादव के परिवार के प्रति नीतीश कुमार और चिराग पासवान दोनों अपने अपने तरीके से एक जैसी ही भावना को प्रदर्शित कर रहे हैं, लेकिन बीजेपी दोनों के रुख को अलग अलग नजरिये से देख रही है - जाहिर है बीजेपी का दोनों के प्रति नजरिया और राजनीति हित-अहित का मकसद भी अलग है.

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