charcha me| 

होम -> सियासत

 |  6-मिनट में पढ़ें  |  
Updated: 28 नवम्बर, 2021 08:36 PM
देवेश त्रिपाठी
देवेश त्रिपाठी
  @devesh.r.tripathi
  • Total Shares

आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) अपने 'मिशन पंजाब' को सफल बनाने की कोशिशों में लगे हुए हैं. इसी के तहत अपने हालिया पंजाब दौरे पर अरविंद केजरीवाल दिल्ली सरकार की मुफ्त बिजली योजना के सबूत के तौर पर के 'जीरो' वाले एक लाख बिल लेकर मोहाली पहुंचे थे. केजरीवाल इस कार्यक्रम में इन बिजली बिलों के सहारे पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को केवल एक हजार बिल ही पेश करने की चुनौती देने में कामयाब भी हुए. लेकिन, इस कार्यक्रम की शुरुआत में ही दिल्ली के मुख्यमंत्री को सीएम उम्मीदवार के नाम की घोषणा की समस्या से दो-चार होना पड़ गया, जो केजरीवाल के लिए पंजाब में सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुकी है. अरविंद केजरीवाल के भाषण शुरू होने के साथ ही वहां सीएम के नाम को लेकर आम आदमी पार्टी के पंजाब प्रधान भगवंत मान के समर्थन में नारेबाजी होने लगी. जिसकी वजह से उन्हें अपना भाषण रोकना पड़ा. भगवंत मान का इस तरह से केजरीवाल के सामने शक्ति प्रदर्शन लंबे समय से चल रहा है. 

दरअसल, पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के सीएम उम्मीदवार की घोषणा (CM Face) को लेकर अरविंद केजरीवाल पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. दिल्ली के जैसी ही मुफ्त बिजली, अस्पताल, शिक्षा, महिलाओं के खाते में हर महीने 1000 रुपये समेत तमाम योजनाओं के साथ आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) ने मतदाताओं के बीच में अपने पक्ष में काफी हद तक माहौल बना दिया है. और, रही सही कसर सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के खिलाफ उनकी ही पार्टी के पंजाब कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) बार-बार इस्तीफा देने की धमकी से पूरी किए दे रहे हैं. केजरीवाल ने बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद और WWE पहलवान खली को पार्टी में शामिल कर आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता को बढ़ाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है. आसान शब्दों में कहा जाए, तो पंजाब में केजरीवाल के लिए सिवाय भगवंत मान (Bhagwant Mann) के सब कुछ मुफीद है.

आम आदमी पार्टी में सिर्फ केजरीवाल ही लेंगे 'फैसला'

अरविंद केजरीवाल के कार्यक्रम में नारेबाजी को रोकने के लिए भगवंत मान ने कार्यकर्ताओं से कहा था कि 'इन्हें (केजरीवाल) सुन लीजिए. ये बड़ी दूर से पंजाब आए हैं. पार्टी के राष्ट्रीय कन्वीनर हैं, कम से कम इन्हें कुछ सम्मान दीजिए.' जिसके बाद अरविंद केजरीवाल को नारेबाजी करने वाले लोगों को एक तरह से चेतावनी देते हुए कहा था कि 'आम आदमी पार्टी में किसी को मंत्री या विधायक बनाने के लिए मत आइए. अगर ये करने के लिए पार्टी में आए हैं, तो कुछ होने वाला नही है. हम पंजाब को दिल्ली की तरह बदलने आए हैं.' आसान शब्दों में कहा जाए, तो केजरीवाल ने सीधे तौर पर भगवंत मान के समर्थकों की मांग को खारिज कर दिया. लेकिन, इस बात की संभावना कम ही नजर आ रही है कि भगवंत मान की ओर से अपने शक्ति प्रदर्शन में कोई कमी लाई जाएगी. क्योंकि, पंजाब विधानसभा चुनाव के तैयारियों में जुटे अरविंद केजरीवाल की ओर हर बार सीएम चेहरे को लेकर सवाल उछाल दिया जाता है. और, वो हर बार इसे टाल जाते हैं.

दरअसल, अरविंद केजरीवाल दिल्ली की सत्ता में आने के बाद से ही आम आदमी पार्टी के विस्तार की कोशिशों में लगे हुए हैं. आम आदमी पार्टी अगर पंजाब में पूरी ताकत झोंक रही है, तो उसकी वजह ये है कि इस राज्य के सहारे ही दिल्ली के मुख्यमंत्री के लिए अन्य राज्यों के दरवाजे भी खुल सकते हैं. आसान शब्दों में कहा जाए, तो अरविंद केजरीवाल के 'मिशन 2024' के लिए 'मिशन पंजाब' बहुत अहम है. क्योंकि, पंजाब के सहारे अरविंद केजरीवाल 2024 से पहले गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस और भाजपा के बीच में आम आदमी पार्टी को एक बेहतर विकल्प के तौर पर पेश करना चाहते हैं. मिशन 2024 के तहत भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने खुद को स्थापित करने के लिए पंजाब ही एकमात्र रास्ता हो सकता है. और, यहां पर जीत के साथ आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने के सपने को पंख मिलेंगे. लेकिन, पार्टी के सांसद भगवंत मान शायद इस बात को समझना नहीं चाहते हैं. और, सत्ता लालसा के चलते अरविंद केजरीवाल के 'मिशन 2024' में एक बड़ा रोड़ा बनने की ओर लगातार कदम बढ़ा रहे हैं.

Bhagwant Mann Arvind Kejriwalसीएम चेहरे को लेकर अरविंद केजरीवाल हर बार सवाल टाल जाते हैं.

इन सबके बीच अगर आम आदमी पार्टी के पूर्व नेताओं प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, कुमार विश्वास जैसे नामों पर नजर डाली जाए, तो स्थिति साफ हो जाती है. आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल कहना गलत नहीं होगा कि अगर भगवंत मान किसी भी तरह से अरविंद के मिशन 2024 के लिए खतरा बनते हैं, तो केजरीवाल उन्हें साइडलाइन करने में बहुत ज्यादा समय नहीं लगाएंगे. हालांकि, भगवंत मान को अपना छोटा भाई बताने के साथ अरविंद केजरीवाल ये कहते नहीं थकते हैं कि मान ने पार्टी के लिए बहुत कुछ किया है. लेकिन, वो इस बात को भी साफ करने से नहीं कतराते हैं कि आम आदमी पार्टी में फैसला केवल अरविंद केजरीवाल का ही चलेगा.

केजरीवाल के पास 'बैकअप प्लान' भी है तैयार

सीएम उम्मीदवार बनने को लेकर भगवंत मान की ओर लगातार विरोध के स्वर उठाए जा रहे हैं. लेकिन, अरविंद केजरीवाल इस मामले को कोई खास तवज्जो नहीं दे रहे है. वह हर बार यही कहते दिखते हैं कि पंजाब को बदलना है. भगवंत मान भले ही आम आदमी पार्टी के कार्यक्रमों में शक्ति प्रदर्शन के जरिये दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हों. लेकिन, अरविंद केजरीवाल भी राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं. उन्होंने कांग्रेस की अंदरूनी कलह के शुरुआती दौर में जब नवजोत सिंह सिद्धू मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे. उस समय से लेकर अब चरणजीत सिंह चन्नी के सीएम बनने तक अरविंद केजरीवाल ने नवजोत सिंह सिद्धू की तारीफ करना नहीं छोड़ा है. हाल ही में केजरीवाल ने चन्नी को 'नकली केजरीवाल' घोषित किया था. लेकिन, जनता के मुद्दों को उठाने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की जमकर तारीफ की थी. पंजाब को लेकर सिद्धू के सिद्धांतों की सराहना करना परोक्ष तौर से ही सही, लेकिन भगवंत मान के लिए भी एक बड़ा इशारा है.

आसान शब्दों में कहा जाए, तो आम आदमी पार्टी के पास भगवंत मान की बगावत के लिए पहले से ही 'बैकअप प्लान' तैयार है. इन संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है कि नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी का दामन थाम लें. वैसे भी कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से हर बार सिद्धू पर कांग्रेस को कमजोर कर आम आदमी पार्टी को मजबूत करने का आरोप ही लगाया जाता रहा है. चरणजीत सिंह चन्नी के साथ चल रही नवजोत सिद्धू की सियासी खींचतान का अंत कांग्रेस आलाकमान की ओर से टिकट बंटवारे के बाद हो जाएगा. अगर टिकट बंटवारे में सिद्धू के पसंदीदा उम्मीदवारों को चयन नहीं हुआ, तो पंजाब कांग्रेस में टूट होना तय है. ये टूट आम आदमी पार्टी को तभी फायदा पहुंचाएगी, जब नवजोत सिंह सिद्धू और अरविंद केजरीवाल कंधे से कंधा मिलाकर खड़े दिखाई दें. सिद्धू को सीएम उम्मीदवार घोषित करने पर नवजोत के सामने केजरीवाल के आदेश की अवहेलना करना मुश्किल होगा. जबकि, भगवंत मान तो केजरीवाल के सामने ही उनको सीधी चुनौती दे रहे हैं.

लेखक

देवेश त्रिपाठी देवेश त्रिपाठी @devesh.r.tripathi

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं. राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

iChowk का खास कंटेंट पाने के लिए फेसबुक पर लाइक करें.

आपकी राय