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Updated: 08 अप्रिल, 2017 01:19 PM
कुमार शक्ति शेखर
कुमार शक्ति शेखर
  @KumarShaktiShekhar
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23 मार्च को शिवसेना सांसद रवीन्द्र गायकवाड़ के एयर इंडिया की फ्लाइट में 60 वर्षीय स्टाफ से मारपीट करने के बाद एयर इंडिया ने एमपी साहब को ब्लैक लिस्ट कर दिया था और अपने विमानों में उनके सफर करने पर बैन लगा दिया था. सांसद महोदय साम-दाम-दंड-भेद सब लगाकर खुद को 'मासूम' और एयरलाइंस को दोषी ठहराने की कोशिश में लगे हैं. हालांकि अब विमान कंपनी और सांसद के बीच संसद के दखल के बाद से एयर इंडिया ने बैन हटा लिया है.

खैर एयर इंडिया के इस अभूतपूर्व कदम के पीछे उसके अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) अश्विनी लोहानी का हाथ है. अपने कर्मचारियों के हितों के लिए हमेशा खड़े होने के लिए मशहूर लोहानी, अगर इस मामले में गायकवाड़ को बिना किसी सजा के छूटने देते, तो उनके जानने वालों के लिए ये दुनिया के 9वें आश्चर्य से कम नहीं होता. घटना के तुरंत बाद ही लोहानी ने शिवसेना सांसद के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज करा दी थी. यही नहीं इस मामले में उन्होंने बाकी सारे विमान कंपनियों को अपने साथ लिया और सांसद गायकवाड़ की हवाई यात्रा पर बैन लगा दिया.

air-india-759_040717061823.jpgसांसद को घुटनों पर ला दिया

एक तरफ जहां लोहानी अपने कर्मचारियों की रक्षा और न्याय के लिए मजबूती से खड़े रहे तो दूसरी तरफ इस घटना पर उन्हें नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू का भी समर्थन मिला. हालांकि ऐसा लगता है कि इस मामले में लोहानी को ना सिर्फ नागरिक उड्डयन मंत्री बल्कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से ग्रीन सिग्नल मिला हुआ था. क्योंकि इस पूरे प्रकरण का व्यापक राजनीतिक प्रभाव भी है.

भाजपा और शिवसेना केंद्र के साथ-साथ महाराष्ट्र और बीएमसी में भी सहयोगी हैं. राज्य सरकार की कमान जहां भाजपा के हाथ में है, तो शिवसेना बीएमसी पर शासन कर रही है. हालांकि लोहानी के लिए इन बातों का कोई मतलब नहीं कि कहां किसकी सरकार है या किस बड़ी पार्टी से किसी का संबंध है. उनके लिए अपने कर्मचारी और उनकी सुरक्षा ही प्राथमिकता है. शायद इसलिए ही ये कोई पहली बार नहीं है कि एयर इंडिया के इस सीएमडी ने अपने कर्मचारियों के लिए किसी बड़े या ऊंचे पद वाले व्यक्ति से पंगा लिया हो.

28 नवंबर 2015 को जब वाईएसआर कांग्रेस के सांसद मिथुन रेड्डी ने तिरुपति में एयर इंडिया के मैनेजर राजशेखर को कथित तौर पर थप्पड़ मार दिया था और उसकी हड्डी टूट गई थी. जबकि राजशेखर का दोष सिर्फ इतना था कि उसने बोर्डिंग टाइम खत्म हो जाने की वजह से रेड्डी के रिश्तेदारों को विमान के अंदर नहीं घुसने दिया था. इस मामले में भी सांसद और उनके 15 अनुयायियों के खिलाफ IPC की कई धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. और रेड्डी को 17 जनवरी, 2016 को गिरफ्तार कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. इस मामले में भी नागरिक उड्डयन मंत्री का समर्थन लोहानी मिला हुआ था.

लोहानी को टर्न अराउंड मैन के नाम से भी जाना जाता है. मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम (एमपीटीडीसी) इसका एक स्पष्ट उदाहरण है. 2003 तक एमपीटीडीसी घाटे में जा रही थी. हालात ये थे कि कॉ़र्पोरेशन निजीकरण के कगार पर खड़ी थी. 2003 में उमा भारती ने लोहानी को मध्यप्रदेश पर्यटन के प्रबंध निदेशक के पद पर नियुक्त किया. इसके बाद उन्होंने कर्मचारियों के प्रमोशन और रुकी हुई सैलेरी से लेकर कई तरह के कामों में तेजी लाते हुए कॉर्पोरेशन की काया-पलट कर दी.

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कॉर्पोरेशन में वो पेशेवर संस्कृति लेकर आए. इन कदमों ने अद्भुत रिजल्ट दिया. जल्दी ही निजीकरण के कगार पर खड़ी एमपीटीडीसी मुनाफे दर्ज करने लगी और राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने लगी. एमपी टूरिज्म के मामले में लोहानी को अपने पुराने अनुभवों से बड़ी सहायता मिली थी. इसके पहले 2002-2003 में वो भारत पर्यटन विकास निगम (आईटीडीसी) जिसमें राष्ट्रीय राजधानी का प्रतिष्ठित अशोक होटल भी शामिल है का कायापलट कर चुके थे.

आखिर बोल्ड फैसले लेने के लिए लोहानी को हिम्मत कहां से मिलती है?

लोहानी अत्यधिक पढ़े-लिखे तो हैं ही ईमानदारी इनकी रगो में बहती है. आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि लोहानी और उनका परिवार अपने निजी यात्रा के लिए एयर टिकट खरीद कर यात्रा करते हैं. एमपीटीडीसी के प्रबंध निदेशक के रूप में लोहानी और उनका परिवार इसके होटलों में फ्री में खाना खा सकता था पर उन्होंने कभी ऐसा नहीं किया.

शिक्षा के क्षेत्र में लोहानी का कोई सानी नहीं. 1980 बैच के इंडियन रेलवे सर्विस ऑफ मेकैनिकल इंजीनियर्स में पढ़े लोहानी का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है. उन्होंने इंजीनियरिंग के चार स्ट्रीम मेकैनिकल, इलेक्ट्रिकल, मेटलर्जी और इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकम्यूनिकेशन में डिग्री ले रखी है. 1998 में लोहानी ने फेयरी क्वीन का परिचालन फिर से शुरु करा कर गिनीज बुक में नाम दर्ज करा लिया था. नेशनल रेल म्यूजीयम के डारेक्टर के तौर पर काम करते हुए उन्होंने 1999 दार्जीलिंग रेलवे का नाम विश्व धरोहर की श्रेणी में दर्ज करा दिया. वहीं आईटीडीसी के सीएमडी के पद पर रहते हुए 2002 में बोधगया के बोधि मंदिर को भी विश्व धरोहर में शामिल करा दिया.

2015 में एयर इंडिया के सीएमडी नियुक्त होने के बाद गायकवाड़ की घटना लोहानी के लिए अपने कर्मचारियों का आत्मविश्वास जीतने और उनकी मदद से एयर इंडिया की काया पलट का सुनहरा मौका साबित हो रहा है.

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लेखक

कुमार शक्ति शेखर कुमार शक्ति शेखर @kumarshaktishekhar

लेखक इंडिया टुडे ग्रुप से जुड़े पत्रकार हैं.

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