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Updated: 18 मई, 2016 06:50 PM
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अमर सिंह और आजम खां में 36 का रिश्ता जगजाहिर है. आजम खां से अनबन के चलते ही अमर सिंह को 2010 में समाजवादी पार्टी से छह साल के लिए निकाल दिया गया था - और वनवास का वो पीरियड खत्म हो चुका है.

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इस मुद्दे पर आजम खां अब तक अमर सिंह के प्रति ही हमलावर रहे हैं, लेकिन इस बार उनके निशाने पर कोई और नहीं बल्कि खुद मुलायम सिंह यादव हैं.

नवंबर, 2015

पिछले साल नवंबर में मुलायम सिंह के बर्थडे पर अमर सिंह और आजम खां की अलग अलग मौजूदगी सुर्खियों का हिस्सा तो बनी ही, चर्चा इस बात की रही कि बर्थडे का असली केक मुलायम ने किसके साथ काटा. अमर सिंह के साथ या आजम खां के साथ? मालूम हुआ कि 76 किलो का केक काटने के बाद मुलायम ने एक टुकड़ा अपने हाथ से अमर सिंह को खिलाया - और अमर सिंह शाम को ही लौट गये. देर रात आजम खां भी मुलायम को बधाई देने सैफई पहुंचे.

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हम आपके दिल में रहते हैं...

जब आजम से अमर सिंह के सैफई दौरे को लेकर पूछा गया तो उनका कहना था, "अब आंधी-तूफान के साथ कीड़े मकोड़े तो आ ही जाते हैं." लेकिन जब अमर सिंह से आजम के बारे में पूछा गया तो उन्होंने हर नेता की तरह उन्हें भी अपना दोस्त बताया. जब ये बात आजम के सामने उठी तो बोले, "हमने उनसे दलाली का कोई पैसा नहीं लिया है, तो हमसे कोई दोस्ती भी नहीं है."

जब मीडिया ने थोड़ा और कुरेदा तो आजम बोले, "वो जब खुद मुलायम के साथ हो जाते हैं, तो नेताजी भगा तो देंगे नहीं. गाड़ी में तो ड्राइवर और बॉडीगार्ड भी होता है."

समाजवादी पार्टी में अमर सिंह की वापसी हो रही है क्या? ये सवाल सुन कर आजम खां भड़क गये, "अमर सिंह अपनी औकात को समझें. वो नेताजी के प्यार का गलत फायदा ना उठाएं."

दूसरी तरफ, यही बातें जब अमर के सामने उठीं तो उनका भी जवाब हमेशा की तरह शायराना रहा, "हम तो उनके दिल में रहते हैं, दल में नहीं."

अमर सिंह ने सच ही कहा था. अब तो शिवपाल यादव भी कह रहे हैं कि नेताजी ने कह दिया है कि वो उनके दिल में रहते हैं. मगर, छह साल बाद भी आजम खां का अमर के प्रति रूखापन कम नहीं हुआ है.

मई, 2016

अब तक अमर सिंह की समाजवादी पार्टी में वापसी के सवाल पर आजम खां के निशाने पर अमर सिंह ही रहा करते थे. वो हमेशा अमर सिंह को भी जीभर कर बुरा-भला कहा करते थे. लेकिन इस बार आजम खां ने जो कहा है वो बिलकुल अलग है. इस बार आजम ने अमर सिंह को कुछ भी नहीं कहा, बल्कि, सीधे सीधे मुलायम सिंह का नाम लिया है.

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आजम खान का कहना है, "नेताजी मालिक हैं और मालिक के फैसले को चुनौती देना मेरे अधिकार क्षेत्र के बाहर है. जितना मुझे लगता है यह पूरी घटना दुर्भाग्यौजनक है.”

मन की बात?

समाजवादी पार्टी में अमर सिंह जिन्हें फूटी आंख नहीं सुहाते उनमें आजम खां अकेले नहीं हैं. मुलायम के भाई प्रो. रामगोपाल यादव भी अमर सिंह को आस पास फटकने नहीं देना चाहते. बताते हैं कि रामगोपाल यादव और आजम खां दोनों ने अमर सिंह के नाम पर बार भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी लेकिन मुलायम ने उनकी बात नहीं सुनी. हां, इस मुद्दे पर रामगोपाल और आजम से उन्होंने अलग अलग बात जरूर की.

आजम खां लंबे अरसे से खुद को हाशिये पर पा रहे हैं. हाल फिलहाल सबसे बड़ा झटका उन्हें तब लगा जब मंत्रिमंडल में फेरबदल के नाम पर मुख्यमंत्री अखिलेश ने उनके खास लोगों को बाहर कर दिया. आजम इस कदर नाराज हुए कि राजभवन के समारोह से एक दिन पहले ही रामपुर निकल गये. उसके बाद से लगातार वो अपने पर कतरे हुए महसूस कर रहे हैं, ऐसी चर्चाएं होती रहती हैं.

तो क्या आजम खां के इस बयान का कोई और मतलब है? लगातार उपेक्षा होते रहने से क्या आजम खां इतने व्यथित हुए कि दिल की बात जबान पर आ गई?

2014 के लोक सभा चुनाव में पूरी समाजवादी पार्टी हार गई, लेकिन मुलायम सिंह के परिवार का हर सदस्य चुनाव जीत गया. खुद मुलायम सिंह दो-दो जगहों से चुनाव जीते. फिलहाल मुलायम सिंह के अलावा उनकी बहू डिंपल यादव, भतीजे धर्मेंद्र और अक्षय यादव और पोते तेज प्रताप यादव सभी सांसद हैं. अक्षय के पिता और मुलायम सिंह के भाई रामगोपाल राज्य सभा में पार्टी के नेता हैं. मुलायम के भाई शिवपाल यादव यूपी की राजनीति में बेहद अहम किरदार हैं जिन्हें विपक्ष साढ़े चार मुख्यमंत्रियों में से एक बताता है - और मुलायम के बेटे अखिलेश यादव तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ही हैं.

वैसे मुलायम को मालिक बता कर आजम खां ने उनकी अथॉरिटी बताई है या हकीकत पर कटाक्ष किया है? क्या आजम के बयान का आशय ये है कि पार्टी को मुलायम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चलाते हैं - फिर जो चाहें करें उनकी मर्जी!

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