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Updated: 19 फरवरी, 2021 06:03 PM
देवेश त्रिपाठी
देवेश त्रिपाठी
  @devesh.r.tripathi
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'ताकत' किसी भी चीज की हो, हमेशा लोगों का दिमाग खराब कर देती है. सत्ता की ताकत के बल पर अमानवीय कृत्यों को अंजाम देने वाले दर्जनों तानाशाहों के नाम हमारे सामने हैं. हाल ही में म्यांमार में सत्ता की चाहत ने ही सैन्य तख्तापलट में अहम भूमिका निभाई है. सत्ता की असल ताकत का प्रदर्शन तो आजकल महाराष्ट्र में हो रहा है. महाराष्ट्र में न लोकतंत्र खतरे में है, न ही किसी की व्यक्तिगत और अभिव्यक्ति की आजादी. हाल ही में महाराष्ट्र कांग्रेस के नए अध्यक्ष बने नाना पटोले ने अमिताभ बच्चन और अक्षय कुमार को सत्ता की इसी हनक में धमकी दी है. पटोले ने कहा कि अगर ये पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ नहीं बोले, तो महाराष्ट्र में उनकी फिल्मों की शूटिंग नहीं हो पाएगी. नाना पटोले की धमकी सत्ता मद में चूर होने का बेहतरीन उदाहरण है. सत्ता के नशे में नेता अपनी सीमाओं को लांघते हुए लोगों पर अपना अतिक्रमण लादने की कोशिश करने लगते हैं.

महाराष्ट्र में राजनीति की ये लड़ाई अब बॉलीवुड कलाकारों के लिए सिरदर्द बनती जा रही है. यूपीए की मनमोहन सरकार में पेट्रोल-डीजल के बढ़े दामों पर ट्वीट करने वाले इन अभिनेताओं को सत्ता पक्ष अपने हिसाब से नचाने की कोशिश कर रहा है. बॉलीवुड के कलाकार अब सेलेक्टिव तरीके से निशाने पर लिए जा रहे हैं. बीते कुछ सालों में देश में कुछ ऐसा माहौल बना दिया गया है कि अगर आप किसी विषय पर मुंह खोल रहे हैं, तो 'राज्य में किसकी सरकार है' इसका जरूर ध्यान रखें. साथ ही किसी का भी पक्ष न लें और अपने काम से काम रखें. एनसीपी नेता शरद पवार की सचिन तेंडुलकर को दी गई नसीहत से इसे समझा जा सकता है. कुछ दिनों पहले ही कांग्रेस के प्रवक्ता ने 'भारत रत्नों' समेत कई बॉलीवुड सितारों और खिलाड़ियों के ट्वीटस को लेकर जांच की मांग की थी. इन हस्तियों ने देश की एकता को दर्शाने वाले ट्वीट किए थे.

उद्धव ठाकरे सरकार राजनीति के मामले में आक्रामक 'बैटिंग' करने की हमेशा से ही पक्षधर रही है.उद्धव ठाकरे सरकार राजनीति के मामले में आक्रामक 'बैटिंग' करने की हमेशा से ही पक्षधर रही है.

उद्धव ठाकरे सरकार राजनीति के मामले में आक्रामक 'बैटिंग' करने की हमेशा से ही पक्षधर रही है. जिस समय ये ट्वीट किए गए थे, उस समय तक भाजपा और शिवसेना कागठबंधन महाराष्ट्र में हिंदुत्व की साझी विरासत को आगे बढ़ा रहा था. भाजपा से दूरी बनाना शिवसेना की निजी मजबूरी थी. सीएम बनने के बाद उद्धव ठाकरे सत्ता मोह में 'धृतराष्ट्र' की भूमिका निभा रहे हैं. वैसे इन हस्तियों का कभी 'सामना' से सामना नही हुआ, वरना वे ऐसा करने की हिम्मत ही नहीं करते. इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि उस समय शिवसेना ने ही इन कलाकारों को 'टूलकिट' भेजकर ये ट्वीट कराए हों.

महाराष्ट्र की महाविकास आघाड़ी गठबंधन की उद्धव ठाकरे सरकार इस समय पूरे देश में सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रही है. किसी जमाने में अपने विवादित बयानों से छाए रहने वाले भाजपा के बड़बोले नेताओं को कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना का गठबंधन कड़ी टक्कर दे रहा है. सत्ता की ताकत को पहचानने में शिवसेना भी पीछे नहीं रही है. कंगना रनौत और सोनू सूद इसके बेहतरीन उदाहरण हैं.

राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का खेल हमेशा से ही चलता आ रहा है. अब इस खेल के लपेटे में बड़ी हस्तियां भी आने लगी हैं. वोटों की गणित बड़ी अजीब होती है, इसके समीकरण केवल नेताओं को ही समझ आते हैं. नाना पटोले के बयान के अनुसार, इन अभिनेताओं की जवाबदेही तय होनी चाहिए. लोकतंत्र में राजनीति अगर लोगों की जवाबदेही तय करने लगेगी, तो डेमोक्रेसी की एैसी-तैसी हो जाएगी. महाराष्ट्र में जिस तरह के राजनीतिक खेल चल रहे हैं, उसे देखकर ये लाइन याद आती है कि 'अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप'. वैसे ये अभिनेता माफी मांगकर ट्वीट कर दें, तो शायद प्रकोप से बच जाएंगे.

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