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Updated: 02 मई, 2022 06:35 PM
देवेश त्रिपाठी
देवेश त्रिपाठी
  @devesh.r.tripathi
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और यूपी पुलिस के खिलाफ विपक्षी दलों की ओर से ये मिथक स्थापित कर दिया गया था कि सूबे में मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाते हुए एकतरफा कार्रवाई की जा रही है. आसान शब्दों में कहा जाए, तो योगी आदित्यनाथ और यूपी पुलिस पर चुन-चुनकर मुस्लिमों को ही निशाना बनाने के बेहद गंभीर आरोप लगाए गए. लेकिन, बीते कुछ दिनों में अयोध्या और मेरठ की दो बड़ी घटनाओं में यूपी पुलिस की कार्रवाई ने इस स्थापित कर दिए गए मिथक को तोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई थी. लेकिन, इन कार्रवाईयों से यूपी पुलिस की छवि सुधरी ही थी कि चंदौली में हुई एक घटना ने सब चौपट कर दिया. आइए जानते हैं कि अयोध्या और मेरठ में पुलिस ने ऐसा क्या किया, जो उसकी तारीफ हुई. और, चंदौली में क्या हुआ, जो यूपी पुलिस पर गंभीर आरोप लगने लगे?  

 Chandauli Action UP Police imageचंदौली कांड में जांच के बाद ही पूरी बात सामने आएगी. लेकिन, यूपी पुलिस की साख पर फिर से बट्टा लग गया.

अयोध्या में 'हिंदू योद्धाओं' पर एनएसए की कार्रवाई

बीते दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धर्म को लेकर दो टूक बात कही था कि 'धर्म व्यक्तिगत आस्था का विषय है. सरकार सभी धर्मों का सम्मान करती है. लेकिन, इसका भद्दा प्रदर्शन कर दूसरों को परेशान करना स्वीकार नहीं किया जाएगा.' योगी आदित्यनाथ की इस बात को दिमाग में रखते हुए अब रामनगरी अयोध्या में हुई उस घटना की ओर ध्यान देते हैं. जहां कुछ अराजक तत्वों ने मुस्लिमों को सबसे बड़े त्योहार ईद के मौके पर धार्मिक माहौल खराब करने की साजिश रची. दरअसल, अयोध्या में कुछ अराजक तत्वों ने धार्मिक माहौल बिगाड़ने की नीयत से जालीदार टोपी लगाकर मस्जिद में सुअर का मांस और पवित्र कुरान के फटे पन्ने फेंके थे. जैसे ही यूपी पुलिस को इस मामले की जानकारी हुई. उसने ताबड़तोड़ एक्शन लेते हुए पहले माहौल को सांप्रदायिक रंग दिए जाने से रोका. जो ऐसे हालातों में सबसे जरूरी था.

इसके बाद यूपी पुलिस ने केवल 24 घंटों के अंदर ही मामले का खुलासा कर दिया. यूपी पुलिस ने तत्काल एक्शन में आते हुए सीसीटीवी फुटेज की जांच की. सीसीटीवी फुटेज के आधार पर यूपी पुलिस ने इस घटना को अंजाम देने वाले 7 लोगों को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस इस मामले के मास्टरमाइंड और मुख्य साजिशकर्ता महेश मिश्रा समेत प्रत्यूष कुमार, नितिन कुमार, दीपक गौड़, ब्रजेश पांडे, शत्रुघ्न और विमल पांडेय को गिरफ्तार किया. और, जैसा ऐसी घटनाओं के मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ का सख्त आदेश है. यूपी पुलिस ने इन लोगों पर बिना कोताही के एनएसए की कार्रवाई करने की तैयारी भी कर ली. पुलिस के मुताबिक, महेश मिश्रा अयोध्या में हिंदू योद्धा नाम से एक संगठन चलाता है. 

अगर विपक्षी दलों के आरोपों को आधार मानते हुए देखा जाए, तो इस घटना को अंजाम देने वाले अपराधियों पर किसी तरह की कोई कार्रवाई ही नहीं होनी चाहिए थी. क्योंकि, ये सभी कट्टर हिंदू थे. और, योगी सरकार में कट्टर हिंदुओं पर कार्रवाई करने के बजाय सिर्फ मुस्लिमों को निशाना बनाया जाता है. लेकिन, इस मामले में योगी आदित्यनाथ और यूपी पुलिस से जुड़ा एकतरफा कार्रवाई का मिथक बुरी तरह से चकनाचूर हो गया.

हाशिमपुरा में नहीं होने दिया हाईवे पर माता का जागरण

मेरठ के हाशिमपुरा का मामले ने भी सीएम योगी आदित्यनाथ और यूपी पुलिस से जुड़े मिथक को तोड़ने में एक दिलचस्प भूमिका निभाई थी. दरअसल, मेरठ के मुस्लिम बहुल इलाके हाशिमपुरा में कुछ भाजपा नेताओं ने 2 मई की रात में माता के जागरण (Mata Ka Jagran) का आयोजन करने का प्रस्ताव रखा था. जिसके बाद यूपी पुलिस के स्थानीय थाना प्रभारी ने माता के जागरण की अनुमति देने से इनकार कर दिया था. थाना प्रभारी का कहना था कि ईद के मौके को देखते हुए माहौल बिगड़ सकता है. इसलिए अनुमति नहीं दी जा सकती है. थाना प्रभारी ने भाजपा नेताओं को साफ शब्दों में अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि मुस्लिम बहुल इलाका है, तो बिना अनुमति के जागरण करने की इजाजत नहीं होने दूंगा. जिस पर भाजपा नेताओं ने चेतावनी देते हुए बिना अनुमति ही जागरण करने का दंभ भर दिया. 

इस विवाद से जुड़ा एक ऑडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था. जिसे लेकर दावा किया जा रहा था कि यूपी पुलिस किसी भी हाल में भाजपा के नेताओं को माता का जागरण करने से नहीं रोक पाएगी. हालांकि, दो मई को होने वाला माता का जागरण अब नहीं होगा. दरअसल, इस भाजपा नेताओं के चेतावनी देने के साथ ही यूपी पुलिस के अधिकारी एक्टिव मोड में आ गए. और, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने भाजपा नेताओं और मुस्लिम समाज के लोगों के बीच बातचीत के सहारे मामले को सुलझा दिया. दैनिक जागरण में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, एसपी सिटी ने स्पष्ट कर दिया है कि हाशिमपुरा में गैर परंपरागत जागरण नहीं होगा, जिसे लेकर दोनों पक्षों ने आपस में बैठकर सहमति जता दी है.

अब इस मामले में विपक्षियों के आरोपों को देखा जाए, तो उत्तर प्रदेश में एक कट्टर हिंदुत्ववादी सरकार है. योगी आदित्यनाथ को हमेशा से ही एक कट्टर हिंदू के तौर पर पेश किया जाता रहा है. लेकिन, अपनी छवि के विपरीत योगी आदित्यनाथ और यूपी पुलिस ने भाजपा नेताओं के भी दबाव को फुस्स पटाखा साबित कर दिया. जबकि, कुछ लोग यहां तक दावा कर देते हैं कि भाजपा नेताओं से भिड़ने पर यूपी पुलिस के अधिकारियों तक का ट्रांसफर हो जाता है. लेकिन, यहां यूपी पुलिस ने पूरी मुस्तैदी के साथ मामले को संज्ञान में लेते हुए बिना किसी जोर-जबरदस्ती के दोनों पक्षों में समझौता करा दिया.

चंदौली में यूपी पुलिस की कार्रवाई पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के मनराजपुर गांव में यूपी पुलिस गैंगस्टर के एक आरोपी कन्हैया यादव के घर दबिश देने गई थी. दबिश के बाद गांव में हल्ला मच गया कि कन्हैया की बेटी निशा यादव की मौत हो गई है. दरअसल, परिजनों ने यूपी पुलिस पर आरोप लगाया है कि गैंगस्टर कन्हैया को पकड़ने के लिए दबिश के दौरान उसकी बेटियों निशा यादव उर्फ गुड़िया और गुंजा को पीटा गया. और, पीटे जाने की वजह से ही गुड़िया की मौत हो गई. छोटी बेटी भी घायल बताई जा रही है. इतना ही नहीं, परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने घटना को आत्महत्या की शक्ल देने की कोशिश में बेटी की लाश को फंदे से टांग दिया.

वहीं, संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद निशा के शव का पोस्टमार्टम किया गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से उसकी मौत का कारण साफ नहीं हुआ. लेकिन, उसकी रिपोर्ट में गले के पास एक खरोंच और बाएं जबड़े के नीचे आधा सेंटीमीटर की छोटी चोट सामने आई है. चंदौली के एसपी अंकुर अग्रवाल ने इस मामले में कहा है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में इन चोटों के अलावा शरीर पर कोई अंदरूनी चोट नहीं आई है. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण अज्ञात लिखा गया है. पीएम रिपोर्ट पर सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मौत का आत्महत्या या चोट नही है, तो मौत कैसे हुई?

वहीं, परिजनों द्वारा पुलिस पर शव को फंदे से लटकाए जाने के आरोप भी सवाल के घेरे में हैं. दरअसल, शव को फंदे से लटकते केवल परिजनों ने ही देखा है. पुलिस का कहना है कि संदिग्ध परिस्थितियों और अस्पष्ट कारणों से मौत के चलते विसरा सुरक्षित रखा गया है. इसकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. हालांकि, इस मामले में कार्रवाई करते हुए थानाध्यक्ष को निलंबित करते हुए SHO समेत 6 लोगों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है. घटना के बाद से ही गांव में तनाव बना हुआ है. और, पीएसी की तैनाती की गई है. आसान शब्दों में कहा जाए, तो अयोध्या और मेरठ की घटनाओं पर पुलिस ने जितनी सूझबूझ दिखाई. चंदौली की घटना से पुलिस की उस साख पर बट्टा लग गया है.

लेखक

देवेश त्रिपाठी देवेश त्रिपाठी @devesh.r.tripathi

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं. राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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