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Updated: 03 मार्च, 2020 01:39 PM
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
  @bilal.jafri.7
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उत्तर पूर्वी दिल्ली में दंगे (North East Delhi riots) हुए. फिर 1 मार्च को एक हिंदूवादी संगठन ने शाहीनबाग (ShaheenBagh) तक रैली निकालने का आह्वान कर दिया. इस तनाव से निपटने के लिए पुलिस ने मीटिंग करके प्रदर्शनकारियों को समझा बुझा दिया. लेकिन अनहोनी का डर बना रहा. पुलिस बार बार लोगों से यही अपील कर रही थी कि लोग अफवाहों से बचें और उनका प्रसार बिलकुल न करें. दिन शांति से बीता, लेकिन शाम को वही हो गया, जिसका डर था. आग की तरह खबर फैली कि दिल्ली में दंगे हो गए हैं. जगह जगह अफराह तफरी मच गई. जैसे तैसे पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया. बाद में जो जांच हुई उसमें यही निकल कर आया कि इन अफवाहों की एक बड़ी वजह वाट्सएप (Whatsapp) था. पुलिस ने इस मामले में अभिषेक शुक्ला नामक शख्स को गिरफ्तार कर लिया है.

दिल्ली में शांति बनी रहे इसलिए दिल्ली विधानसभा द्वारा शांति और सौहार्द कमेटी का गठन किया गया है. कमेटी की अध्‍यक्षता की जिम्मेदारी आम आदमी पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज की है. दिल्ली सचिवालय में कमेटी की पहली बैठक हुई है और इसमें कई जरूरी निर्णय लिए गए हैं. बताया जा रहा है कि शहर की शांति व्यवस्था बनी रहे इसलिए कमेटी ठोस कदम उठाएगी. माना ये भी जा रहा है कि कमेटी उत्तर दक्षिणी दिल्ली में हुए दंगों के लिए जिम्मेदार सभी कारणों की पड़ताल करेगी.

Delhi Riots, Aam Aadmi Party, Whatsapp, Rumourफेक न्यूज़ और अफवाह को लेकर आम आदमी पार्टी की तरफ से बदुई घोषणा की गई है

कमेटी मैसेजों खास तौर से वाट्सएप का इस्तेमाल करके फैलाए जा रहे मैसेज को लेकर बहुत गंभीर है. अपनी पहली बैठक में कमेटी ने इस बात पर बल दिया है कि अगर कोई भी ऐसे मैसेज को जिससे शांति प्रभावित हो, अफवाह को पंख मिले भेजता है, उन्हें फॉरवर्ड करता है या फिर ट्विटर पर उन्हें रिट्वीट करता है तो उसे तीन साल की सजा होगी.

कमेटी के अध्यक्ष सौरभ भरद्वाज अपनी इस पहल के लिए काफी गंभीर हैं. उन्होंने कहा है कि कमेटी इसके लिए फोन नंबर जारी करेगी साथ ही इसकी रोकथाम के लिए लीगल एक्सपर्ट्स की एक टीम को भी नियुक्त किया जाएगा. टीम द्वारा यह बताया जाएगा कि इसमें किसी तरह का आपराधिक मामला या पृष्‍ठभूमि है या नहीं. अध्‍यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इस काम में पुलिस के रिटायर अधिकारियों की भी मदद ली जाएगी. बैठक में इस बात पर भी बल दिया गया है कि अगर किसी को भी भड़काऊ ट्वीट या मैसेज मिले तो वह विधानसभा की कमेटी के संज्ञान के लिए भेजे.

ध्यान रहे कि आज किसी भी तरह के दंगे के प्रचार प्रसार के लिए ट्विटर और वाट्सएप एक उत्प्रेरक की तरह काम कर रहे हैं. अफवाह हिंसा का एक बहुत बड़ा कारण बन रही है जिससे जान और माल की हानी हो रही है. आज जैसे हालात हैं सिर्फ एक मैसेज के जरिये देश की अखंडता और एकता को प्रभावित किया जा सकता है और  तिल का ताड़ बनाते हुए जगह जगह दंगे कराए जा सकते हैं.

बता दें कि दिल्‍ली विधानसभा ने शांति और सद्भाव के लिए जिस नौ सदस्‍यीय 'शांति व सद्भाव कमिटी' का गठन किया, उसमें सौरभ भारद्वाज के अलावा आतिशी, राघव चड्ढ़ा, अब्दुल रहमान, अजय कुमार महावार, बीएस जोन, दिलीप पांडे, जरनैल सिंह और कुलदीप कुमार जैसे लोगों को शामिल कर प्रयास किये गए हैं कि दिल्ली को अब और किसी तरह के नुकसान का सामना नहीं करना पड़े.

बहरहाल, ये कमेटी को देख कर ये कहना भी गलत नहीं है कि इसका निर्माण एक ऐसे वक़्त में हुआ है जब नागरिकता संशोधन कानून के विरोध की आग में दिल्ली का उत्तर दक्षिणी हिस्सा जल के खाक हो चुका है और जहां स्थिति सामान्य होने में अब भी लंबा वक़्त लगने वाला है. सवाल ये है कि दो कमेटी घटना के एक हफ्ते बाद बनी उसका निर्माण पहले क्यों नहीं किया गया. आखिर क्यों जिस वक़्त दिल्ली जल रही थी केजरीवाल सरकार हाथ पर हाथ धरे तबाही देखती रही.

खैर, दिल्ली शहर की अमन शांति के लिए राज्य सरकार देर से ही सही लेकिन ठीक समय पर सचेत हुई. कमेटी की कार्यप्रणाली एक जटिल प्रश्न है. देखना दिलचस्प रहेगा कि ये कमेटी कैसे काम करती है और फेक न्यूज़ या ये कहें कि अफवाहों के निवारण के लिए कड़ा कदम उठाते हुए कितनी गिरफ्तारियां करती हैं. ये सवाल हमारे सामने इसलिए भी खड़े ही रहे हैं क्योंकि पूर्व में भी ऐसे तमाम मौके आए हैं जब इस तरह की कमेटियां तो बनीं मगर जैसे जैसे वक़्त गुजरा ये कमेटियां ठन्डे बसते में चली गयीं. 

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लेखक

बिलाल एम जाफ़री बिलाल एम जाफ़री @bilal.jafri.7

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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