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कार्तिक की Captain India शूट से पहले ही विवादों में, कौन बनाएगा 'यमन संकट' पर फिल्म?

    • अनुज शुक्ला
    • Updated: 01 अगस्त, 2021 08:35 PM
  • 01 अगस्त, 2021 08:35 PM
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एक ही कहानी पर दो फ़िल्में बनाने ना बनाने को लेकर चर्चा के पीछे की वजह कार्तिक आर्यन की कैप्टन इंडिया और निर्माता सुभाष काले की ऑपरेशन यमन का कथित तौर पर एक ही सब्जेक्ट होना है. इसे लेकर विवाद शुरू हो गया है.

क्या एक ही कहानी पर दो फ़िल्में नहीं बनाई जा सकती हैं? दरअसल, ये सवाल बॉलीवुड में कथित रूप से मिलते-जुलते सब्जेक्ट पर बन रही दो फिल्मों की वजह से ताजा हो गया है. कुछ साल पहले देश ने मिडिल ईस्ट में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया था. अब सामने आ रहा है कि उसी कहानी पर बॉलीवुड के दो बड़े प्रोजेक्ट शुरू हुए हैं. दोनों कहानियां एक ही इवेंट से जुड़ी हैं. अगर एक इवेंट से जुड़ी हैं तो स्वाभाविक है दोनों कहानियों में बहुत सारी सामानताएं होंगी. बावजूद, क्या एक ही व्यक्ति या घटना पर कहानियां नहीं बनाई जा सकतीं. क्या ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. जबकि सब्जेक्ट पब्लिक डोमेन में है.

एक ही कहानी पर दो क्या, बहुत सारी फ़िल्में बनाई जा सकती हैं. एक ही कहानी पर बहुत सारे सिनेमा और सीरियल्स बने भी हैं. ये कोई पहली बार नहीं हो रहा है. रामायण-महाभारत जैसी धार्मिक-ऐतिहासिक कहानियों पर अब तक ना जाने कितने काम हुए हैं, जो अभी भी जारी है. शहीद-ए-आजम भगत सिंह की कहानी ही ले लीजिए कितनी ही फ़िल्में और सीरियल्स में उनकी कहानी को दिखाया जा चुका है. ऐसी उम्मीद आगे भी है. यहां तक कि फिक्शनल ड्रामा में भी एक फिल्म को दोबारा बनाने की परंपरा भी दिखी. कई फ़िल्में हैं जो मूल रिलीज के सालों बाद फिर से बनाई गईं. मजेदार ये कि ज्यादातर ने कामयाबी भी हासिल की और कुछ पुराने के मुकाबले डूब गईं.

मिथुन चक्रवर्ती-अशोक कुमार एके हंगल की कॉमेडी ड्रामा शौक़ीन (1981) से शौक़ीन्स बनी. 1967 में आई राजेश खन्ना की इत्तेफाक को 2017 सिद्धार्थ मल्होत्रा-अक्षय खन्ना के साथ बनाया गया. सलमान खान की जुड़वा और गोविंदा की कुली नं. 1 सेम टाइटल से वरुण धवन के साथ भी बनी. जितेंद्र की हिम्मतवाला अजय देवगन के साथ बनी. हिम्मतवाला को छोड़कर बाकी फिल्मों ने लागत के मुकाबले ठीक-ठाक बिजनेस किया. कहने का मतलब ये कि जब एक ही फिल्म से दूसरी फ़िल्म बन सकती है तो एक कहानी या घटना पर एक से ज्यादा फ़िल्में क्यों नहीं?

क्या एक ही कहानी पर दो फ़िल्में नहीं बनाई जा सकती हैं? दरअसल, ये सवाल बॉलीवुड में कथित रूप से मिलते-जुलते सब्जेक्ट पर बन रही दो फिल्मों की वजह से ताजा हो गया है. कुछ साल पहले देश ने मिडिल ईस्ट में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया था. अब सामने आ रहा है कि उसी कहानी पर बॉलीवुड के दो बड़े प्रोजेक्ट शुरू हुए हैं. दोनों कहानियां एक ही इवेंट से जुड़ी हैं. अगर एक इवेंट से जुड़ी हैं तो स्वाभाविक है दोनों कहानियों में बहुत सारी सामानताएं होंगी. बावजूद, क्या एक ही व्यक्ति या घटना पर कहानियां नहीं बनाई जा सकतीं. क्या ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. जबकि सब्जेक्ट पब्लिक डोमेन में है.

एक ही कहानी पर दो क्या, बहुत सारी फ़िल्में बनाई जा सकती हैं. एक ही कहानी पर बहुत सारे सिनेमा और सीरियल्स बने भी हैं. ये कोई पहली बार नहीं हो रहा है. रामायण-महाभारत जैसी धार्मिक-ऐतिहासिक कहानियों पर अब तक ना जाने कितने काम हुए हैं, जो अभी भी जारी है. शहीद-ए-आजम भगत सिंह की कहानी ही ले लीजिए कितनी ही फ़िल्में और सीरियल्स में उनकी कहानी को दिखाया जा चुका है. ऐसी उम्मीद आगे भी है. यहां तक कि फिक्शनल ड्रामा में भी एक फिल्म को दोबारा बनाने की परंपरा भी दिखी. कई फ़िल्में हैं जो मूल रिलीज के सालों बाद फिर से बनाई गईं. मजेदार ये कि ज्यादातर ने कामयाबी भी हासिल की और कुछ पुराने के मुकाबले डूब गईं.

मिथुन चक्रवर्ती-अशोक कुमार एके हंगल की कॉमेडी ड्रामा शौक़ीन (1981) से शौक़ीन्स बनी. 1967 में आई राजेश खन्ना की इत्तेफाक को 2017 सिद्धार्थ मल्होत्रा-अक्षय खन्ना के साथ बनाया गया. सलमान खान की जुड़वा और गोविंदा की कुली नं. 1 सेम टाइटल से वरुण धवन के साथ भी बनी. जितेंद्र की हिम्मतवाला अजय देवगन के साथ बनी. हिम्मतवाला को छोड़कर बाकी फिल्मों ने लागत के मुकाबले ठीक-ठाक बिजनेस किया. कहने का मतलब ये कि जब एक ही फिल्म से दूसरी फ़िल्म बन सकती है तो एक कहानी या घटना पर एक से ज्यादा फ़िल्में क्यों नहीं?

एक ही कहानी पर दो फ़िल्में बनाने ना बनाने को लेकर चर्चा के पीछे की वजह कार्तिक आर्यन की "कैप्टन इंडिया" और निर्माता सुभाष काले की "ऑपरेशन यमन" का कथित तौर पर एक ही सब्जेक्ट होना है. काले के मुताबिक़ अक्षय को सब्जेक्ट पसंद आया है. जल्द ही वो कहानी सुनकर अपनी इच्छा बताते. फिल्म के लिए और भी दिग्गज कलाकारों से बात हुई है. कार्तिक की फिल्म का निर्देशन दिग्गज हंसल मेहता कर रहे हैं. पिछले दिनों ही फिल्म का लुक पोस्टर भी सामने आया था. जबकि संजय संकला काले की फिल्म का निर्देशन करने जा रहे हैं. ऑपरेशन यमन के निर्माता सुभाष काले ने कैप्टन इंडिया के निर्माताओं पर प्लेगरिज्म का सीधा आरोप लगाया है. उन्होंने दावा किया कि भले ही टॉपिक पब्लिक डोमेन में है लेकिन आइडिया पर उनकी तरफ से काम शुरू होने के काफी बाद कैप्टन इंडिया की शुरुआत की गई है. ये दूसरी बात है कि जब कैप्टन इंडिया का पहला पोस्टर आया उसमें ये तो बताया गया कि फिल्म मिडिल ईस्ट के किसी देश में रेस्क्यू ऑपरेशन पर आधारित है. लेकिन यह साफ नहीं किया गया कि यमन त्रासदी को लेकर उसी आइडिया पर फिल्म बनाई जा रही है जिसका आरोप काले ने लगाया है.

काले ने कैप्टन इंडिया के फर्स्ट लुक पोस्टर के आधार पर कहा कि उसमें जो शहर दिख रहा है वो यमन की राजनधानी सना ही है. फिल्म का टाइटल (और मेकर्स ने सब्जेक्ट पर इशारों में जो संकेत दिए) भी उसी घटना से जोड़ रहा है. काले ने बॉलीवुड हंगामा से दावा किया - हम पिछले छह साल से प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं. संजय के चचेरे भाई मिशन के पायलट थे. संजय प्रतिष्ठित एडिटर हैं और करीब 95 फिल्मों का काम कर चुके हैं. उन्होंने रिसर्च (ऑपरेशन यमन) पर काफी मेहनत किया और जब मुझे कहानी सुनाई मैंने कहा कि ये काफी रोचक विषय है और हमें इस पर काम करना चाहिए. कहानी लिखने में हमें 9 महीने का समय लगा. यहां तक कि हमने मिशन मंगल के कहानी लिखने वाले निधि धर्मा को भी प्रोजेक्ट से जोड़ा. प्री प्रोडक्शन का काम पूरा होने वाला ही था. काले ने यह भी दावा किया कि ऑपरेशन यमन की कहानी स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन में पहले से ही रजिस्टर है. काले सीधे-सीधे यही कहना चाहते हैं कि ऑपरेशन यमन की कहानी लीक होने के बाद ही आनन-फानन में कार्तिक आर्यन को लेकर कैप्टन इंडिया बनाने की कोशिश तेज हुई. भले ही अब तक कैप्टन इंडिया की कहानी का ज्यादा बड़ा क्लू ना दिया गया हो.

कैप्टन इंडिया के बारे में आधिकारिक रूप से बताया गया कि ये देश के सबसे बड़े रेस्क्यू मिशन की कहानी है. युद्धग्रस्त देश से भारतीयों को बाहर निकाला गया और जिस पायलट ने ऑपरेशन को अंजाम दिया उसी की जांबाजी को पर्दे पर कार्तिक निभाते नजर आएंगे. क्या सच में फिल्म की वही कहानी है जिसे लेकर सुभाष काले आरोप लगा रहे हैं. या दोनों फिल्मों में यमन क्राइसिस और कुछ घटनाएं एक हैं मगर स्क्रिप्ट ट्रीटमेंट यानी अंदाज-ए-बयां अलग-अलग है. अगर आरोपों पर कैप्टन इंडिया के मेकर्स का जवाब आता है तो तस्वीर थोड़ी बहुत साफ़ होगी. नहीं तो सिनेमा आने के बाद ही पता चलेगा कि हकीकत क्या है. बशर्ते कोई कानूनी अड़ंगा ना लगे. दोनों प्रोजेक्ट पर कानूनी दांवपेंच असर डाल सकते हैं इस बात की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. क्योंकि सुभाष काले ने खुले तौर पर रचनात्मक चोरी का आरोप लगाया है. वो जिस तरह सामने आ रहे हैं, मामले को लेकर शायद अदालत भी जाएं.

तो खुल ही गई कैप्टन इंडिया की कहानी...

लेकिन, कैप्टन इंडिया की कहानी का बहुत बड़ा क्लू अब सबके सामने आ गया है. फर्स्ट पोस्टर लुक जारी करते समय मेकर्स ने प्लाट को लेकर रहस्य बनाया था अब उसका कोई मतलब नहीं है. यानी कार्तिक आर्यन की कैप्टन इंडिया के केंद्र में साल 2015 का यमन क्राइसिस है. क्योंकि हाल फिलहाल यमन संकट ही ऐसा बड़ा संकट बना जहां भारतीयों को बचाने के लिए बहुत बड़ा ऑपरेशन चलाया गया. तब यमन युद्ध की चपेट में था. उसके शहर जल रहे थे. यहां तक राजधानी सना भी खतरे की जद में था. वहां पर भारतीय कामगार और श्रमिक, विदेशी सेवा के सरकारी कर्मचारी, कुछ कारोबारी फंसे थे. उन्हें बचाने और यमन से सुरक्षित निकालने की चुनौती थी. उस ऑपरेशन में नेवी को भी मोर्चे पर लगाया गया था. नौकाएं और यमन में काम करने में सक्षम एजेंसीज की भी मदद ली गई थी. भारत सरकार ने एक एक नागरिक को सुरक्षित निकालने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया था. यहां तक कि उस दौरान मोदी सरकार में विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह के नेतृत्व में ही भारतीय आर्म्ड फोर्सेस ने बहुत बड़ा रेस्क्यू अभियान चलाया था. वीके सिंह खुद पांच दिन जिबूती में रुके थे और उनकी निगरानी में भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था.

जो भी हो. यमन संकट से भारतीयों को बचाने की कहानी बहुत ही दिलचस्प है. अगर इसे सही तरीके से बनाया गया तो फिल्म की कहानी में बहुत क्षमताएं हैं. दर्शकों को बेहतरीन थ्रिल और एक्शन-इमोशन देखने को मिलेगा. ऐसी कहानियां हमेशा ही बॉक्स ऑफिस पर अच्छा बिजनेस करती रही हैं. दुर्भाग्य से बॉलीवुड ने त्रासदियों और उन्हें लेकर चलाए गए ऑपरेशंस पर बहुत कम फ़िल्में बनाई हैं. यमन क्राइसिस से जुड़े दोनों प्रोजेक्ट का भविष्य क्या होगा ये देखने वाली बात होगी.

इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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