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Updated: 04 अक्टूबर, 2021 07:53 PM
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
  @bilal.jafri.7
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2014 के आम चुनाव के बाद बैकफुट पर आई और 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर हिंदू हिंदू खेल रही कांग्रेस ख़ुद को सच्चा और विराट हिंदू साबित करने के लिए हर कीमत चुकाने को तैयार है. मतलब कांग्रेस का तो ऐसा हो गया है कि अगर बात अपने को प्योर हिंदूवादी साबित करने की आ जाए तो उसे जलते तवे तक पर बैठने से गुरेज नहीं है. हिंदू वाले केस में चाहे वो राहुल गांधी हों, प्रियंका हों या फिर दिग्विजय सिंह इनका मामला तो फिर भी सीजनल रहता है मगर आचार्य प्रमोद कृष्णम बाकी कांग्रेसी नेताओं से अलग हैं. हिंदुत्व पर जैसा प्रमोद कृष्णम का रुख है वो साल के 12 महीने, 365 दिन, 24 घंटे एवर रेडी हैं. न यकीन हो तो लखीमपुर पुर में किसानों की मौत मामले को ही देख लीजिए. लखीमपुर खीरी में हिंसा के पीड़ितों से मिलने पहुंचीं प्रियंका गांधी वाड्रा को पुलिस ने तड़के साढ़े 5 बजे हिरासत में ले लिया. और एक गेस्ट हाउस में ठहराया.

प्रियंका गांधी को पुलिस ने जिस गेस्ट हाउस में हिरासत में रखा है, वहां से उनका एक वीडियो सामने आया है. इस वीडियो में प्रियंका कमरे में झाड़ू लगाती दिख रहीं हैं. करीब 45 सेकंड के इस वीडियो में दिख रहा है कि पूरा कमरा खाली पड़ा है और प्रियंका झाड़ू लगा रहीं हैं.

Lakhimpur Kheri Violence, Priyanka Gandhi, BJP, UP, Ajay Mishra, Acharya Pramod Krishnamसाफ़ सुथरे कमरे में झाड़ू लगाती प्रियंका गांधी

प्रियंका का झाड़ू लगाना भर था कि कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम जज्बाती हो गए. स्वामिभक्ति का परिचय देते हुए स्वामी ने प्रियंका का वीडियो शेयर किया और लिखा कि  गिरफ़्तारी के दौरान 'हवालात' में झाड़ू लगाती हुई इंदिरा गांधी की पोती और 'राक्षसों' का वध करने वाली आदि शक्ति इसके बाद उन्होंने प्रियंका गांधी को टैग कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्ति पाई. 

वाक़ई मानना पड़ेगा आचार्य को साथ ही उनकी निष्ठा को. न जाने कहां से वो स्थान जहां प्रियंका ने साफ़ सफाई की थी, वो आचार्य को हवालात लग गया. समझदारों को तो छोड़ ही दीजिये मूर्ख से मूर्ख व्यक्ति भी अगर इस वीडियो को देखे इसमें प्रियंका गांधी वाड्रा को साफ़ कमरे में सफाई करते हुए देखे तो यही कहेगा कि भइया रील से लेकर रियल तक, हमने अपने जीवन में इतनी आलीशान हवालात न देखी.

कमरे में एसी लगा है. ठंडी ठंडी हवा आ रही होगी. घड़ी है जो टाइम बता रही है. चकाचक दीवारें हैं. खूबसूरत परदे हैं. रौशनी आने के लिए रौशनदान है. ऐसी हवालात की कल्पना हिंदुस्तान जैसे देश में शायद ही हमने कभी की हो. साफ़ है कि आचार्य प्रमोद कृष्णम प्रियंका को बेचारी साबित करने के लिए झूठ का सहारा ले रहे हैं.

ये तो बात हो गयी हवालात की. अब जैसा कि हमने पहले ही बता दिया था आचार्य ने इस मामले में भी प्रियंका को हिंदू दिखाने की कोशिश की है. तो जिस तरह उन्होंने प्रियंका को आदि शक्ति कहा है और बताया है कि वो राक्षसों का वध करने वाली हैं तो जाहिर है प्रियंका 'पीड़ित परिवारों' से मिलने गयीं थीं और जनता समझदार है अब ज्यादा हम क्या ही कहें.

याद रखिये दुनिया का दस्तूर है कोई काम फ्री में नहीं होता. प्रियंका यदि लखीमपुर हैं तो कारण बस इतना है कि उत्तर प्रदेश में चुनाव हैं और साम दाम दंड भेद कुछ भी एक करके प्रियंका के बलबूते कांग्रेस यूपी में इतिहास रचना चाहती है. 

जब इतना सब कुछ हम बता ही चुके हैं तो आचार्य के इंदिरा की पोती वाले पॉइंट पर भी थोड़ी बहुत बात कर ली जाए. ये दुनिया जानती हैं कि प्रियंका, इंदिरा की पोती हैं लेकिन आचार्य को ये समझना होगा कि भले ही प्रियंका में इंदिरा का अक्स दिखता हो लेकिन प्रियंका इंदिरा नहीं हैं. और हां जैसी हरकतें कांग्रेस नेताओं की हैं यदि आज इंदिरा होतीं तो अवश्य ही कांग्रेस की मिटटी पलीत करने वाले नेताओं  को वो जिला बदर कर देतीं या अज्ञातवास में डाल देतीं.  

बहरहालम, अब जबकि प्रमोद कृष्णम ने प्रियंका को असुरों का विनाश करने वाली आदिशक्ति बता ही दिया है तो ये कहना अतिश्योक्ति न होगा कि सिर पर उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव हैं ऐसे में कांग्रेस नेता फिर वही पुरानी गलती को दोहरा रहे हैं.

चाहे आचार्य प्रमोद कृष्णम हों या कोई और तमाम कांग्रेसियों को इस बात को याद रखना होगा कि उनका इस तरह खुद को या पार्टी को हिंदू साबित करने का फ्रस्ट्रेशन ही भाजपा की जीत है. और जैसा कि इतिहास रहा है आचार्य की इस गलती का खामियाजा भी कांग्रेस और प्रियंका गांधी को ही भुगतना होगा।

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लेखक

बिलाल एम जाफ़री बिलाल एम जाफ़री @bilal.jafri.7

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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