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Updated: 01 दिसम्बर, 2021 03:26 PM
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
  @bilal.jafri.7
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दुनिया में हर क्षण कुछ न कुछ होता है. फिर खबरें बनती हैं और दुनिया भर में उनको लेकर चर्चा होती है. ऐसा ही कुछ ट्विटर के दफ्तर में भी हुआ है जिसने मेन स्ट्रीम मीडिया को संवाद के अवसर तो दिये ही. साथ ही जिसके बाद सोशल मीडिया पर भी भांति भांति की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. जैक डॉर्सी ने ट्विटर के सीईओ पद से इस्तीफा दे दिया है. कंपनी के नए सीईओ पराग अग्रवाल हैं. पराग अग्रवाल के ट्विटर के सीईओ बनने पर सोशल मीडिया पर जहां एक तरफ लोग खुशी जाहिर कर रहे हैं तो वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो जैक डॉर्सी के साथ हैं और उनके हटने पर अपने तर्क दे रहे हैं. क्योंकि बात हर बात पर अपनी राय देने वाले रायचंदों की चली है और ऐसे में हम देश की सबसे बड़ी रायचंद कंगना रनौत का नाम न आए तो सारी फिक्र अधूरी रह जाती है. मामले पर कंगना ने भी अपने पक्ष रखा है.

जैक के इस्तीफे को मुद्दा बनाकर अपनी बात कहने वाली कंगना ने साबित कर दिया है कि कल की डेट में जब इतिहास लिखा जाएगा तो उसमें उनका भी नाम होगा और शायद ये लिखा जाए कि ये वो शख्सियत हैं जो हर मुद्दे पर मुखर होकर अपनी बातें कहती हैं साथ ही जिन्हें उड़ते तीर लपक लपककर पकड़ने का शौक था.

जैक को लेकर कंगना की बातें एक तरफ भारतीय खुश हैं अब ट्विटर का सीईओ भी इंडियन है!ट्विटर से जैक के इस्तीफे के बाद कंगना ने भी इंस्टाग्राम स्टोरी पर अपने मन की बात कह दी है

बताते चलें कि कंगना ने जैक को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में जगह दी है और लिखा है कि बाय चाचा जैक. जो जानते हैं ठीक है. जो नहीं जानते हैं जान लें कि कंगना ने जैक को इज्जत नहीं बख्शी है बल्कि ये उनके व्यंग्य का स्टाइल है. ध्यान रहे कि एक कॉन्ट्रोवर्शियल ट्वीट के कारण कंगना का ट्विटर एकाउंट बंद कर दिया गया था जिसके बाद कंगना ने इंस्टाग्राम पर खूब हो हल्ला बचाया था लेकिन चचा जैक ने उनकी एक न सुनी थी.

कह सकते हैं तब शायद चचा जैक का दिन था और अब चूंकि जैक ने इस्तीफा दे ही दिया है तो अब जैक का नहीं बल्कि कंगना का दिन है और जैसा वक़्त का तकाजा है उन्हें पूरा हक है मौज लेने या उसमें शामिल होने का.

बात बाकी ये है कि है भारतीय आदमी बड़ा संतोषी. भले ही थैंक्स गिविंग के नाम पर बाहर गांव में लोग एक दूसरे को पिज्जा और फिंगर चिप्स खिलाते हों. कोल्ड ड्रिंक में शराब मिलाकर पिलाते हों. लेकिन जैसी थैंक्स गिविंग हम भारतीयों में है दुनिया मे कहीं संभव ही नहीं है.और ये बात पराग अग्रवाल के सीईओ बनने ने साबित कर दी है.

पहले सुंदर पीचाई फिर इंदिरा नुई, कमला हैरिस और अब पराग अग्रवाल भारतीय आदमी खुश है कि चलो अब वो वक़्त आ गया है जब ट्विटर को आजादी मिली है और वहां तिरंगा लहराया है. जिसे देखो वही पराग से रिशरेदारी निकालने को आतुर दिख रहा है. मतलब जैसा पब्लिक ओपिनियन है हैरत होती है ये देखकर कि आज पराग का सिर्फ इंडियन होना उनकी योग्यता पर, उनकी उपलब्धि पर भारी पड़ गया है.

ट्विटर खोलिये तो वहां का नजारा तो और भी विचलित करता है जिनके अपने खुदके एकदम व्यक्तिगत लड़के हाथ से निकल गए हों वो तक अग्रवाल जी के लड़के पर ऐसा लोहालोट हो रहे हैं कि डर यही है कि विडंबना शर्माकर कहीं पाताल में न पहुंच जाए.

करने को तो पराग ने अपनी ट्विटर यात्रा की शुरुआत 2011 में की थी फिर अपनी काबिलियत और मेहनत के बलबूते वो 2017 में कंपनी के चीफ टेक्निकल ऑफिसर बने लेकिन तब शायद लोगों ने इसे छोटी घटना माना हो और इस खबर पर कान न दिये हों लेकिन अब जबकि पराग ने अपनी योग्यता से इतिहास रच दिया है तो लोगों द्वारा उनके विषय में सिर्फ अच्छी बातें करना लाजमी है.

जिक्र पराग का हुआ है तो जैक के उस संदेश को भी बता ही देना चाहिए जो उन्होंने ट्विटर के बाकी साथियों को दिया है. कर्मचारियों को दिये गए अपने संदेश में जैक ने कहा है कि पराग अग्रवाल हर महत्वपूर्ण निर्णयों के पीछे रहे हैं और कंपनी को बदलने में मदद की है.

जैक ने ये भी कहा कि कहा, 'वह दिल और आत्मा के साथ आगे बढ़ते हैं और वह ऐसे व्यक्ति हैं जिनसे मैं रोजाना सीखता हूं. हमारे सीईओ के रूप में उन पर मेरा भरोसा बहुत गहरा है.

यानी जिस तरह की बातें जैक ने पराग के विषय में की हैं एकदम क्लियर है कि पराग अग्रवाल एकदम 24 कैरेट खरे आदमी हैं. अब जबकि जैक चचा का विरोध करते हुए कहीं न कहीं कंगना पराग के समर्थन में आई हैं तो देखना दिलचस्प रहेगा कि पराग उन्हें इसका सिला देते हुए उनका ट्विटर एकाउंट रिस्टोर करते हैं या इतनी तारीफों के बावजूद वो पहले की तरह बंद रहता है.

खैर पराग के सीईओ बनने ने एक बात तो साबित कर ही दी है कि चाहे अग्रवाल साहब और गुप्ता जी हों. या फिर सिद्दीकी और अंसारी साहब का लड़का. आदमी मेहनत करे तो वहां पहुंच सकता है जहां पहुंचना किसी भी आदमी के लिए एक हंसी सपने से कम नहीं होता. हां लेकिन इसके लिए आदमी को पढ़ाई लिखाई खूब करनी होती है और फिर किस्मत हो तो सोने पर सुहागा.

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लेखक

बिलाल एम जाफ़री बिलाल एम जाफ़री @bilal.jafri.7

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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